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हल्दी की कीमतों में आएगी तेजी, स्टॉक घटने से 25 फीसदी तक बढ़ेंगे दाम

उत्पादन में कमी और कैरी फॉरवर्ड स्टॉक आधा रहने से इस साल हल्दी की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।

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नई दिल्ली। उत्पादन में कमी और कैरी फॉरवर्ड स्टॉक आधा रहने से इस साल हल्दी की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। हल्दी के प्रमुख कारोबारियों के मुताबिक अगले 2-3 महीने में हल्दी के दाम 10 हजार से 11 हजार रुपए क्विंटल तक जा सकते हैं। शुक्रवार को हाजिर बाजार में हल्दी के भाव 8,500 रुपए प्रति क्विंटल पर थे। देश में हल्‍दी की सालाना खपत 70-75 लाख बोरी (एक बोरी 70 किलो) है, जबकि उत्पादन 50 लाख बोरी और कैरी फॉरवर्ड स्टॉक 50 लाख बोरी है। ऐसे में अगले साल के लिए कैरी फॉरवर्ड स्टॉक घटकर 25-30 लाख बोरी रहने की उम्मीद है।
 
1 साल में भाव में रहा उतार-चढ़ाव 
 
जनवरी में हल्दी की नई फसल आने से शॉर्ट टर्म में हल्दी में दबाव बना रहेगा। 2015 में हल्दी में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जनवरी 2015 में हल्दी के भाव 9,600 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे, लेकिन जुलाई 2015 में भाव 6,700 रुपए के निचले स्तर तक आ गया। इसके बाद इसमें फिर तेजी आई और दिसंबर 2015 में हल्दी के भाव 9,780 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए।
 
जनवरी में NDEX पर 20 फीसदी तक घटे भाव
 
जनवरी 2016 में हल्दी पर आवक का दबाव बन रहा है और इस महीने में हल्दी के भाव 20 फीसदी तक टूट चुके हैं। 1 जनवरी को एनसीडीईएक्स पर हल्दी 9,772 रुपए प्रति क्विटंल पर बंद हुई थी, जबकि शुक्रवार को हल्दी 8,168 पर कारोबार कर रही है। देश के सभी प्रमुख हल्दी उत्पादक राज्यों में नई आवक तेज है। जनवरी की शुरुआत से लेकर अभी तक देश भर की हाजिर मंडियों में करीब 6,918 टन हल्दी की आवक हो चुकी है। जनवरी की शुरुआत से लेकर अब तक हल्दी की कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। हल्दी की बुआई 15 मई से शुरू होती है और फसल 15 जनवरी के बाद आनी शुरू हो जाती है।
 
NCDEX वायदा पर हल्दी का रिटर्न
 
कमोडिटी
2011 में रिटर्न
2012 में रिटर्न
2013 में रिटर्न
2014 में रिटर्न
2015 में रिटर्न
हल्दी का रिटर्न
-53.48 फीसदी
42.64 फीसदी
-2.68
35.88
8.79
दिसंबर क्लोजिंग
4,766 रु/क्विंटल
6,798 रु/क्विंटल
6,616 रु/क्विंटल
8,990 रु/क्विंटल
9,780 रु/क्विंटल
 
बढ़ा हल्दी का एक्सपोर्ट
 
स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया के मुताबिक वित्त वर्ष 2015-16 की पहली छमाही के दौरान देश से 46,500 टन हल्दी का एक्सपोर्ट हो चुका है, जबकि 2014-15 की पहली छमाही में 44,406 टन हल्दी का एक्सपोर्ट हुआ था। 2014-15 में भारत से हल्दी का कुल एक्सपोर्ट 86,000 टन था, जबकि 2013-14 में हल्दी का एक्सपोर्ट 77,500 टन था। एक्सपोर्ट बढ़ने से हल्दी के भाव में तेजी का रुख देखने को मिल सकता है।
 
अगली स्लाइड में जानिए-  कैसा है हल्दी का आउटलुक... 
 
ल्दी में आगे क्या हैं संकेत
 
तमिलनाडु की इरोड मंडी में हल्दी के व्यापारी सुभाष चंद गुप्ता ने कहा कि इस साल हल्दी का 30 लाख बोरी कैरी फॉरवर्ड स्टॉक रहेगा, जबकि उत्पादन का अनुमान 50-55 लाख बोरी है। 2014-15 में 50 लाख बोरी का कैरी फॉरवर्ड स्टॉक था। वहीं घरेलू खपत 70-75 लाख बोरी (70 किलो) रहने का अनुमान है। ऐसे में कैरी फॉरवर्ड स्टॉक में कमी रहने से हल्दी की कीमतों में आगे तेजी देखने को मिल सकती है। 27 जनवरी से हल्दी की रबी सीजन की फसल मंडियों में आनी शुरू हो गई है ऐसे में कुछ समय के लिए हल्दी कीमतों पर दबाव देखा जा सकता है लेकिन फरवरी के बाद हल्दी में तेजी का रुख ही रहेगा। हाजिर बाजार में हल्दी की कीमत 11,000 क्विंटल तक जा सकती है।
 
तेलंगाना की निजामाबाद में हल्दी ट्रेडर पूनमचंद गुप्ता के मुताबिक इस बार उत्पादन 48-50 लाख बोरी रह सकता है और फरवरी से मई के बीच भाव 9,000-10,000 रुपए क्विंटल तक जा सकता है। इसके बाद हल्दी की कीमतें मानसून पर निर्भर करेंगी। अगर मानसून अच्छा रहता है तो हल्दी का एरिया बढ़ सकता है, जिससे आगे कीमतों में नरमी देखने को मिल सकती है। मानसून में देरी या कम बारिश का अनुमान होने से बुआई एरिया घट सकता है, जिससे हल्दी कीमतें दोबारा तेज हो सकती हैं।
 
केडिया कमोडिटी के एमडी अजय केडिया के मुताबिक हल्दी की सप्लाई में कमी और उत्पादन पर दबाव रहने के कारण मई-जून तक हल्दी की कीमतें 13,000-13,500 क्विंटल तक जा सकती हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कमजोर बारिश से रकबा घटने का भी अनुमान है। 
 
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