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20 दिन में 20 फीसदी गिरे मक्‍का के दाम, एमएसपी से नीचे बिक रही फसल

Moneybhaskar

Oct 21,2016 12:02:00 AM IST
नई दिल्‍ली। मंडियों में आवक बढ़ते ही मक्‍का के दामों में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया है। पिछले 20 दिनों के भीतर दामों में 20 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। नौबत यह है कि किसानों को अपनी फसल एमएसपी से भी नीचे दामों पर बेचनी पड़ रही है। जानकार इसका कारण पैदावार में बढ़ोतरी के साथ-साथ एक्‍सपोर्ट का कम होना मान रहे हैं। इस साल देश में मक्‍का की बंपर पैदावार हुई है।
1200 रुपए तक आए दाम
दरअसल, पिछले साल मक्‍का की बहुत कम पैदावार हुई थी। ऐसे में मक्‍का का इंपोर्ट हुआ और एक्‍सपोर्ट में भारी गिरावट आ गई। ऐसे में घरेलू बाजार में मक्‍का के दाम 1600 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। ऐसे में शुरूआती समय में जब फसल आई तो किसानों ने भी अपनी फसल 1500 रुपए के आसपास बेची। लेकिन, पिछले 20 दिनों से मक्‍का के दामों में गिरावट का दौर जारी है। मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, आंध्र प्रदेश की विभिन्‍न मंडियों में मक्‍का के दाम 1200 रुपए तक पहुंच गए हैं। जबकि, अगर एमएसपी की बात करें तो इस साल सरकार ने 40 रुपए की बढ़ोतरी कर इसे 1360 रुपए प्रति क्विंटल रखा था। लेकिन, किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।
पूरे साल के बराबर खरीफ में उत्‍पादन
पिछले साल देश में मक्‍का उत्‍पादन केवल 218 लाख टन पर सिमटकर रह गया था। इसका मुख्‍य कारण देश में सूखे की मार और खरीफ सीजन में मक्‍का की बुआई का क्षेत्रफल कम होना रहा था। जबकि, इस साल खरीफ सीजन में ही 83 लाख हेक्‍टेयर पर मक्‍का बोई गई है जोकि पिछले साल खरीफ सीजन की मक्‍का से 72 लाख हेक्‍टेयर से अधिक है। इसके अलावा मक्‍का उत्‍पादन में किसानों को सूखे की मार सबसे ज्‍यादा झेलनी पड़ी थी। इस साल खरीफ में ही लगभग 200 लाख टन मक्‍का उत्‍पादन की उम्‍मीद है। इसके अलावा अगर देखा जाए तो संभावना है कि रबी सीजन में भी मक्‍का उत्‍पादन 110 लाख टन से अधिक हो सकता है। लिहाजा देश में मक्‍का उत्‍पादन लगभग 300 लाख टन से भी अधिक रहने की उम्‍मीद है।
नहीं हो रहा एक्‍सपोर्ट
देश से मक्‍का एक्‍सपोर्ट की काफी उम्‍मीदें थीं। लेकिन, मन मुताबिक एक्‍सपोर्ट के समझौते नहीं हो रहे हैं। इसका कारण है कि इंपोर्टर देशों को भारत के अलावा अमेरिका आदि देशों से मक्‍का का आयात सस्‍ता पड़ रहा है। दिल्‍ली के ट्रेडर नारायण सिंह ने बताया कि सरकारी स्‍तर से कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। मौजूदा समय पर सरकार का पूरा ध्‍यान दालों की खरीद पर है। इंडियन पल्‍सेस एंड ग्रेन एसोसिएशन (इपगा) के अनुसार 2016-17 में मक्‍का एक्‍सपोर्ट में बढ़ोतरी की उम्‍मीद है। लेकिन, अभी तक कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। साउथ ईस्‍ट एशिया में भारतीय मक्‍का के दाम 8 से 10 डॉलर प्रति टन अधिक मिलते हैं। मौजूदा समय में 210 डॉलर प्रति टन मक्‍का का दाम साउथ-ईस्‍ट एशिया में मिल रहा है। इससे निश्चित रूप से किसानों को ही लाभ होगा।
अगली स्‍लाइड में जानिए पिछले साल क्‍या थी एक्‍सपोर्ट इंपोर्ट की स्थिति...
75 फीसदी एक्सपोर्ट हुआ था कम लगातार 2 सालों में देश में मक्का उत्पादन कम होने और ग्लोबल प्राइस कम रहने के कारण मक्का एक्सपोर्ट में भी बेहद कमी आई थी। साल 2014-15 में जहां 28.25 लाख टन मक्का एक्सपोर्ट हुई थी। वहीं, अगले साल यानि 2015-16 में यह 75 फीसदी घटकर लगभग 6.50 लाख टन ही रह गई। वहीं रुपए के आधार पर देखें तो 2014-15 में लगभग 4037 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट हुआ था तो अगले साल यह घटकर 1067 करोड़ ही रह गया। जबकि, मौजूदा साल की बात करें तो पहली तिमाही मक्का एक्सपोर्ट केवल 1.57 टन ही हो पाया है। करना पड़ा 5 लाख टन इंपोर्ट सूखे के कारण गिरे मक्का उत्पादन से देश में मक्का के दाम भी बढ़ने शुरू हो गए थे। देश में मक्का के दाम 1600 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। जबकि, अमेरिका, ब्राजील व अन्य बड़े मक्का उत्पादक देशों में मक्का की अच्छी-खासी फसल हुई थी। इसके चलते ग्लोबल मार्केट में मक्का के दाम कम थे। लिहाजा, घरेलू स्टार्च व पोल्ट्री इंडस्ट्री ने जमकर इंपोर्ट के सौदे करने शुरू कर दिए। इस साल घरेलू ट्रेडर्स ने विभिन्न देशों से 5 लाख टन टन मक्का इंपोर्ट के समझौते किए थे। इसमें से लगभग 2.25 लाख टन मक्का भारत में पहुंच भी चुकी है। सितंबर अंत और अक्टूबर के पहले सप्ताह तक बाकी मक्का भी देश में पहुंच जाएगी। बता दें कि कुल मक्का में से 47 फीसदी पोल्ट्री इंडस्ट्री में, 12 फीसदी स्टार्च बनाने में, 14 फीसदी कैटल फीड बनाने में, 20 फीसदी सीधे कंज्प्शन और 7 फीसदी फूड प्रोसेसिंग में इस्तेमाल होता है।
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