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20 हजार लगाकर हर महीने कमाता है 40 हजार, एक आइडिया ने बदली लाइफ

आइए जानते हैं उनको कैसे और क्या मिला आइडिया...

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नई दिल्ली.  सफलता का आइडिया इंसान को कहीं भी और कभी भी मिल सकता है। जरूरत होती है तो सिर्फ अपने आइडिया पर भरोसा करने और उस अमल में लाने की। महाराष्ट्र के नांदेड़ के रहने वाले परिक्षित बोकारे को किसानों की समस्याओं के हल करने का एक आइडिया मिला। इस आइडिया पर ना सिर्फ उन्होंने काम किया बल्कि इसे अमल में भी लाया और आज इस आइडिया के बल वो अच्छी खासी-कमाई कर रहे हैं। आइए जानते हैं उनको कैसे और क्या मिला आइडिया...

 

ऐसे मिला आइडिया

परिक्षित बोकारे ने moneybhaskar.com से बातचीत में कहा कि एग्रीकल्चर प्लांट पैथोलॉजी में ग्रैजुएशन करने के बाद महाराष्ट्र के वर्धा में नेशनल वाटरशेड कंजर्वेशन प्रोजेक्ट में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में नौकरी मिली। इस दौरान मुझे किसानों की समस्याओं से दो-चार होना पड़ा और यहीं से बिजनेस का आइडिया मिला।

 

आगे पढ़ें, कैसे हुई शुरुआत

बॉस बनने के लिए छोड़ी नौकरी

 

बोकारे का कहना है कि नौकरी के दौरान वो खुद बॉस बनना चाहते थे। इसलिए मैंने नौकरी छोड़ दी। इसके सांगली स्थित कृष्णा वैली एडवांस्ड एग्रीकल्चरल फाउंडेशन में एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस के तहत दो महीने का कोर्स किया। कोर्स पूरा करने के बाद गांव-गांव घूमकर क्रॉप प्रोडक्शन के बारे में जानकारी देने लगे।

 

20 हजार में बनाई कॉटन ऐप

 

इस दौरान मैंने सोचा क्यों न किसानों को टेक्नोलॉजी से जोड़कर खेती की जानकारी दी जाए। आजकल अधिकांश किसानों के पास एंड्रॉयड फोन हैं। इस बारे में मैंने अपने दोस्त से बात की जिसके पास इंफॉर्मेशन कम्युनिकेशंस में मास्टर्स डिग्री थी। फिर उसने कॉटन ऐप कापूस को डेवलप किया। ऐप का नाम कापूस इसलिए रखा क्योंकि विदर्भ इलाके में कपास की खेती ज्यादा होती है औऱ यहां समस्याएं भी ज्यादा हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए ऐप बनाया। ऐप बनाने में 20 से 25 हजार रुपए का खर्च आया।

 

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38 हजार से ज्यादा लोगों ने किया डाउनलोड

 

उनके ऐप को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। इस ऐप को 38000 से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया है। यह ऐप मराठी भाषा में है। हालांकि किसी अन्य क्षेत्र से डिमांड नहीं होने की वजह अन्य भाषा में लॉन्च नहीं किया है। ऐप के जरिए किसानों की समस्याओं का हल निकाला जाता है। पूरे महाराष्ट्र से उन्हें कॉटन खेती के बारे में जानकारी मांगी जाती है।

 

15 लाख है सालाना टर्नओवर

 

बोकारे कहते हैं कि वेंचर क्रुषि सारथी का सालाना टर्नओवर 15 लाख रुपए है। ऐप से ज्यादा लोग जुड़े होने की वजह से एग्री कंपनियों से कमाई होती है। एग्री कंपनियां अपने प्रोडक्ट की सिफारिश के लिए उनके संपर्क करती है। हम उनके प्रोडक्ट की जांच-परख करते हैं। फिर ऐप के जरिए किसानों को उपयोग करने की सलाह देते हैं। इसके बदले में कंपनियों हमको भुगतान करती हैं। इस तरह कमाई होती है। सालाना टर्नओव पर 30 फीसदी का मुनाफा हो जाता है। आगे ई-कॉमर्स वेबसाइट लॉन्च करने के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर ध्यान दे रहे है।

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