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कमोडिटी में रिकॉर्ड गिरावट के बावजूद तेल और दालें नहीं होंगी सस्ती

COMMODITY TEAM

Aug 25,2015 04:00:00 AM IST
नई दिल्ली। डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रुपए से घरेलू कंज्‍यूमर्स को ग्‍लोबल मार्केट में कमोडिटी की कीमतों में आई रिकॉर्ड गिरावट का लाभ अब नहीं मिल पाएगा। ग्‍लोबल मार्केट में कमोडिटी के दाम के घटने से दालें, खाद्य तेलों, गोल्‍ड, क्रूड सहित अन्‍य इम्‍पोर्ट होने वाली वस्‍तुओं की कीमतों में कमी आने की उम्‍मीद थी। लेकिन, डॉलर के मुकाबले 67 के करीब पहुंच चुका रुपया उस पर पानी फेर सकता है। इम्‍पोर्ट महंगा होने का सबसे ज्‍यादा असर दालों और खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ सकता है। वहीं, सस्‍ते क्रूड से पेट्रोल-डीजल में भारी कटौती की उम्‍मीद थी, लेकिन रुपया कमजोर होने से कंज्‍यूमर इस लाभ से वंचित हो सकते हैं।
बीते एक साल में दालें 60 फीसदी से अधिक महंगी हो गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 60 फीसदी इम्‍पोर्ट करता है। वहीं, क्रूड जरूरत का करीब 80 फीसदी इम्‍पोर्ट होता है।
महंगी दालों से राहत की उम्‍मीद नहीं
इंडियन पल्सेस एंड ग्रेन एसोसिएशन के चेयरमैन प्रवीण डोगरे ने कहा कि महंगी दालों से फिलहाल राहत की उम्मीद कम है। हालांकि, इस साल देश में दलहन की बुआई अच्छी हुई है। डोगरे ने बताया कि 50 लाख टन दाल इम्‍पोर्ट होने की संभावना है। फाइनेंशियल ईयर (अप्रैल-मार्च) के दौरान 46 लाख टन दाल का इम्‍पोर्ट हुआ था। इसमें 19.5 लाख टन मटर, 4.19 लाख टन चना और 8.16 लाख टन मसूर की दाल शामिल है।
कीमतों में नहीं दिखेगी बड़ी तेजी
पीएचडी चैंबर के चीफ इकोनॉमिस्ट एसपी शर्मा ने मनीभास्कर को बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपए में आई तेज गिरावट से इंपोर्ट होने वाली कमोडिटी जैसे दाल, खाद्य तेल, क्रूड ऑयल और सोने –चांदी की कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि ग्लोबल मार्केट में दाल को छोड़ बाकी सभी कमोडिटी की कीमतें कई साल के निचले स्तर पर हैं। ऐसे में कीमतों में बड़ी तेजी की संभावना कम है। लेकिन, आम उपभोक्ता को इसका फायदा मिलना चाहिए था वह उसे नहीं मिल पाएगा। शर्मा के मुताबिक रुपए में आई गिरावट का असर इंपोर्ट बिल पर जरूर पड़ेगा लेकिन इतना असर नहीं होगा, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट और फिस्कल डेफिसिट बढ़ जाए।
कंज्‍यूमर को नहीं मिल पाएगा सस्‍ती कमोडिटी का फायदा
निर्मल बंग कमोडिटीज के रिसर्च हेड कुनाल शाह ने कहा कि रुपए की गिरावट से मेटल्स, सोना-चांदी,खाद्य तेल और क्रूड ऑयल का इम्‍पोर्ट महंगा हो सकता है। इसके कारण ग्लोबल मार्केट में कमोडिटी की कीमतों में आई गिरावट का फायदा भारतीय कंज्‍यूमर को नहीं मिल पाएगा। रेलिगेयर के एवीपी (कमोडिटी) अजितेश मुलिक ने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपए में और गिरावट आती है तो पाम ऑयल महंगा हो सकता है। चालू ऑयल ईयर 2014-15 के पहले 9 महीने के दौरान 100 लाख टन से ज्यादा खाद्य तेलों का इम्‍पोर्ट हुआ है। पिछले साल यह आंकड़ा 80 लाख टन था। अक्टूबर में खत्म हो रहे ऑयल ईयर 2014-15 में 65,000 करोड़ रुपए मूल्य के 140 लाख टन खाद्य तेल इंपोर्ट होने का अनुमान है।
अगली स्लाइड में पढ़िए, कमजोर रुपए का पेट्रोल-डीजल और सोने पर असर...
जितनी उम्मीद, उतना नहीं सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल एनर्जी एक्सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने मनीभास्कर को बताया कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 40 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती हैं। लेकिन रुपए में कमजोरी की वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जितनी कटौती होनी चाहिए उसको झटका लग सकता है। एंजल कमोडिटी के एवीपी अनुज गुप्ता ने कहा कि ग्लोबल मार्केट में क्रूड की कीमतों में भारी गिरावट आई है। इसके कारण डॉलर के मुकाबले रुपए में आई कमजोरी का असर क्रूड की कीमतों में पर ज्यादा नहीं पड़ेगा। सोमवार को क्रूड की कीमतें 4 फीसदी से ज्यादा फिसलकर साढ़े 6 साल के नए निचले स्तर पर फिसल गई हैं। नायमैक्स पर डब्ल्यूटीआई क्रूड 39 डॉलर और ब्रेंट क्रूड की कीमतें 44 डॉलर प्रति बैरल के नीचे फिसल गई है। कमजोर रुपए से चमकेगा सोना डॉलर के मुकाबले रुपए में आई कमजोरी और शेयर मार्केट में गिरावट के चलते सोमवार को लगातार 15वें दिन भी सोने की कीमतों में तेजी जारी है। पिछले 15 में सोना 2595 रुपए महंगा चुका है। डॉलर के मुकाबले रुपया 81 पैसे कमजोर होकर 66.64 पर बंद हुआ है, जो सितंबर 2013 के बाद से सबसे निचले स्तर पर है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक 1 डॉलर की कीमत 68 रुपए तक पहुंच सकती है। ऐसे में सोने की कीमतों में तेजी आना तय है।
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