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    इंडस्ट्री के आंकड़ों पर सवाल, इस्मा ने फिर घटाकर 203 लाख टन किया चीनी उत्पादन का अनुमान

     
    नई दिल्ली. शुगर इंडस्ट्री के आंकड़ों पर फिर सवाल खड़े हुए हैं। निजी चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने एक बार फिर चालू पेराई सीजन (अक्तूबर, 2016 से सितंबर, 2017) के चीनी उत्पादन के अनुमान को घटाकर 203 लाख टन कर दिया है। हालांकि चालू सीजन में चीनी की खपत 250 लाख टन रहने का अनुमान है। इससे साफ है कि चीनी की खपत और उत्पादन में खासा अंतर रहने जा रहा है। मनी भास्कर चीनी के उत्पादन में कमी का अनुमान पहले ही जारी कर चुका था।
     
     
     
    इंडस्ट्री के आंकड़ों पर उठे सवाल
    दिलचस्प बात यह है कि जुलाई, 2016 में निजी चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने 233.37 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था। वहीं सहकारी चीनी मिलों की संस्था नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) ने 230 लाख टन और केंद्र सरकार ने 225 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था। लेकिन जनवरी, 2017 आते-आते सारे अनुमान गड़बड़ाने लगे। इस्मा ने जनवरी में 213 लाख टन चीनी उत्पादन का संशोधित अनुमान जारी किया था, जिसे अब 6 मार्च को घटाकर 203 लाख टन कर दिया गया। इस प्रकार प्रारंभिक अनुमान की तुलना में अभी तक इसमें 30 लाख टन तक की कमी की जा चुकी है।
     
    इस वजह से घट सकता है चीनी उत्पादन
    6 मार्च को हुई इस्मा की मीटिंग के बाद ये अनुमान सामने आए हैं। इसके मुताबिक बीते दो साल के दौरान पड़े सूखे का महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में गन्ने की फसल पर व्यापक असर पड़ा है, हालांकि अनुमान की तुलना में यह कम रहा है। कुछ इलाकों में फरवरी 2017 में बीते साल इसी महीने की तुलना में प्रति हेक्टेयर यील्ड 40 से 50 फीसदी कम रही है। इस्मा के मुताबिक व्यापक चर्चा के बाद शुगर सीजन 2016-17 के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान दुबारा जारी किया जा रहा है, जो लगभ 203 लाख टन रहेगा।
     
     
    महाराष्ट्र, कर्नाटक में चीनी उत्पादन का अनुमान
    महाराष्ट्र में 17 मिलों को छोड़कर लगभग सभी मिलें बंद हो चुकी है, इसलिए राज्य में चीनी का उत्पादन लगभग 42 लाख टन रहने का अनुमान है। इसी प्रकार कर्नाटक में पेराई बंद हो चुकी है, लेकिन दक्षिणी कर्नाटक में जुलाई-सितंबर 2017 के दौरान स्पेशल सीजन देखने को मिलेगा। इस प्रकार राज्य में 21.25 लाख टन चीनी पैदा होने का अनुमान है।
     
     
    उत्तर प्रदेश में उत्पादन9लाख टन बढ़ने का अनुमान
     
    हालांकि बीते साल की तुलना में उत्तर प्रदेश में गन्ने की उपलब्धता, गन्ने की यील्ड्स के साथ चीनी की रिकवरी बेहतर रहने का अनुमान है। इस प्रकार देश के सूखा प्रभावित पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों की तुलना में उत्तर प्रदेश में हालात अलग हैं। फिलहाल उत्तर प्रदेश की 107 मिलों में अभी भी पेराई चल रही है, जो बीते साल की तुलना में बेहतर स्थिति है। राज्य में बीते साल की तुलना में चीनी का उत्पादन 9 लाख टन ज्यादा रहने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश की अधिकांश मिलें अप्रैल 2017 तक चलने का अनुमान है। प्रदेश के सदस्यों का मानना है कि इस सीजन के दौरान चीनी का उत्पादन लगभग 85 लाख टन रहेगा।
     
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