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प्रोडक्शन बढ़ने से 4 महीने में 20% टूटा ग्वार गम, इन फैक्टर्स से आगे कीमतों को मिलेगा सपोर्ट

कई ऐसे फैक्टर्स है जिसकी वजह से आगे ग्वार गम की कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है।

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नई दिल्ली.  हाई प्रोडक्शन, कैरी ओवर स्टॉक और डिमांड में सुस्ती से पिछले 4 महीने में ग्वार गम की कीमतों में 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। हालांकि कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपए में कमजोरी औऱ अमेरिका में शेल ऑयल प्रोडक्शन में बढ़ोत्तरी से ग्वार गम की कीमतें बढ़ सकती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगले 3 महीने में ग्वार गम 8000-9500 रुपए प्रति क्विंटल के दायरे में कारोबार कर सकता है। कई ऐसे फैक्टर्स हैं जिनकी वजह से आगे ग्वार गम की कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है।

फरवरी से 20% से ज्यादा टूटा ग्वार गम

फरवरी में महीने में अपने हाई से ग्वार गम की कीमतों में 20 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। फरवरी में ग्वार गम की कीमतें 10,468 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर थीं, जो मई में 23 फीसदी गिरकर 8,030 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गईं।

 


कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया कहना है कि ग्वार गम की कीमतों में गिरावट के कई कारण हैं। इकोनॉमिक स्लोडाउन से डिमांड में कमी, अच्छी बारिश होने की उम्मीद की वजह से ग्वार गम की कीमतें गिरीं हैं। 

वहीं एंजेल ब्रोकिंग कमोडिटी के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता के मुताबिक, डिमांड में कमी से कैरी ओवर स्टॉक बढ़ना भी ग्वार गम के लिए निगेटिव रहा है। इसके अलावा ग्वार सीड के सबसे बड़े उत्पादक राज्य राजस्थान में ग्वार सीड का प्रोडक्शन 10 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। राजस्थान सरकार ने अपने दूसरे अनुमान में 2017-18 (जुलाई-जून) में ग्वार सीड का प्रोडक्शन 10 फीसदी बढ़कर 15.4 लाख टन रहने की उम्मीद जाहिर की है। इससे भी प्राइस पर दबाव बना है।


इन फैक्टर्स का मिलेगा सपोर्ट


# अमेरिका में क्रूड प्रोडक्शन हाई पर

केडिया ने कहा कि ग्वार गम का आउटलुक पॉजिटिव है। ओपेक देशों और रूस द्वारा क्रूड प्रोडक्शन में कटौती जारी रखने के फैसले से क्रूड की कीमतें 75 डॉलर के पार हो गई है। वहीं इस साल अमेरिका में क्रूड प्रोडक्शन हाई पर पहुंच गया है। अमेरिका ने क्रूड प्रोडक्शन में कटौती नहीं करने का भी ऐलान किया है। ड्रिलिंग एक्टिवटी बढ़ने से अमेरिका में ग्वार गम की डिमांड बढ़ेगी, क्योंकि ऑयल रिग्स में ग्वार गम की खपत ज्यादा होती है। इसका असर कीमतों पर होगा।


# रुपए में कमजोरी का फायदा

ग्वार गम एक एक्सपोर्ट ओरिएंटेड कमोडिटी है और रुपए में कमजोरी से इसकी कीमतों को सपोर्ट मिल सकता है। डॉलर के मुकाबले रुपया 67 के स्तर पार हो गया है। एक्सपोर्ट बढ़ने से ग्वार गम की कीमतें बढ़ सकती हैं।

 

2017-18 में 64.7 करोड़ डॉलर का हुआ एक्सपोर्ट

आंकड़ों के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2017-18 में प्राइस के हिसाब से ग्वार गम का कुल एक्सोपर्ट 64.7 करोड़ डॉलर का हुआ है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में यूएस शेल ऑयल प्रोडक्शन में तेजी से बढ़ोतरी और ओपेक देशों द्वारा क्रूड प्रोडक्शन में कटौती की वजह से ग्लोबल क्रूड की कीमतें बढ़ने की उम्मीद है। इससे फाइनेंशियल ईयर 2018-19 में ग्वार गम का एक्सपोर्ट बढ़कर 100 करोड़ डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।


# फूड इंडस्ट्री से डिमांड बढ़ने की उम्मीद

केडिया के मुताबिक, फूड इंडस्टी में लगातार ग्रोथ देखने को मिल रही है। इस इंडस्ट्री में खासकर चॉकलेट मेंकिंग में ग्वार गम का ज्यादा इस्तेमाल होता है। देश में चॉकलेट की डिमांड बढ़ने से ग्वार गम की खपत बढ़ेगी। मांग में इजाफा से ग्वार गम की कीमतों में तेजी आएगी।

 

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रेंज बाउंड में रहेगी कीमतें

 

केडिया के मुताबिक, ग्वार गम की कीमतें फिलहाल रेंज बाउंड में रहने की उम्मीद है। इसकी कीमतें 8000-9500 रुपए प्रति क्विंटल के दायरे में रहेंगी।

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