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सरकार ने इडिबल ऑयल पर दोगुनी की इम्पोर्ट ड्यूटी, किसानों को मिलेगा फायदा

भारत ने इडिबल ऑयल पर इम्पोर्ट ड्यूटी दोगुनी कर दी है, जिससे यह एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

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मुंबई. भारत ने इडिबल ऑयल पर इम्पोर्ट ड्यूटी दोगुनी कर दी है, जिससे यह एक दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। सरकार ने किसानों को फायदा पहुंचाने की कोशिशों के तहत यह फैसला लिया है। भारत दुनया में इडिबल ऑयल का सबसे बड़ा इम्पोर्टर है।

ड्यूटी में बढ़ोत्तरी से देश में तिलहन की कीमतों और घरेलू मार्केट में क्रशिंग के लिए इसकी उपलब्धता बढ़ेगी। इसके साथ ही 1 नवंबर से शुरू हो चुके मार्केटिंग ईयर 2017-18 के दौरान इडिबल ऑयल के इम्पोर्ट को सीमित करने में मदद मिलेगी।

 

 

इडिबल ऑयल्स पर दोगुनी तक बढ़ाई ड्यूटी

शुक्रवार को देर शाम जारी आदेश के मुताबिक भारत ने क्रूड पॉम ऑयल पर इम्पोर्ट ड्यूटी दोगुनी बढ़ाकर 30 फीसदी कर दी है, वहीं रिफाइंड पॉम ऑयल पर ड्यूटी 25 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दी है।

साथ ही सोया ऑयल पर इंपोर्ट ड्यूटी 17.5 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दी है, वहीं रिफाइंड सोया ऑयल पर ड्यूटी 20 फीसदी से बढ़ाकर 35 फीसदी कर दी है।

 

 

डॉमेस्टिक इंडस्ट्री के लिए प्रतिस्पर्धा में टिकना हो रहा था मुश्किल

फिलहाल भारत की इडिबल ऑयल कंपनियों को इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्राजील और अर्जेंटीना से हो रहे सस्ते इंपोर्ट के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। तिलहन की कीमतों में गिरावट के बावजूद स्थानीय सरसों और सोयाबीन की डिमांड घट रही है।

 

 

स्थानीय तिलहनों को मिलेगा सपोर्ट

रॉयटर्स के मुताबिक, मुंबई की ट्रेड बॉडी सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बी वी मेहता ने कहा कि तीन महीने से भी कम वक्त में इंपोर्ट ड्यूटी में दूसरी बढ़ोत्तरी से घरेलू बाजार में इडिबल ऑयल की कीमतें बढ़ेंगी और सरसों व सोयाबीन जैसे स्थानीय तिलहन की कीमतों को सपोर्ट मिलेगा।

 

 

70 फीसदी खपत के लिए इंपोर्ट पर निर्भर है भारत

फिजिकल मार्केट में सोयाबीन और सरसों की कीमतें फिलहाल सरकार द्वारा तय लेवल से नीचे ट्रेड हो रही हैं, जिससे किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा था।

भारत फिलहाल अपनी इडिबल ऑयल की 70 फीसदी खपत के लिए इंपोर्ट पर पर डिपेंड है, जबकि 2001-02 में यह आंकड़ा 44 फीसदी था।

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