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20 रुपए तक और महंगा हो सकता है प्याज, सितंबर तक नहीं मिलेगी राहत

COMMODITY TEAM

Aug 21,2015 03:33:00 PM IST
नई दिल्ली। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद प्याज की कीमतों पर अंकुश नहीं लग पाया है। पिछले एक हफ्ते में प्याज 15 से 20 रुपए प्रति किलो महंगा हो चुका है और अगले एक महीने तक राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। अगले एक महीने में प्याज के भाव 20 रुपए और बढ़ सकते हैं। एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि नई फसल आने के बाद ही प्याज की कीमतों में तेजी थम सकती हैं। अक्टूबर से मार्केट में प्याज की नई फसल आने लगती है। एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव (महाराष्‍ट्र) में प्याज की कीमतें दो साल के टॉप पर पहुंच गई हैं। गुरुवार को लासलगांव में प्याज करीब 54 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया। दिल्ली के थाक बाजार में कीमत 60 रुपए प्रति किलो के भाव बिका। वहीं दिल्ली में रिटेल प्याज की कीमत 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है।
प्याज की कीमतों में जुलाई से तेजी बनी हुई है। केंद्र सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए प्याज इंपोर्ट के लिए टेंडर जारी किया है। इसके अलावा ट्रेडर्स अफगानिस्तान, पाकिस्तान समेत कई देशों से प्याज इंपोर्ट कर रहे हैं।
अक्टूबर के बाद मिलेगी महंगे प्याज से निजात
लासलगांव एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी चेयरमैन नानासाहेब दत्ताजी पाटिल ने कहा कि प्याज की कीमतों में तेजी सितंबर अंत तक बनी रहेगी। पाटिल ने कहा कि खरीफ सीजन की शुरुआती प्याज की फसल की आवक कर्नाटक में 5 सितंबर और पुणे में 15 सितंबर के आसपास शुरू होगी। इसके बाद ही प्याज की कीमतों में गिरावट आ सकती है। उत्पादन में कमी और प्याज का सीजन न होने के कारण जुलाई से सितंबर के दौरान सप्लाई कम रहती है।
मुंबई के प्याज कारोबारी अजित शाह ने कहा कि मुख्य उत्पादन केन्द्र नासिक और धुले में प्याज का स्टॉक तेजी से घट रहा है। ऐसे में प्याज की कीमतें चालू स्तर से 20 रुपए प्रति किलो तक और महंगा हो सकता है। वहीं प्याज की नई आवक अक्टूबर में शुरु होने की उम्मीद है। ऐसे में महंगे प्याज से निजात उसके बाद ही मिल सकता है। शाह के मुताबिक चालू मानसून सीजन के दौरान प्याज के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र महाराष्ट्र कम बारिश हुई है, जिसका नकारात्मक असर खरीफ की फसल पर पड़ेगा। इस साल खरीफ प्याज की आवक में देरी का भी खतरा है।
मंडियों में 70 फीसदी तक घटी प्याज की आवक
लासालगांव ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नंद कुमार डागा ने मनीभास्कर को बताया कि इस साल मंडियों में आवक कमजोर है और क्वालिटी भी खराब है। उत्पादन कम होने की वजह से प्याज की आवक पिछले साल के मुकाबले करीब 70 फीसदी कम है। जबकि औसतन बाजार में पहुंचने वाली प्याज में से सिर्फ 25 फीसदी की क्वालिटी अच्छी है। इसके कारण डिमांड-सप्लाई का गैप बढ़ गया है। डागा ने कहा कि लासलगांव में प्याज 5,400 रुपए प्रति क्विंटल के भाव बिक रहा है। पिछले साल अगस्त में प्याज की कीमत 1,675 रुपए प्रति क्विंटल थी।
आजादपुर मंडी समिति के सदस्य राजेन्द्र शर्मा ने बताया कि नई फसल के आने में अभी देरी है, जिसके कारण प्याज की कीमतों में अगले एक महीने तक तेजी बनी रह सकती है। शर्मा के मुताबिक महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में प्याज महंगा हो गया है। इसकी वजह से प्याज की कीमतों में तेजी आई है। दिल्ली में प्याज 60 रुपए प्रति किलो तक के भाव बिक रहा है।
अगली स्लाइड में पढ़िए, ऐसे प्याज की कीमतों पर काबू पाएगी सरकार...
10,000 टन प्याज इंपोर्ट के लिए टेंडर जारी एमएमटीसी ने शुक्रवार को 10,000 टन प्याज इंपोर्ट करने के लिए टेंडर जारी किया है। टेंडर के मुताबिक, एमएमटीसी वाघा बॉर्डर, कांडला, जेएनपीटी और चेन्नई बंदरगाहों के माध्यम से 15 सितंबर तक प्याज इंपोर्ट के लिए 10,000 टन के आयात के लिए बोली मंगाई है। बिड के लिए अंतिम तारिख 27 अगस्त है और 2 सितंबर तक वैध्य रहेगी। बिड कम से कम 1,000 टन प्याज इंपोर्ट के लिए लगानी होगी। दिल्ली के प्याज डीलर लियाकत अली ने कहा कि डिमांड और सप्लाई के अंतर को खत्म करने के लिए सरकार चीन और मिस्र से प्याज इंपोर्ट करने की योजना बना रही है। चीन और मिस्र के प्याज की कीमत 4,000 रुपए प्रति क्विंटल है। वहीं पाकिस्तान से रोजाना 2-3 ट्रक प्याज की आवक हो रही है,जिसकी कीमत 3,800 रुपए प्रति क्विंटल है। लेकिन इसकी क्वालिटी खराब है। जालंधर (पंजाब) के राजिंदर पाल ने बताया कि कुछ व्यापारियों ने अफगानिस्तान से प्याज का इंपोर्ट शुरु कर दिया है। अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते रोजाना 2-4 ट्रक प्याज इंपोर्ट हो रहा है। 5 लाख टन प्याज उत्पादन घटने का अनुमान मार्च-अप्रैल के दौरान हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से देश में प्याज का उत्पादन घटने का अनुमान है। 2014-15 (जुलाई-जून) में प्याज का उत्पादन 5 लाख टन घटकर 189 लाख टन हो सकता है। जबकि 2013-14 के दौरान देश में 194 लाख टन प्याज पैदा हुआ था। देश रबी सीजन का प्याज 14 लाख टन ही बचा है। जबकि, जुलाई में 28 लाख टन स्टॉक था। प्याज एमईपी बढ़ाने पर विचार प्याज की कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस (एमईपी) को बढ़ाने पर विचार कर रही है। दरअसल जून-जुलाई के दौरान 60,000 टन प्याज एक्सपोर्ट हुआ है। जून में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड ने एमईपी को 250 डॉलर (16,250) प्रति टन से बढ़ाकर 425 डॉलर (27,625) प्रति टन कर दिया था। इसके बावजूद प्याज का एक्सपोर्ट हो रहा है।
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