“अनाज के कटोरे” में सूखे का संकट, मानसून इन राज्यों के लिए बनेगा मुसीबत

धर्मेंद्र चौधरी

Jun 05,2015 04:58:00 PM IST
नई दिल्ली। देश के कुल खाद्यान उत्पादन में करीब 35 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में पिछले 10 साल में सात बार सूखा पड़ा है। अलबत्‍ता, इस साल भी मौसम विभाग का इन राज्यों में सबसे कम बारिश का अनुमान है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा जारी मानसून के संशोधित अनुमान के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत में दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के मुकाबले 85 फीसदी बारिश ही हो सकती है।
उत्तर-पश्चिम भारत में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, चंदीगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। देश में कुल खाद्यान उत्पादन करीब 25 करोड़ टन होता है, जिसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब मिलकर 9 करोड़ टन से ज्यादा खाद्यान पैदा करते हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 10 वर्षों में इन तीन राज्यों में सिर्फ तीन बार ऐसा हुआ है जब बारिश सामान्य या उससे अधिक बारिश हुई हो।
वर्ष पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हरियाणा पंजाब
वास्‍तविक बारिश(कमी) वास्‍तविक बारिश(कमी) वास्‍तविक बारिश(कमी)
2014 517 मिमी (-42%) 200.4 मिमी (-57%) 244.6 मिमी (-50%)
2013 864.6 मिमी (-4%) 363.3 मिमी (-22%) 479.7 मिमी (-2%)
2012 798.5 मिमी (-11%) 282.9 मिमी (-39%) 265.9 मिमी (-46%)
2011 821.3 मिमी (-8%) 379.2 मिमी (-19%) 459.4 मिमी (-7%)
2010 702.5 मिमी (-23%) 565.5 मिमी (21%) 459 मिमी (-7%)
2009 565.1 मिमी (-38%) 307 मिमी (-35%) 331.1 मिमी (-34%)
2008 1067 मिमी (17%) 536.4 मिमी (14%) 603.8 मिमी (20%)
2007 748 मिमी (-18%) 315 मिमी (-33%) 340 मिमी (-32%)
2006 701 मिमी (-23%) 288 मिमी (-39%) 437 मिमी (-13%)
2005 755 मिमी (-17%) 476 मिमी (1%) 445 मिमी (-11%)

हरियाणा और पंजाब में एक बार फिर सूखा
कमजोर मानसून की सबसे ज्यादा मार हरियाणा और पंजाब पर पड़ी है। पिछले 10 वर्षों में पंजाब में 6 बार दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के मुकाबले 25 फीसदी कम बारिश हुई है। पिछला साल इन दोनों राज्यों के इतिहास में सबसे सूखाग्रस्‍त रहा। पिछले साल पंजाब में 243.5 मिलीमीटर (एमएम) बारिश हुई थी, जबकि एलपीए 491.5 एमएम थी। यानी यह बारिश औसत से 50 फीसदी कम है। राज्य के 113 वर्षों के इतिहास में यह दूसरा सबसे खराब मानसून था। हरियाणा का हाल इससे भी बुरा रहा। वहां 200.1 एमएम बारिश ही हुई थी, जो औसत से 56 फीसदी कम है। पंजाब में सिर्फ 2008 में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई थी।
कमजोर मानसून के बावजूद बढ़ा उत्पादन
पिछले एक दशक में सूखे की मार झेलने के बावजूद इन राज्यों में कृषि उत्पादन घटने की जगह बढ़ा है। वित्‍त मंत्री जेटली ने गुरुवार को कहा कि इस साल उत्तर-पश्चिम भारत में सबसे कम बारिश की आशंका है, लेकिन वहां सिंचाई के पक्‍के प्रबंध हैं। इसलिए, कमजोर मानसून का खाद्य उत्पादन पर कोई असर नहीं होगा।
भूजल का भरपूर इस्तेमाल
इन दोनों राज्यों में अच्‍छे कृषि उत्पादन की मुख्य वजह सिंचाई का पर्याप्त प्रबंध होना है। इन क्षेत्रों के किसानों ने भूजल संसाधनों का पूरा इस्तेमाल किया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब सालाना 170 फीसदी ज्यादा भूजल का इस्तेमाल किया है, जो कि पूरे देश में सबसे अधिक है। राज्य के वाटर ब्लॉक में से 130 में से 110 यानी 80 फीसदी का इस्तेमाल हुआ है। वहीं, हरियाणा में 59 फीसदी वाटर ब्लॉक के पानी से सिंचाई की गई है।
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शनिवार को केरल पहुंचेगा मानसून
 
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा अनुमान के मुताबिक, अगले 48 घंटे में मानसून केरल के तट पर दस्तक देगा। आईएमडी ने कहा कि मानसून के आगे बढ़ने के लिए हालात बेहतर हुए हैं। लिहाजा शनिवार को मानसून की पहली बारिश हो सकती है। इससे पहले मौसम विभाग ने शुक्रवार को मानसून के केरल पहुंचने का पूर्वानुमान लगाया था। आमतौर पर मानसून 1 जून को केरल पहुंच जाता है।
 
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