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प्याज की खराब क्वालिटी बनेगी मुसीबत, तीन महीने में कई गुना बढ़ सकते हैं दाम

Commodity Team

Jun 02,2016 06:45:00 PM IST
नई दिल्‍ली। बंपर पैदावार होने से देश भर की मंडियों में प्‍याज भले ही इन दिनों कौड़ियों के दाम पर बिक रहा हो, लेकिन अगले तीन महीनों में प्याज के दाम कई गुना चढ़ सकते हैं। इसकी वजह देश में अच्छी क्‍वालिटी के प्‍याज का उत्पादन कम होना है, इसलिए प्‍याज का स्टोरेज काफी कम हो पा रहा है।
3 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है प्याज

मौजूदा समय में देश की विभिन्‍न मंडियों में डिग्रेड प्याज 3 रुपए से 6 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। जबकि, अपग्रेड प्‍याज 7 से 10 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। हालांकि, किसानों के नजरिए से देखें तो इस भाव भी उनकी लागत नहीं निकल पा रही है। कीमत बढ़ने का डर सरकार को भी है, यही कारण है कि किसानों को राहत देने के लिए अब सरकार प्‍याज का बफर स्‍टॉक बढ़ा रही है। इससे कीमतों को थामने के लिए प्‍याज को बाजार में उतारा जा सकेगा।
क्‍वांटिटी ज्‍यादा, लेकिन क्‍वालिटी कम
इस साल महाराष्‍ट्र, गुजरात, राजस्‍थान समेत बड़े प्‍याज उत्‍पादक राज्‍यों में प्‍याज की रिकॉर्ड पैदावार हुई। उत्‍पादन का आंकड़ा दो साल पहले 193 लाख टन को पार कर 203लाख टन पहुंच गया। पिछले दो साल में प्‍याज के दामों में खासी बढ़ोतरी देखने को मिली थी। इसीलिए किसानों ने फसल की अधिक बुआई की। लेकिन, कई राज्‍यों में सूखे की मार से प्‍याज की क्‍वालिटी अच्‍छी नहीं हुई। महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान और गुजरात की अधिकतर प्‍याज में छिलका उतरने की शिकायत है। साथ ही प्‍याज की मोटाई भी बहुत कम है। लिहाजा मंडियों में डिग्रेड प्‍याज ही अधिक आ रहा है। एक आकलन के मुताबिक देश के कुल प्‍याज में से तकरीबन 60 फीसदी प्‍याज डिग्रेड क्‍वालिटी का है।

स्टोर करने लायक नहीं ज्यादातर प्याज मंडी व्यापारियों की मानें तो डिग्रेड प्याज मंडियों में सीधे खरीकर थोड़े बहुत मार्जिन पर आगे बेच दिया जाता है। यह प्याज स्टोर करने लायक नहीं रहता। दिल्ली आजादपुर मंडी के प्याज व्यापारी राजेंद्र शर्मा का कहना है कि हर साल जहां स्टोर करने लायक प्याज 80 फीसदी होता था, वहीं इस बार यह 25 फीसदी के आसपास है। ऐसे में जब जुलाई से अक्टूबर तक देश में प्याज का उत्पादन नहीं होता है, तब यही स्टोरेज प्याज बाजार में बेचा जाता है। चूंकि, इस बार प्याज का स्टोरेज कम होगा, तो कीमत बढ़नी लाजिमी हैं। कई गुना तक बढ़ सकते हैं दाम कीमत बढ़ने की संभावनाओं को देखते हुए व्यापारी भी बेहतर क्वालिटी के प्याज को फिलहाल नहीं बेच रहे हैं। उनका ज्यादा से ज्यादा ध्यान इसे स्टोर करने को लेकर ही है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार भी 50 रुपए प्रति किलो के आंकड़े को पार कर सकता है। उम्मीद थी कि देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में मार्च में करीब 45 लाख टन प्याज स्टोर हो सकता है। लेकिन, डिग्रेड प्याज अधिक आने से यह आंकड़ा अभी बेहद दूर है। लगभग ढाई महीने में केवल 19लाख टन प्याज ही स्टोर हो पाया है। लासलगांव मंडी के रतन ट्रेडर्स के मुताबिक बेहतर क्वालिटी का प्याज न होने से बरसात में इसकी मांग बढ़ेगी। इसके कारण दाम बढ़ने की पूरी संभावनाएं हैं।किसानों ने बनाई दूरी, 30 फीसदी गिरी आवक एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में अब तक 42 लाख टन प्याज मंडी से बेची जा चुकी है। जबकि, पिछले पूरे साल में 35 लाख टन प्याज बेचा गया था। आवक बढ़ने से दाम में लगातार कमी आई है। प्याज का मॉडल प्राइस 700 के आसपास बना हुआ है। लेकिन,पिछले कुछ दिनों में मंडी में प्याज की आवक में 30 फीसदी की कमी आई है। मंडी समिति के अध्यक्ष जयदत्त होलकर ने बताया कि बेहतर क्वालिटी की प्याज के दाम अब भी 10 से 11 रुपए प्रति किलो तक मिल रहे हैं लेकिन, लो क्वालिटी के प्याज के दाम नहीं मिल पा रहे हैं। किसान भी कर रहे स्टोर, मिल रही सब्सिडी मौजूदा समय में किसानों को प्याज के दाम अधिक न मिलने से सरकारें भी खासी चिंतित हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को भी प्याज का भंडारण करने की सलाह दी है। इसके लिए राज्य का हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट किसानों को 50 फीसदी की सब्सिडी दे रहा है। हालांकि, राज्य में बहुत अधिक किसान खुद भंडारन कराने को आगे नहीं आए हैं। फिलहाल किसानों को राहत मिलने के आसार नहीं किसानों को प्याज के कम दामों के चलते कुछ राहत मिल सके, इसके लिए केंद्रसरकार ने प्याज का बफर स्टॉक बनाने की योजना तैयार की थी। इसके सीधे किसानों से 15 हजार टन खरीदा जाना है। लेकिन, अब इसे बढ़ाकर सरकार ने 50 हजार टन करने का इरादा किया है। हालांकि, इस दिशा में अभी करीब 20 हजार टन प्याज ही खरीदा जा सका है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों के साथ साथ ग्राहकों के हितों का भी ध्यान रखा जा सकेगा। आने वाले समय में प्याज की खरीद कितनी तेज होगी यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन,फिलहाल सरकार के प्रयासों से किसान को राहत नहीं मिल रही है।
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