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नोट बैन से लड़खड़ाया एग्री मार्केट, देश की कई मंडियों में कमोडिटी ऑक्‍शन बंद

Moneybhaskar

Nov 15,2016 12:02:00 AM IST
नई दिल्‍ली। नोट बंदी का एग्री मार्केट पर सबसे ज्‍यादा असर पड़ा है। इसका कारण है कि अधिकतर एग्री ट्रेड सिर्फ कैश पर ही होता है। ऐसे में पहले जहां किसानों को फसल के औने-पौने दाम मिल रहे थे वहीं, अब मंडियों में कोई माल खरीदने को राजी नहीं है। कैश क्राइसिस को देखते हुए देश की कई बड़ी मंडियों में तो कमोडिटी ऑक्‍शन बंद कर दिया गया है। सबसे ज्‍यादा बुरा हाल पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के गुड़ मार्केट, मुरादाबाद में सब्जियों, एमपी व महाराष्‍ट्र में फल-सब्जियों के बाजार पर पड़ा है।
लासलगांव मंडी में 5 दिन के लिए कारोबार निलंबित
महाराष्‍ट्र की लासलगांव एग्रीकल्‍चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) एशिया की सबसे बड़ी प्‍याज मंडी है। यहां सालभर प्‍याज का बड़ा कारोबार होता है। शुरूआत से ही किसान प्‍याज के दाम न मिलने से परेशान थे। ऐसे में 8 नवंबर को प्रधानमंत्री की घोषणा का सबसे ज्‍यादा असर प्‍याज किसानों पर पड़ा। दाम वृद्धि की आशा लिए बैठे किसानों को अब प्‍याज बेचने को खरीददार ही नहीं मिल रहे। इसके अलावा लासलगांव में सब्जियों के कारोबार भी प्रभावित हुआ। लासलगांव एपीएमएसी के चेयरमैन जयदत्‍त होलकर ने बताया कि 10 नवंबर को ही 5 दिन के लिए ऑक्‍शन निलंबित कर दिया गया था। अभी कैश की समस्‍या बनी हुई है सो इस निलंबन आदेश को और भी बढ़ाया जा सकता है।
वेस्‍ट यूपी में गुड़ के दाम आए 2500 रुपए तक
एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी मुजफ्फरनगर एपीएमएसी में भी कारोबार बिल्‍कुल ठप हो गया है। गुड़ मंडी के अध्‍यक्ष अरुण खंडेलवाल ने बताया कि अधिकतर गुड़ का कारोबार कैश पर ही होता है। जिससे कोल्‍हू मालिक किसानों को भी नगद कैश में ही भुगतान करते हैं। शुरूआत में गुड़ के दाम 4000-4200 रुपए तक थे। लेकिन, अब गुड़ 2500 रुपए प्रति क्विंटल तक आ गया है। हैरान करने वाली बात है कि इस दाम पर भी कोई गुड़ खरीदने को तैयार नहीं है। इससे ट्रेडर्स आगे कोल्‍हू मालिकों को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। इन हालातों को देखते हुए कारोबार को अस्‍थाई रूप से 4 दिनों के लिए बंद किया गया है। हालात कुछ दिन यही चले तो वेस्‍ट यूपी के लगभग 40 हजार से ज्‍यादा कोल्‍हू संचालकों और किसानों के लिए मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
मुरादाबाद की सब्‍जी मंडी में नहीं हो रही आवक
कमोबेश पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के मुरादाबाद, नजीबाबाद आदि बड़ी ताजी सब्जियों की मंडियों में भी हालात यही बने हुए हैं। दोनों मंडियां क्षेत्र के लिए तो महत्‍वपूर्ण हैं ही इन पर उत्‍तराखंड में पहाड़ का मार्केट भी बहुत हद तक निर्भर करता है। यहीं, से पूरे उत्‍तराखंड में भी सब्जियों की सप्‍लाई होती है। मुरादाबाद कृषि मंडी के सब्‍जी विक्रेता संघ के महामंत्री नरेंद्र गहलौत ने बताया कि यहां प्रति दिन आसपास के क्षेत्रों से 200 ट्रकों से ज्‍यादा ताजा सब्जियां आती थीं। लेकिन, पिछले 4 दिनों में यह घटकर सिर्फ 40 से 50 ट्रक रह गई हैं। कैश की किल्‍लत के चलते व्‍यापारी किसानों से सब्जियां नहीं खरीद पा रहे हैं।
अगली स्‍लाइड में जानिए महाराष्‍ट्र और पंजाब हरियाणा की हालत...
पंजाब-हरियाणा में किसानों की आफत हरियाणा पंजाब में इन दिनों बासमती की खरीद जोरो पर चल रही थी। सरकारी खरीद केंद्रों के अलावा किसान प्राइवेट ट्रेडर्स को ही बड़ी मात्रा में बासमती बेचते हैं। लेकिन, यहां की मंडियों में भी कैश क्राइसिस के चलते हालात गंभीर बने हुए हैं। अमृतसर कृषि उपज मंडी के व्यापारी विरेंदर विर्क ने बताया कि यहां पिछले 3 दिनों से कोई व्यापार नहीं हो रहा है। किसान कैश मांग रहे हैं लेकिन, कैश न होने के चलते कोई फसल नहीं खरीद पा रहा है। बासमती किसान उपेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने 5 नवंबर को मंडी के व्यापारी को 50 हजार रुपए की फसल बेची थी। व्यापारी उन्हें 12 नवंबर को पैसे देने वाला था लेकिन, हालात ऐसे बने कि अब व्यापारी ने 25 दिसंबर के बाद का समय मांगा है। उपेंद्र जैसे ही तमाम किसान इसी समस्या से जूझ रहे हैं। महाराष्ट्र में फल मार्केट प्रभावित महाराष्ट्र में इन दिनों नागपुर और आसपास के जिलों में संतरे की फसल की हार्वेस्टिंग चल रही है। पिछले सप्ताह आज ही के दिन सबसे बड़े चंद्रपुर मंडी में 1380 टन संतरा की आवक हुई थी। लेकिन, 3 दिन पहले चंद्रपुर मंडी में कारोबार बंद कर दिया गया है। अंतिम दिन चंद्रपुर एग्री मार्केट में संतरे की आवक घटकर सिर्फ 300 टन रह गई थी। ओरेंज ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमोल तोते ने बताया कि किसानों को अगली फसल की तैयारी करनी है इसलिए कैश ही चाहिए। क्योंकि, आगे का माल भी उन्हें कैश में ही मिलेगा। हालात यह हैं कि किसानों को जरूरत भर का सामान भी नहीं मिल पा रहा है।
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