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चीनी मिलों के लिए एथेनॉल बनाना हुआ महंगा, पेट्रोल में ब्लेलडिंग टार्गेट इस बार भी रहेगा अधूरा

 
 
नई दिल्‍ली.ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देने और पेट्रोलियम इंपोर्ट घटाने की मोदी सरकार की तैयारियां एक बार फिर पिछड़ती दिख रहीं हैं। लगातार दूसरे साल भी पेट्रोल में एथेनॉल ब्‍लेंडिंग के टार्गेट लक्ष्‍य 10 फीसदी से महज आधा रहने की आशंका है। इसका कारण है कि शुगर मिलों को सरकारी रेट पर एथेनॉल आपूर्ति करने में औसत नहीं आ रहा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को टार्गेट पूरा करने के लिए करीब 288 करोड़ एथेनॉल की जरूरत है, जबकि शुगर मिलें केवल 161 करोड़ लीटर एथेनॉल आपूर्ति के लिए ही कांट्रेक्‍ट कर पाई हैं। यह महज 5 फीसदी ब्‍लेंडिंग के लिए ही प्रयुक्‍त है। देश में हर साल करीब 7 लाख करोड़ रुपए का क्रूड इंपोर्ट किया जाता है।
 
एथेनॉल बनाना हो रहा महंगा
दरअसल, देश में 526 चीनी मिलों में से करीब 240 शुगर मिल ही एथेनॉल बनाती हैं। इन मिलों की क्षमता लगभग 450 करोड़ लीटर एथेनॉल बनाने की है। ये कंपनियां दूसरी शुगर मिलों से शिरा खरीददती हैं। मिलों और तेल कंपनियों की कंस्‍लटेंट एजेंसी एथेनॉल इंडिया के चेयरमैन दीपक देसाई ने moneybhaskar.com को बताया कि गन्‍ना उत्‍पादन कम होने से मोलासिस (शिरा) के दामों में 90 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इसके दाम 4800 रुपए प्रति टन से बढ़कर 9000 रुपए प्रति टन पर पहुंच गए हैं। ऐसे में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां एथेनॉल खरीद रही हैं उससे ज्‍यादा मिलों को एथेनॉल बनाने में खर्च आ रहा है।
 
इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन के पूर्व अध्‍यक्ष एसके जैन ने बताया कि एक लीटर एथेनॉल बनाने में लगभग 34 रुपए का रॉ मटेरियल (शिरा और अन्‍य चीजें) आ रही हैं। इसके बाद इसके बनाने का खर्च 5 से 6 रुपए आ रहा है। जबकि, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को एथेनॉल की आपूर्ति 39 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से करनी है। इस पर भी ढुलाई का खर्च भी शुगर मिलों को ही देना है। लिहाजा शुगर मिलें इसे आपूर्ति करने में अक्षम दिख रही हैं।
 
24 फीसदी कम है गन्‍ना उत्‍पादन
दो साल सूखा पड़ने से इस साल महाराष्‍ट्र और कर्नाटक में गन्‍ना उत्‍पादन बेहद कम हुआ है। इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन(इसमा) के अनुसार मौजूदा साल 2016-17 में गन्‍ना उत्‍पादन सिर्फ 25 से 27 करोड़ टन ही रह सकता है। जोकि, पिछले साल से 24 फीसदी कम है। पिछले साल (2015-16) यह 33.69 करोड़ टन था, जिससे देश की 526 शुगर मिलों ने 1.09 करोड़ टन शिरा उत्‍पादन किया था। एक टन शिरा से लगभग 220 से 270 लीटर एथेनॉल प्राप्‍त होता है। चूंकि, इस साल शिरा कम उत्‍पादन होगा तो एथेनॉल भी कम ही बनेगा।
 
अगली स्‍लाइड में जानिए दोबारा जारी करना पड़ा टेंडर....
 

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