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भारत ने यूज की ‘इमर्जेंसी पावर’, अमेरिका पर पड़ेगी भारी

भारत सरकार ने अपनी ‘इमर्जेंसी पावर’ का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका के खिलाफ तगड़ा पलटवार किया है।

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नई दिल्ली. अमेरिका ने स्टील और एल्युमीनियम पर यूएस टैरिफ सेफगार्ड्स लगाकर दुनिया में ट्रेड वार का आगाज किया था, तो अब लगभग ढाई महीने के बाद अपनी ‘इमर्जेंसी पावर’ का इस्तेमाल करते हुए उसके खिलाफ तगड़ा   पलटवार किया है।   भारत ने अपनी इस पावर का इस्तेमाल करते हुए गेहूं, बादाम, अखरोट सहित 5 आइटम्स पर ड्यूटी बढ़ाई है। इसकी अमेरिका को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। भारत के एक्शन से संकेत मिले हैं कि इस कार्रवाई का दायरा आगे बढ़ाया जा सकता है।

 

 

क्या होती है इमर्जेंसी पावर

दरअसल भारत सरकार के पास कस्टम एक्ट के सेक्शन 8ए के तहत दूसरे देशों से होने वाले इंपोर्ट पर ड्यूटी लगाने का अधिकार है। फाइनेंस मिनिस्ट्री इसी पावर का इस्तेमाल करके कस्टम या इंपोर्ट ड्यूटी में इजाफा करती है। भारत सरकार ने हाल में डब्ल्यूटीओ को सूचना दी थी कि अगर अमेरिका चुनिंदा स्टील और एल्युमीनियम आइटम्स पर टैरिफ लगाने के आदेश को वापस नहीं लेता है तो वह भी अपनी इमर्जेंसी पावर का इस्तेमाल करके अमेरिका से आने वाले अखरोट, बादाम, गेहूं, सेब और चुनिंदा मोटरसाइकिलों पर जैसे प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी 100 फीसदी तक बढ़ा सकती है।

 

 

इन प्रोडक्ट्स पर बढ़ाई 100 फीसदी ड्यूटी

गुरुवार को भारत सरकार ने ऐसा कर भी दिया। सरकार ने अमेरिका से आयात होने वाले गेहूं, शेल्ड बादाम, अखरोट और प्रोटीन कंसंट्रेट सहित 5 प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी में 100 फीसदी तक इजाफा भी कर दिया।

अखरोट पर इंपोर्ट ड्यूटी 30 फीसदी से बढ़ाकर 100 फीसदी कर दी है। इसके अलावा बादाम पर इंपोर्ट ड्यूटी 65 रुपए से बढ़ाकर 100 रुपए प्रति किलो कर दी है।

इसके अलावा प्रोटीन कंसंट्रेट इंपोर्ट ड्यूटी भी 10 से बढ़ाकर 40 फीसदी कर दी है, जिसे भी खास तौर पर अमेरिका से बड़े स्तर पर इंपोर्ट किया जा सकता है। प्रोटीन कंसंट्रेट से चीज़ बनाया जाता है और साथ ही इसे बॉडी बिल्डिंग से संबंधित प्रोडक्ट्स बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है।

 

 

अखरोट और बादाम का बड़ा इंपोर्टर है भारत

भारत, अमेरिका से बादाम इंपोर्ट करने वाले बड़े देशों में शामिल है। अगस्त, 2016 से फरवरी, 2017 के बीच भारत, अमेरिका से सबसे ज्यादा बादाम का आयात करने वाला देश था। इसके अलावा भारत अखरोट का भी बड़ी मात्रा में अमेरिका से इंपोर्ट करता है।

 

 

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अमेरिका ने लगाई थी स्टील-एल्युमीनियम पर अतिरिक्त ड्यूटी

अमेरिका ने 9 मार्च को भारत सहि‍त अन्‍य देशों से आयात होने वाले स्‍टील पर 25 फीसदी और एल्‍यूमीनियम पर 10 फीसदी अतिरिक्‍त ड्यूटी लगाई थी। अमेरिका के इस कदम से केवल कनाडा और मैक्सिको को छूट दी गई थी। ड्यूटी में यह बढ़ोत्तरी 21 जून 2018 से लागू होनी है।  भारत ने कहा था कि अमेरिका ने यह कदम बिना चर्चा के उठाया है। भारत ऐसे में अमेरिका को दी जा रही रियायत को खत्‍म कर सकता है।

 

 

भारत ने WTO में भी उठाया स्टील टैरिफ का मामला

उधर, भारत ने अमेरिका के स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ लगाए जाने की शिकायत वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) में की है। डब्ल्यूटीओ द्वारा बुधवार को पब्लिश की गई फाइलिंग में यह बात सामने आई है। भारतीय अधिकारियों ने बीते महीने ही कहा था कि अगर भारत की कंपनियों को इससे छूट नहीं दी जाती है तो यह मामला डब्ल्यूटीओ में उठाया जाएगा।

 

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चीन, रूस, जापान भी हैं विरोध में

भारत के अलावा चीन, रूस, जापान, तुर्की और यूरोपियन यूनियन भी अमेरिका के चुनिंदा स्टील और एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स पर ड्यूटी बढ़ाने के फैसले के विरोध में हैं। सभी देशों ने कहा था कि यूएस टैरिफ ‘सेफगार्ड्स’ डब्ल्यूटीओ के अंतर्गत आता है, इसलिए वे कुल 3.5 अरब डॉलर का सालाना कम्पन्सेशन पाने के हकदार हैं।

भारत ने दावा किया था कि उसे एल्युमीनियम एक्सपोर्ट पर 3.1 करोड़ डॉलर और स्टील पर 13.4 करोड़ डॉलर का बोझ पड़ेगा।

 

 

इन प्रोडक्ट्स पर भी ड्यूटी लगा सकता है भारत

भारत 20 अमेरिकी उत्‍पादों पर 100 फीसदी तक ड्यूटी लगाने की बात पहले ही कह चुका है। इनमें सेब, बादाम, अखरोट के अलावा मटर, अखरोट, सोयाबीन तेल, परिष्कृत पामोलिन, कोको पाउडर, चॉकलेट उत्पाद, गोल्फ कार, 800 सीसी से अधिक इंजन क्षमता के साथ मोटर साइकिल और अन्य वाहन शामिल हैं। इससे साफ है कि भारत कई अन्य आइटम्स पर अपनी इमर्जेंसी पावर का इस्तेमाल कर सकता है।

 
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