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सरकार ने खरीफ फसलों की MSP 52% तक बढ़ाई, पीएम मोदी ने कहा-किसानों से किया वादा हुआ पूरा

धान, दाल, मक्का जैसी खरीफ की फसलों पर नए मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।

Cabinet approved up to 1.5 times MSP on kharif crop

नई दिल्ली। बुधवार को सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। धान, दाल, मक्का जैसी खरीफ की फसलों पर मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) बढ़ाने पर कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। सरकार का उद्देश्‍य है कि किसानों को अनाज के उत्पादन लागत पर ज्यादा मुनाफा मिल सके। सबसे ज्यादा एमएसपी 52.5 फीसदी रागी पर बढ़ाया गया है। वहीं, धान की एमएसपी 200 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ी है। बता दें कि सरकार ने पिछले बजट में किसानों से एमएसपी बढ़ाने का वादा किया था। माना जा रहा है कि इससे केंद्र पर 33500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा। 

 

 

किसानों से किया वादा हुआ पूराः मोदी

कैबिनेट के विभिन्न फसलों के एमएसपी बढ़ाने के फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार ने एमएसपी बढ़ाकर किसानों से उत्पादन लागत का 1.5 गुना एमएसपी करने का अपना वादा पूरा कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार एग्रीकल्चर सेक्टर के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।  उन्होंने कहा, ‘एमएसपी में यह बढ़ोत्तरी ऐतिहासिक है। सभी किसानों को इसके लिए बधाई है।’

 

 

 

52.57 फीसदी तक बढ़ी MSP
रागी पर सबसे ज्यादा 52.57 फीसदी एमएसपी बढ़ाई गई है। इसके अलावा ज्वार पर 42 फीसदी एमएसपी बढ़ाई गई है। बाजरे पर 36.8 फीसदी एमएसपी बढ़ाई गई है। तुअर की एमएसपी 4.1 फीसदी, उड़द की एमएसपी 3.7 फीसदी और मूंग की एमएसपी 2.5 फीसदी बढ़ाई गई है। 

 

फसल  नई MSP (rs प्रति क्विंटल) पुरानी  MSP (rs प्रति क्विंटल)  कितना बढ़ा (%)
फाइन पैडी 1770 1590 11.3%
कॉमन पैडी 1750 1550 12.9%
तूर 5675 5450 4.12%
मूंग 6975 5575 25.1%
उड़द 5600 5400 3.7%
रागी 2897 1900 52.5%
बाजरा 1950 1425 36.8%
तिल  6249       5300 18%
नाइजर सीड 5877     4050 45.1%
हाइब्रिड ज्वार 2430 1700 42.9%
मालदांडी ज्वार 2450 1725 42%
लांग स्टैपल  कॉटन 5450 4320 26.1%
मिडियम स्टैपल कॉटन 5150 4020 28.1%
सोयाबीन  3399 3050 11.4%
मूंगफली 4849 4450 8.9%
सनफ्लॉवर  5388 4100 31.4%

 

MSP में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी राजनाथ सिंह 
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में एमएसपी में पहली बार इतनी बड़ी बढ़ोत्तरी की गई है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी बताया। राजनाथ सिंह ने कहा कि किसान देश का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, लेकिन उन्हें कभी भी उत्पाद की सही कीमत नहीं मिली। किसानों में हताशा और निराशा थी इसे प्रधानमंत्री मोदी ने समझा। उन्होंने कहा कि वह भी किसान परिवार से हैं और यह कभी सोचा भी नहीं था कि कोई सरकार ऐसा कदम उठाएगी। 

 

हायर एमएसपी से सरकार को पड़ेगा 11,500 करोड़ का खर्च

क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि खरीफ फसलों पर मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) बढ़ाने से सरकार पर 11,500 करोड़ रुपए का खर्च पड़ेगा। पिछले साल की जितने ही इस साल भी फसल की खरीद होगी। हायर प्राइस से सरकार का खर्च बढ़ेगा। लेकिन वास्तविक लागत और बढ़ सकती है क्योंकि सरकार खरीद बढ़ा सकती है। एक फसल नहीं खरीदे जाने पर सरकार को किसानों को कमी का भुगतान करना पड़ सकता है, जो एमएसपी और मार्केट/मंडी प्राइस के बीच अंतर है। मौजूदा समय में अधिकांश फसलों का मार्केट/मंडी प्राइस उनके घोषित एमएसपी से नीचे है।

 

दूसरे अनाज उत्पादकों को भी फायदा 
हाल ही में जारी कैबिनेट नोट के मुताबिक, एमएसपी का अतिरिक्त खर्च जीडीपी का 0.2 फीसदी है। अतिरिक्त खर्च में धान की हिस्सेदारी 12300 करोड़ रुपए होगी। एफसीआई सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से वितरण के लिए केवल गेहूं और चावल खरीदता है, इसलिए सरकार एक नई व्यवस्था स्थापित करना चाहती है ताकि यह तय किया जा सके कि अन्य फसलों के एमएसपी में बढ़ोत्तरी का लाभ भी किसानों तक पहुंचे। 

 

नई खरीद नीति क्यों थी जरूरी
दाल, तिलहन और कॉटन की खरीद प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत होती है, लेकिन इसमें कई खामियां बताई गईं।  मौजूदा समय में किसानों को मूंगफली, सोयाबीन, रागी, मक्का, बाजरा और ज्वार सहित 23 अधूसूचित फसलों पर दाम एमएसपी से कम मिल रहा है। इन उत्पादों की खरीद पर सरकार संबंधित एजेंसियों को हो रहे नुकसान की भी भरपाई करेगी। 

 

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