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किसान कर्ज माफी से बेहतर है MSP स्कीमः SBI रिसर्च रिपोर्ट

बजट में प्रस्तावित एमएसपी स्कीम को लागू करने में 80 हजार करोड़ रुपए का अनुमानित खर्च बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है।

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नई दिल्ली. बजट में प्रस्तावित एमएसपी स्कीम को लागू करने में 80 हजार करोड़ रुपए का अनुमानित खर्च बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया रहा है और यह स्कीम, किसानों के कर्ज माफ किए जाने से काफी बेहतर है। एसबीआई ने अपनी एक रिपोर्ट में यह बात कही।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले हफ्ते राज्यसभा में अपने बजट भाषण का जवाब देते हुए कहा था कि सरकार किसानों की फसल के लिए 50 फीसदी ज्यादा सपोर्ट प्राइस तय करते हुए वास्तविक इनपुट कॉस्ट, फैमिली लेबर को भी ध्यान में रखेगी।

 

बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है 80 हजार करोड़ का आंकड़ा

एसबीआई इकोरैप की 'बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही हैं एमएसपी स्कीम की चिंताएं' शीर्षक वाली रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट का मानना है कि मार्केट कम्पन्सेशन स्कीम से सरकार पर 80,000 करोड़ रुपए तक का बोझ बढ़ सकती है, 'लेकिन हमारे अनुमान से पता चलता है कि यह इस आंकड़े की तुलना में एक चौथाई से भी कम हो सकता है।'

 

 

गेहूं, धान, बाजरा और मक्का पर आएगी 11500 करोड़ रु की कॉस्ट

रिपोर्ट में कहा गया कि गेहूं, धान, बाजरा और मक्का के लिए कुल कॉस्ट 11,500 करोड़ रुपए से भी कम आएगी। एसबीआई ने कहा कि प्रस्तावित स्कीम को 'कड़ी निगरानी' होनी चाहिए। साथ ही जोर देकर कहा गया कि मार्केट का अनुमान 'डाटा पर आधारित नहीं है।'

एसबीआई ने कहा कि अगर सरकार स्कीम के अंतर्गत किसानों के रजिस्ट्रेशन की कड़ी निगरानी करती है तो इससे कोई नुकसान नहीं होगा।

 

 

किसान कर्ज माफी से बेहतर है एमएसपी स्कीम

एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, 'इनकम कम्पन्सेशन के तौर पर शुरू की गई यह स्कीम किसानों के लिए कर्ज माफी बढ़ावा देने से कहीं बेहतर है।' सरकार ने 23 कमोडिटीज की एमएसपी तय कर दी है, जिनमें से खाद्य कानून के तहत राशन की दुकानों से सब्सिडाइज दरों पर सिर्फ गेहूं और चावल की आपूर्ति की जाती है।

 

वर्तमान में सरकार एक्सपर्ट बॉडी कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट्स एंड प्राइसेज (सीएसीपी) की सिफारिश के आधार पर एमएसपी तय करती है।

 

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