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एक क्विंटल प्‍याज पर 302 रुपए का नुकसान उठा रहे किसान, केंद्र के दखल की मांग

एक साल से भी ज्‍यादा समय से प्‍याज किसानों की परेशानी खत्‍म होने का नाम नहीं ले रही है।

moneybhaskar

Jun 28,2017 12:12:00 PM IST
नई दिल्‍ली. एक साल से भी ज्‍यादा समय से प्‍याज किसानों की परेशानी खत्‍म होने का नाम नहीं ले रही है। नौबत यहां है कि प्‍याज किसानों को करीब 302 रुपए प्रति क्विंटल का नुकसान उठाकर फसल बेचनी पड़ रही है। ऐसे में देश की सबसे बड़ी प्‍याज मंडी लासलगांव की ओर से केंद्र सरकार को पत्र लिखकर दखल की मांग की गई है। इससे पहले मंगलवार को मध्‍य प्रदेश में प्रदेश सरकार की एजेंसियों ने किसानों से प्‍याज खरीदने की फैसला किया है।
827 रुपए प्रति क्विंटल है लागत
प्‍याज किसान पिछले साल से ही कम दामों पर प्‍याज बेचने को मजबूर हैं। पिछले साल किसानों ने 1 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से भी प्‍याज बेची है। ऐसे में उन्‍हें फायदा होना तो दूर उल्‍टे नुकसान ही उठाना पड़ रहा है। ऑल इंडिया वेजिटेबल ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्‍यक्ष श्रीराम गढ़ावे ने बताया कि एक क्विंटल प्‍याज उगाने में लगभग 827 रुपए का खर्च आता है। जबकि, मौजूदा समय में मंडियों में प्‍याज का औसत भाव सिर्फ 525 रुपए प्रति क्विंटल ही मिल रहा है। इस तरह किसान प्रति क्विंटल 302 रुपए का नुकसान उठा रहे हैं।
केंद्र सरकार दे दखल
पिछले दिनों किसानों के आंदोलन के बाद प्‍याज के दामों मे रिकवरी लाने के लिए मध्‍य प्रदेश सरकार ने किसानों से प्‍याज खरीदने का निर्णय लिया था। इसके बाद प्रदेश की एजेसियों ने किसानों से 3.95 लाख टन प्‍याज खरीदा है। इसके बाद अब महाराष्‍ट्र के किसान भी इसी तरह से मांग कर रहे हैं। लासलगांव एग्रीकल्‍चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमएसी) ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर प्‍याज खरीदने को कहा है। ताकि, किसानों को कम से कम उनकी लागत दिलाई जा सके। एपीएमसी लासलगांव के अध्‍यक्ष जयदत्‍त होल्‍कर ने बताया कि उन्‍होंने किसानों की ओर से एग्रीकल्‍चर मिनिस्‍ट्री को पत्र लिखकर यह मांग की है।
कुछ नहीं हुआ बफर स्‍टॉक की खरीददारी से फायदा
पिछले साल केंद्र सरकार ने प्‍याज का बफर स्‍टॉक बनाने के लिए प्‍याज खरीददारी शुरू की थी। इसके लिए लगभग 20 हजार टन प्‍याज की नाफेड आदि एजेंसियों ने खरीददारी की थी। यह बफर स्‍टॉक प्‍याज की कीमतों को बढ़ने से बचाने के लिए था। लेकिन, इसका फायदा न तो ग्राहकों को मिला और न ही किसानों को। इसका कारण है कि प्‍याज सरकार ने खरीदी तो लेकिन, उस मात्रा में नहीं खरीदी गई जिससे किसानों को मूल्‍य का लाभ मिल सकता।
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