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    इस साल चीज़ मैन्‍युफैक्‍चरिंग में होगी बड़ी फाइट : अमूल के एमडी

    नई दिल्ली.  देश के मिल्क और मिल्क प्रोडक्ट्स के सबसे बड़े हिस्से पर काबिज को-ऑपरेटिव संस्था गुजरात को-आपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) अमूल अब चीज मार्केट पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।  अमूल के मैनेजिंग डायरेक्टर आर एस सोढ़ी ने moneybhaskar.com के साथ एक बातचीत में बताया कि‍ अब अगले एक साल चीज़ मैन्‍युफैक्‍चरिंग में बड़ी फाइट होगी।
     
    उन्‍होंने कहा कि‍ अमूल वैल्यू ऐडेड प्रोडक्ट्स में अपनी पकड़ बढ़ाना चाहता है। इसके लिए उसने चीज मैन्युफैक्चरिंग की कैपिसिटी में भारी बढ़ोत्तरी की है। देश में मिल्क प्रोडक्शन, इसके प्राइस ट्रेंड और मार्केट पर मनीभास्कर के संपादक हरवीर सिंह ने आर एस सोढी के साथ बातचीत की। पेश है इस बातचीत के मुख्य अंशः
     
     
    -इस साल दूध के प्रोक्युरमेंट में कमी आ रही है। इसकी क्या वजह है और किसानों से दूध की खरीद कीमतों में कितनी बढ़ोत्तरी हुई है?
    - दूध इस वक्‍त ज्‍यादा नहीं आ रहा है। पूरे देश में ग्रोथ नहीं आ रही है। जहां किसानों के लिए दाम ज्यादा गिरे थे, वहां दरअसल बीते दो साल लगातार घाटा सहने के चलते कि‍सानों ने इसमें इन्वेस्‍टमेंट नहीं कि‍या। इसके चलते अब प्रोक्‍योरमेंट कम है। महाराष्‍ट्र में कि‍सानों के लि‍ए कीमतें ज्‍यादा गि‍री थीं। यहां 2014 से 2015 के मध्य तक कि‍सानों को गाय के दूध के दाम 25 से 27 रुपए प्रति लीटर मि‍ले थे, लेकिन बाद में इसमें काफी गिरावट आई और दाम गिरकर 17 रुपए प्रति लीटर तक आ गए थे। तीन माह पहले तक यही दाम था, हालांकि अब यह बढ़कर 25 रुपए लीटर तक आ गया है। मगर बीच के पीरियड में कि‍सानों को नुकसान हुआ और उसके चलते उन्‍होंने पशुओं में इन्वेस्‍टमेंट नहीं कि‍या।
     
    -अमूल ने किसानों से दूध की खरीददारी के दाम कम नहीं किए इसे आपने कैसे मैनेज कि‍या?
    - हम वैल्‍यू एडिशन में काफी बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। हमने बटर का दाम तो नहीं बढ़ाया। लेकिन दि‍ल्‍ली में दूध की कीमतें नहीं घटाईं तो मैं कि‍सानों को कैसे कम दाम दे सकता हूं। गुजरात में हमने कि‍सानों के लिए दाम कम नहीं कि‍या, मगर हम हर साल 8 से 9 फीसदी दाम बढ़ाते थे, वह नहीं बढ़ा पाए, क्‍योंकि‍ कमोडि‍टीज प्राइज कम हो रहे थे, तो हमने किसानों के दूध की खऱीद कीमत केवल दो से तीन फीसदी ही बढ़ाई। दूध के प्रोक्योरमेंट में हमारी हर साल 8 से 10 फीसदी की ग्रोथ आ रही थी। पिछले साल के मुकाबले ग्रोथ 6 फीसदी है, लेकिन पि‍छले दो महीनों से ग्रोथ जीरो है। अभी हमारा 210 लाख लीटर डेयरी दूध आ रहा है।
     
    -क्‍या इस वक्‍त कि‍सानों को सही दाम मि‍ल रहा है?
    - हां। इस समय कि‍सानों को दूध का सही दाम मि‍ल रहा है। जैसा कि‍ मैंने पहले ही बताया कि‍ कि‍सानों ने इसमें इनवेस्‍टमेंट कम कर दि‍या, जि‍सके चलते ग्रोथ नहीं हुई। ग्रोथ कम होने की वजह से इसके दाम बढ़ गए। कनार्टक की को-ऑपरेटि‍व सोसाइटीज जो दूध महाराष्‍ट्र की प्राइवेट डेयरी को पि‍छले साल 25 रुपए में बेच रहे थे, उसकी कीमत अब 31 रुपए है।
     
    -इससे प्राइवेट डेयरि‍यों को तो नुकसान हो रहा होगा?
    - हां, जो आदमी बाजार से दूध खरीदकर बेच रहा है उसकी प्रॉफिट कम हो गई है। जो भी उन्‍होंने दो साल में कमाया है, अब वह सब चला जाएगा। देखा जाए तो कीमतें अभी भी मई 2014 से कम हैं, पर जि‍सको बाजार से रॉ मटीरि‍यल खरीद कर पैसा कमाना है, उसके लि‍ए तो नुकसान है। इसमें उन डेयरि‍यों को नुकसान है जो बाहर से माल खरीदती हैं। लेकि‍न यह हमारे जैसे फार्मर्स ऑर्गनाइजेशन के लि‍ए अच्‍छा है। हमारा मकसद ये है कि‍ कीमतें धीरे-धीरे बढ़नी चाहि‍ए, ताकि‍ कि‍सानों ने बीते दो सालों में जो खोया है, उन्‍हें अब फायदा हो। पशुचारे की कीमत जो दो साल पहले 13 रुपए थी, अब 17 से 18 रुपए है। यही केस ड्राई ग्रॉस और ग्रीन फॉडर के साथ भी है।
     
    -अमूल के एक्‍सपेंशन का क्‍या स्‍टेटस है?
    - हमारा फरीदाबाद और कानपुर में प्‍लान्ट शुरू हो गया है। लखनऊ का प्लान्ट फरवरी में स्‍टार्ट होगा। फि‍र हमारा कोलकाता और मुंबई में प्‍लान्ट बन रहा है। मुंबई के लिए हम आसपास के इलाकों से दूध लेते हैं। कानपुर और लखनऊ के आसपास से हम को-ऑपरेटि‍व के माध्‍यम से चार लाख लीटर के आसपास दूध ले रहे हैं। इससे होता क्‍या है कि भले ही इन स्थानों पर हम 5 फीसदी दूध ले रहे हैं, मगर कीमतों को स्‍टेबलाइज कर देते हैं। कि‍सानों को इसका बड़ा फायदा मिल रहा है।
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