वेस्ट वॉटर के रीयूज से बढ़ेगा फसलों का उत्पादन, गांव-गांव में ट्रीटमेंट की योजना

Market Team

Jun 15,2016 07:00:00 PM IST
नई दिल्‍ली। घरेलू जरूरतों के बाद बर्बाद होने वाले पानी को बॉयो ट्रीटमेंट के बाद सिंचाई के काम में लाकर उत्‍पादन बढ़ाया जा सकता है। इससे खाद व कीटनाशकों की मात्रा भी कम लगती है। इंटरनेशनल क्रॉप्‍स रिसर्च इंस्‍टीट्यूट फॉर द सेमी एरीड ट्रोपिक्‍स (आर्इसीआरआईसीएटी) द्वारा वाटर फॉर क्रॉप्‍स प्रोजेक्‍ट के तहत इस पर चार साल से रिसर्च की जा रही है। इस रिसर्च में युरोपीय युनियन के कई इंस्‍टीट्यूशंस भी सहयोग कर रहे हैं। यह जानकारी मिनिस्‍टर ऑफ स्‍टेट साइंस एंड टेक्‍नोलॉजी वाईएस चौधरी और इंस्‍टीट्यूट के विशेषज्ञों ने एक प्रेस कांफ्रेंस में दी।

40 फीसदी तक बढ़ा उत्‍पादन

वेस्‍ट वाटर को सिंचाई के लिए आर्इसीआरआईसीएटी पिछले 4 सालों से रिसर्च कर रहा है । इसमें युरोपीय यूनियन के आठ देशों की 21 कंपनियां व इंस्‍टीट्यूट और भारत के 11 संस्‍थान शामिल हैं। प्रोजेक्‍ट के लिए युरोपीयन कमीशन ने 40 करोड़ रुपए और भारत सरकार ने 20 करोड़ रुपए की राशि मंजूर कर दी है। वाटर फॉर क्रॉप्‍स प्रोजेक्‍ट के हेड और आर्इसीआरआईसीएटी के एशिया डायरेक्‍टर डॉ. सुहास पी वानी ने बताया कि उन्‍होंने ओरका और बैंगन की फसल पर यह प्रयोग किया था। इनके उत्‍पादन में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। रीयूज के लिए 32 इंस्‍टीट्यूट व कंपनियां आर्इसीआरआईसीएटी के सा मिलकर रिसर्च कर रहीं हैं।


पीएमकेएसवाई में भी हो सकती है शामिल

मिनिस्‍टर ऑफ स्‍टेट साइंस एंड टेक्‍नोलॉजी वाईएस चौधरी ने कहा कि फिलहाल यह प्रॉजेक्‍ट कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्‍ट्र और उत्‍तर प्रदेश के कुछ गांवों में प्रयोग के तौर पर चल रहा है। लेकिन, सरकार इस प्रॉजेक्‍ट को गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी में जुटी है। एक सवाल पर कि यह प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का हिस्‍सा होगा तो मिनिस्‍टर ने कहा कि इस पर
भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, इंस्‍टीट्यूट इस प्रॉजेक्‍ट को पीएमकेएसवाई में शामिल करने का प्रपोजल दे चुका है।

आगे की स्‍लाईड में पढि़ए और क्‍या है योजना...


इंडस्ट्री के वाटर ट्रीटमेंट पर भी जोर चौधरी ने बताया कि यदि यह प्रोजेक्ट गांव के किसान सहजता से अपना लेते हैं तो गांवों के आसपास इंडस्ट्रीज के वेस्ट वॉटर का भी सिंचाई के लिए ट्रीटमेंट किया जाएगा। प्रोजेक्ट के बारे में युरोपियन यूनियन केएंबेसेडर एचई टॉमास्ज कोजलोवस्की, मिनिस्ट्री ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी सेक्रेटरी विजय राघवन और प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर डॉ: अंटोनिया लॉपेज ने भी जानकारी दी। ऐसे होगा गांवों में ट्रीटमेंट गांवों में वेस्ट वॉटर के बॉयो ट्रीटमेंट के लिए बहुत बड़े इन्वेस्ट की जरूरत नहीं है। डॉ. वानी ने बताया कि इसके लिए वेस्ट वाटर को रेत और कंक्रीट से गुजारकर एक तालाब में इकट्ठा किया जाएगा। इस तालाब के चारों तरफ और अंदर पेड़ लगाए जाएंगे इससे ट्रीटमेंट हुए पानी से तमाम हानिकारक चीजें निकल कर यह सिंचाई योग्य बन जाएगा।
X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.