कर्मचारियों को बोनस लेकिन किसानों की दिवाली फीकी, नहीं मिल रहा MSP

हरवीर सिंह

Oct 28,2016 01:05:00 PM IST
नई दिल्ली। मोदी सरकार भले ही केंद्रीय कर्मचारियों को दिवाली पर बोनस का तोहफा दे रही हो लेकिन किसानों के लिए इस बार भी दिवाली फीकी रहने वाली है। किसानों की इनकम को दोगुना करने का दावा करने वाली सरकार उन्हें धान, मक्का, सोयबानी और मूंगफली के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी नहीं दिला पा रही है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और गुजरात में धान, सोयाबीन, मूंगफली और मक्का की कीमतें एमएसपी से नीचे चल रही हैं। यही नहीं तिलहन और मक्का के मामले में तो कोई सरकारी एजेंसी अभी इन क्षेत्रों में खरीद भी शुरू नहीं कर सकी है।
सरकार को रिकार्ड उत्पादन की उम्मीद फिर भी किसान बेहाल
केंद्र सरकार को उम्मीद है कि इस साल बेहतर मानसून के चलते कृषि उत्पादन में आठ फीसदी तक की बढ़ोतरी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को पिछले साल से बेहतर ले जाने में मददगार साबित होगी। खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का भी अनुमान लगाया गया है। लेकिन जिस तरह से चालू मार्केटिंग सीजन में खाद्यान्न से लेकर तिलहन तक की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के नीचे चल रही हैं वह साबित करती हैं कि किसानों के लिए बेहतर उत्पादन के बावजूद यह दिवाली नाउम्मीदी लेकर आई है। इस समय उत्तर प्रदेश से शाहजहांपुर, पीलीभीत, सहानपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर में धान की कीमतें एमएसपी से 270 से 370 रुपये प्रति क्विंटल तक कम चल रही हैं। इन स्थानों पर धान की कीमत 1100 रुपये से 1220 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रही है जबकि केंद्र सरकार ने धान की सामान्य किस्म के लिए 1470 रुपये प्रति क्विंटल का एमएसपी तय किया है। इनमें से अधिकांश स्थानों पर सरकारी खरीद एजेंसियों ने खरीदी केंद्र ही स्थापित नहीं किये हैं।
राज्य सरकारें भी कर रही हैं लापरवाही
केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकार की घोर लापरवाही कीमतों में इस गिरावट का बड़ा कारण है। किसान नेता और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक वी.एम. सिंह ने मनीभास्कर को बताया कि राज्य में सत्ता पर काबिज समाजवादी पार्टी अंदरूनी झगड़े में इस तरह से मशगूल है कि उसे किसानों कोई चिंता नहीं है। वैसे भी जिस सरकार ने पिछले साल में गन्ने के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में कोई बढ़ोतरी नहीं की उससे किसानों से संकट को हल करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। वहीं जिस तरह से फसलों की कीमतें एमएसपी से नीचे चल रही हैं तो केंद्र सरकार किस तरह से किसानों की आय दो गुना करने का दावा करने की कोशिश कर रही है।
ये है स्थिति
फसल
एमएसपी(रु./क्विं.)
ताजा दाम(रु./क्विं.)
एमएसपी से अंतर(रु./क्विं.)
धान
1470
1100 से 1220
250 से 370
मक्‍का
1365
950 से 1200
165 से 415
सोयाबीन
2775
2000 से 2500
275 से 775
मूंगफली
4220
3000 से 3700
520 से 1220
अगली स्‍लाइड में जानिए महाराष्‍ट्र और मध्‍य प्रदेश के किसानों की स्थिति...
महाराष्ट्र में बुरा हाल वहीं मध्य प्रदेश के खाटेगांव और महाराष्ट्र के जलगांव में मक्का की कीमतें एमएसपी से 165 रुपये से 415 रुपये प्रति क्विंटल तक कम चल रहा हैं। केंद्र सरकार द्वारा तय 1365 प्रति क्विंटल के एमएसपी के मुकाबले इन स्थानों पर कीमतें 950 रुपये से 1120 रुपये प्रति क्विंटल तक चल रही हैं। खास बात यह है कि अभी तक कोई भी सरकारी एजेंसी यहां पर मक्का की खरीद नहीं कर रही हैं। इसके साथ ही पिछले दिनों उद्योग के दबाव में सरकार ने टैरिफ रेट कोटा के तहत मक्का का शुल्क मुक्त का आयात किया था। इस बारे में नैफेड के एक पदाधिकारी का कहना है कि अभी उन्हें मक्का की खरीद के लिए कहा गया है लेकिन कोई वित्तीय व्यवस्था नहीं की गई है। मध्य प्रदेश में भी किसान बेहाल इसके अलावी मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कीमतें 2775 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी के मुकाबले 2000 रुपये से 2500 रुपये प्रति क्विंटल चल रही हैं। वहीं महाराष्ट्र के खरंजा में किसान सोयाबीन को 2300 रुयपे से 2400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बेचने को मजबूर हैं। दिलचस्प बात यह है कि देश में खाद्य तेलों का आयात खपत के 50 फीसदी को पार कर गया है और फसल आने के ठीक पहले सरकार ने सोयाबीन सहित दूसरे खाद्य तेलों पर सीमा शुल्क में कटौती की थी। ऐसें जहां किसानों को फसल की एमएसपी नहीं मिल रही हैं वहीं सरकार ने सस्ता खाद्य तेल आयात करने का रास्ता आसान किया है। यही नहीं खरीफ सीजन के दूसरे महत्वपूर्ण तिलहन मूंगफली की कीमतें भी 4220 रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी से नीचे चल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात के हिम्मतनगर में मूंगफली की कीमत 3500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही है। जबकि राजस्थान के बीकानेर और लंकरनसर में किसान 3275 रुपये से 3700 रुपये प्रति क्विंटल के बीच मूंगफली बेचने को मजबूर हैं। जो एमएसपी से काफी कम हैं।
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