फलों का राजा /अफगानिस्तानी 'नूरजहां' की कीमत 500 रुपए, शौकीन लोग पहले ही कर लेते हैं बुकिंग

  • मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ही नूरजहां आम पाए जाते हैं।
  • इस बार एक फल का औसत वजन 2.5 किलोग्राम के आस-पास रहने का अनुमान है।

money bhaskar

May 21,2019 04:07:58 PM IST

नई दिल्ली. फलों के राजा आम और उस भी अल्फांजों (हापुस) हो तो क्या कहने। लेकिन बेहद ही मीठे और रसीले माने जाने वाले अल्फांजों को भी मध्य प्रदेश के एक आम ने पीछे छोड़ दिया है। यह आम है अफगानिस्तान मूल की प्रजाति का नूरजहां। इसके केवल एक फल की कीमत 500 रुपए तक हो जाती है। जबकि इतनी कीमत में एक किलो अल्फांजों आ जाते हैं। नूरजहां की डिमांड इतनी कि पेड़ पर लगते ही शौकीन इसकी बुकिंग कर लेते हैं।

बीते साल बर्बाद हो गई थी फसल, इस बार बहार

अपने भारी-भरकम फलों के चलते 'आमों की मलिका' के रूप में मशहूर 'नूरजहां' की फसल पिछले साल इल्लियों के भीषण प्रकोप के चलते बर्बाद हो गयी थी। आम की इस दुर्लभ किस्म के मुरीदों के लिए इस बार अच्छी खबर है कि इसके पेड़ों पर फलों की बहार आ गई है। इस किस्म के गिने-चुने पेड़ मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ही पाए जाते हैं। पेड़ों पर जनवरी से बौर आने शुरू हुए थे और इसके फल जून के आखिर तक पककर तैयार होंगे। इस बार इसके एक फल का औसत वजन 2.5 किलोग्राम के आस-पास रहने का अनुमान है। बहरहाल, यह बात चौंकाने वाली है कि किसी जमाने में नूरजहां के फल का औसत वजन 3.5 से 3.75 किलोग्राम के बीच होता था। जानकारों के मुताबिक पिछले एक दशक के दौरान मानसूनी बारिश में देरी, अल्पवर्षा, अतिवर्षा और आबो-हवा के अन्य उतार-चढ़ावों के कारण नूरजहां के फलों का वजन लगातार घटता जा रहा है।

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एक फुट तक लंबे हो सकते हैं आम


नूरजहां के फलों की सीमित संख्या के कारण शौकीन लोग तब ही इनकी पहले से बुकिंग कर लेते हैं, जब ये डाल पर लटककर पक रहे होते हैं। नूरजहां के फल तकरीबन एक फुट तक लंबे हो सकते हैं। इनकी गुठली का वजन ही 150 से 200 ग्राम के बीच होता है। नूरजहां के फलों की सीमित संख्या के कारण शौकीन लोग तब ही इनकी पहले से ही बुकिंग कर लेते हैं, जब ये डाल पर लटककर पक रहे होते हैं।

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वजूद पर संकट

जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के कारण आम की इस दुर्लभ किस्म के वजूद पर संकट भी मंडरा रहा है। आम की यह प्रजाति मौसमी उतार-चढ़ावों के प्रति बेहद संवेदनशील है। इसकी देख-रेख उसी तरह करनी होती है, जिस तरह हम किसी छोटे बच्चे को पाल-पोस कर बड़ा करते हैं।

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