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आ गई मानसून की 'डेटशीट', किस शहर में कब होगी बारिश... जानिए अभी

मुंबई के बाद मानसून पूरे महाराष्ट्र में सक्रिय हो गया है। इस कारण भारी बारिश हो रही है। मुंबई में अब तक 100 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई।

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नई दिल्ली। मुंबई के बाद मानसून पूरे महाराष्ट्र में सक्रिय हो गया है। इस कारण भारी बारिश हो रही है। मुंबई में अब तक 100 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार अगले तीन दिनों तक मुंबई में भारी बारिश जारी रह सकती है। वहीं शनिवार को गोवा, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल, बिहार और तमिलनाडु में भी भारी बारिश हुई। एजेंसी के मुताबिक 2 जुलाई को मानसून दिल्ली में दस्तक दे सकता है। आगे जानिए, देश के विभिन्न भागों में मानसून कब तक पहुंचेगा।   
 
मानसून की डेटशीट 
जगह 
सबडिवीजन मानसून पहुंचने का अनुमान
कोलकाता
पश्चिम बंगाल जून 15-17
भुवनेश्वर तटीय ओडिशा जून 15-17
रांची झारखंड जून 18-20
पटना बिहार जून 18-20
रायपुर छत्तीसगढ़ जून 20-22
लखनऊ मध्य उत्तर प्रदेश जून 22-24
मेरठ पश्चिम उत्तर प्रदेश जून 30-जुलाई 2 
अहमदाबाद गुजरात जून 19-21
भोपाल मध्य प्रदेश  जून 22-24
इंदौर मध्य प्रदेश  जून 22-24
देहरादून उत्तराखंड जून 28-30
दिल्ली दिल्ली जून 30-जुलाई 2 
रोहतक हरियाणा जून 30-जुलाई 2 
शिमला  हिमाचल प्रदेश जून 30-जुलाई 2 
चंडीगढ़ पंजाब जुलाई 3-5
जयपुर राजस्थान जुलाई 2-4
जोधपुर राजस्थान जुलाई 7-9
जैसलमेर राजस्थान जुलाई 10-15
 
दिल्ली-एनसीआर में बूंदाबांदीपंजाब और हरियाणा में बारिश का अनुमान
दिल्ली और आसपास के इलाकों में गर्मी की मार झेल रहे लोगों को कुछ राहत मिली है। एनसीआर के इलाकों में शनिवार को धूल-भरी आंधी और हल्की बारिश हुई, जिससे पारा कुछ कम हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक 16 जून तक दिल्ली और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश की संभावना है। स्काईमेट के मुताबिक अगले 24 घंटों में पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब और हरियाणा में बारिश का अनुमान है।
 
12 जून तक सामान्य से 1 फीसदी ज्यादा बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक मानसून में देरी और चक्रवात अशोबा के बावजूद अभी तक अच्छी बारिश हुई है। देश में कुल मिलाकर अब तक सामान्य से मामूली अधिक बारिश हुई है। 1-12 जून के दौरान पूरे देश में 46.5 एमएम रिकॉर्ड की गई, जो सामान्य से 1 फीसदी ज्यादा है। पूर्व, उत्तर-पूर्व के क्षेत्रों में बारिश सामान्य से 19 फीसदी अधिक हुई है। हालांकि मध्य भारत में सामान्य से 18 फीसदी कम बारिश हुई है। इस दौरान 36 मेट्रोलॉजिकल सब-डिविजन में से 25 में सामान्य से कम बारिश हुई है। वहीं 11 सब-डिविजन में सामान्य से या उससे अधिक हुई है।
 
अगली स्लाइड में पढ़िए, कम बारिश और उसका असर...
12 फीसदी कम बारिश का अनुमान
दक्षिण पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान इस साल मानसून सामान्य का 88 फीसदी रहेगा। 2014 में करीब 88 फीसदी यानी सामान्य से 12 फीसदी कम बारिश हुई थी। मौसम विभाग लंबी अवधि के औसत के आधार पर बारिश के 96 फीसदी से 104 फीसदी के दायरे को सामान्य, 105 से 110 फीसदी बारिश को सामान्य से ज्यादा और 110 फीसदी को अत्यधिक बारिश मानता है। वहीं 90 फीसदी या उससे कम बारिश को सूखा माना जाता है।
 
कमजोर मानसून की फसलों पर मार
कमजोर मानसून का असर खेती पर दिखने लगा है। शुक्रवार तक देश के किसानों ने 75.1 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुआई की है, जो पिछले साल के मुकाबले 8.7 फीसदी कम है। पिछले साल अब तक 82.3 लाख हेक्टेयर में खेती हुई थी। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार कमजोर मानसून की सबसे ज्यादा मार दलहन, मोटे अनाज और कपास की बुआई पर पड़ी है।
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