• Home
  • Govt removes export incentives for onion

महंगाई /प्याज की महंगाई पर सरकार अलर्ट, निर्यात पर इंसेंटिव खत्म करने का किया ऐलान

  • अभी तक प्याज निर्यातकों को मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS) के अंतर्गत 10 फीसदी इंसेंटिव का फायदा मिल रहा था

Moneybhaskar.com

Jun 11,2019 04:42:56 PM IST

नई दिल्ली. प्याज की महंगाई पर सरकार अलर्ट है। इस क्रम में सरकार ने प्याज के निर्यात पर दिए जाने वाले इंसेंटिव खत्म कर दिए। इसका उद्देश्य निर्यात को हतोत्साहित करके घरेलू बाजार में कीमतों में तेजी को थामना है। अभी तक प्याज निर्यातक मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS) के अंतर्गत 10 फीसदी इंसेंटिव का फायदा ले रहे थे।

एक महीने में 48 फीसदी महंगा हुआ प्याज

उधर प्याज की कीमतें भी लगातार बढ़ती जा रही हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, एशिया में प्याज की सबसे बड़ी मंडी लासलगांव (महाराष्ट्र) में बीते एक महीने के दौरान कीमतें लगभग 48 फीसदी बढ़कर 13.30 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गईं हैं।
राजधानी दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमतें इस समय लगभग 20 से 25 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। वहीं महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्याज के प्रमुख उत्पादक राज्य इस साल सूखे जैसे हालात से गुजर रहे हैं।

यह भी पढ़ें-महंगाई की आशंका में सरकार ने शुरू किया प्याज का स्टॉक

अभी तक मिल रहा था 10 फीसदी इंसेंटिव

वाणिज्य मंत्रालय की एक इकाई विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 9 जून के अपने एक आदेश में कहा कि ताजे और चिल्ड प्याज के निर्यात पर दिए जा रहे सभी बेनिफिट वापस लिए जा रहे हैं। आदेश में कहा गया, ‘विदेश व्यापार नीति के तहत ताजे और चिल्ड प्याज के निर्यात पर दिए जा रहे एमईआईएस बिनिफिट्स तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाते हैं।’ इस प्रकार यह 10 फीसदी से घटकर शून्य हो गए हैं।

बीते साल दोगुना किया था इंसेंटिव

बीते साल दिसंबर में सरकार ने निर्यात बढ़ाने और किसानों को बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करने के लिए इंसेंटिव दोगुना बढ़ाकर 5 फीसदी से 10 फीसदी कर दिया था। यह इंसेंटिव इस साल 30 जून तक के लिए लागू था। एमईआईएस के अंतर्गत सरकार प्रोडक्ट और देश के आधार पर ड्यूटी बेनिफिट्स उपलब्ध कराती है।

यह भी पढ़ें-महंगा हो सकता है प्याज, गर्मी और सूखे की वजह से दाम बढ़ने की संभावना

एमईआईएस का ऐसे मिलता है फायदा

स्कीम के अंतर्गत रिवार्ड का भुगतान फ्री-ऑन-बोर्ड वैल्यू के प्रतिशत के रूप में किया जाता है और एमईआईएस ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप को ट्रांसफर किया जा सकता है या बेसिक कस्टम ड्यूटी सहित विभिन्न ड्यूटीज के भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इंसेंटिव्स को वापस लेने का फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि केंद्र सरकार ने उत्पादक राज्यों में सूखे जैसे हालात के मद्देनजर आने वाले महीनों में 50 हजार टन का बफर स्टॉक तैयार करने का फैसला किया है।

बढ़ सकती है प्याज की पैदावार

पहले अनुमान के मुताबिक, जून में समाप्त होने जा रहे फसल वर्ष 2018-19 में प्याज की पैदावार मामूली बढ़कर 2.362 करोड़ टन के स्तर पर पहुंच सकती है, जबकि 2017-18 में पैदावार 2.326 करोड़ टन रही थी।
भारत में प्याज उत्पादन में 60 फीसदी का योगदान करने वाली रबी फसल लगभग पूरी हो चुकी है। भारत में प्याज के तीन सीजन खरीफ (गर्मी), लेट खरीफ और रबी (शीत) होते हैं।

X

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.