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चीनी पर एक्सपोर्ट ड्यूटी खत्म, काबुली चने पर बढ़ाकर 60% की इंपोर्ट ड्यूटी

सरकार ने डॉमेस्टिक मार्केट में चीनी की गिरती कीमतों को थामने के लिए उस पर 20 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी हटा दी है।

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नई दिल्ली. सरकार ने डॉमेस्टिक मार्केट में चीनी की गिरती कीमतों को थामने के लिए उस पर 20 फीसदी एक्सपोर्ट ड्यूटी हटा दी है। सरकार के इस फैसले से शुगर इंडस्ट्री को खासी राहत मिली है, जो इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है। इस संबंध में सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार ने कहा कि ड्यूटी खत्म होने से सरकार को मौजूदा एक्सपोर्ट वॉल्यूम पर सालाना 75 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। वहीं देर शाम काबुली चने पर इंपोर्ट ड्यूटी 40 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दी।


काबुली चने पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी
सरकार ने काबुली चने और बंगाली चने यानी देसी चने पर इंपोर्ट ड्यूटी 60 फीसदी करके दोनों के बीच हार्मोनाइज्ड सिस्टम कोड ऑफ चिकपीस का अंतर खत्म कर दिया।
हार्मोडाइज्ड सिस्टम कोड ट्रेडेड प्रोडक्ट्स के वर्गीकरण का नामों और नंबर्स का एक अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्डाइज्ड सिस्टम है। 
डॉमेस्टिक मार्केट में कीमतों में गिरावट और रबी सीजन में दालों के रिकॉर्ड प्रोडक्शन के अनुमान को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

 

इंडस्ट्री ने की थी डिमांड
इंडस्ट्री ने डॉमेस्टिक सप्लाई को थामने और इस सीजन रिकॉर्ड आउटपुट को देखते हुए कीमतों को सही लेवल पर बनाए रखने में मदद करने के लिए ड्यूटी हटाने की मांग की थी। चीनी पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को हटाने की मांग को लेकर खाद्य मंत्रालय ने दो बार अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी थी। चीनी मिलों के ऑर्गनाइजेशन ने भी  सरकार से एक्सपोर्ट ड्यूटी हटाने का अनुरोध किया था।
केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कुछ दिन पहले कहा था कि रिकॉर्ड प्रोडक्शन को देखते हुए उन्होंने फरवरी में चीनी का निर्यात शुल्क घटाने की अपनी सिफारिश वित्त मंत्रालय को भेजी है। 

 

इस साल चीनी के रिकॉर्ड प्रोडक्शन की उम्मीद
चीनी मिलों के संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के मुताबिक देश में इस साल चीनी का उत्पादन 2.95 करोड़ टन होने की उम्मीद है, जो गत साल से 92 लाख टन ज्यादा है। चीनी के तीन प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में क्रमश: 93.8 लाख टन, 84.3 लाख टन और 35.1 लाख टन चीनी का प्रोडक्शन हुआ है। पिछले शुगर सीजन 2016-17 (अक्टूबर-सितंबर) में देश में 2.03 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था। 

 

किसानों का बकाया हुआ 20 हजार करोड़ रु
इस्मा ने कहा कि चीनी का स्टॉक बढ़ने से घरेलू बाजार में इसकी कीमत घटकर काफी कम हो गई है जिससे मिलों का घाटा लगातार बढ़ रहा है। इस्मा के मुताबिक, जनवरी तक गन्ने की बकाया राशि बढ़कर 14,000 करोड़ रुपए थी जो इस महीने के अंत तक बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है। 

 

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