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हर महीने लाखों की कमाई करा सकती है काले चावल की खेती, 500 रु किलो तक कीमत

काले चावल की आपके खेती फायदे का सौदा हो सकती है, आम चावल के मुकाबले यह 600 फीसदी ज्‍यादा महंगा बिकता है...

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नई दिल्‍ली. हाल के दिनों में काला चावल या ब्‍लैक राइस तेजी के साथ देश में पॉपुलर हुआ है। दरअसल पारंपरिक सफेद चावल के मुकाबले काले चावल को सेहत के लिए ज्‍यादा बेहतर माना जाता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह चावल कैंसर जैसी बीमारी से लड़ने में भी काफी कारगर है। बहुत से डॉक्‍टर भी इसके प्रयोग की सलाह देने लगे हैं। 

 
यूज के साथ काले चावल की खेती भी देश में तेजी के साथ पॉपुलर हो रही है। शुरुआत में प्रयोग के तौर असम और मणिपुर जैसे राज्‍यों में इसकी खेती शुरु हुई। यहां इसके रिस्‍पॉन्‍स काफी बेहरत रहे। इसके चलते काले चावल की पॉपुलैरिटी पंजाब जैसे राज्‍य में भी पहुंच चुकी है। 
 
सेहत के अलावा इसकी खेती किसानों को अच्‍छी कमाई भी करा सकती है। आप काले चावल की खेती के जरिए पाररंरिक चावल के मुकाबले मिनिमम 500 फीसदी ज्‍यादा कमाई सकते हैं। देश के कई राज्‍यों की सरकारें इसकी खेती को प्रोत्‍साहित भी कर रही हैं। वहीं कुछ राज्‍य इसके प्रोडक्‍टशन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहे हैं। 


क्‍या है ब्‍लैक राइस या काला चावल 
ब्‍लैक राइस या काला चावल सामान्‍य तौर पर आम व्‍हाइट या ब्राउन राइस जैसा ही होता है। इसकी शुरूआती खेती चीन में होती थी। वहीं ये इसकी खेती असम और मणिपुर में शुरू हुई। काला चावल एंटी-ऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर माना जाता है। यूं तो कॉफी और चाय में भी एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं लेकिन काले चावल में इसकी मात्रा सर्वाधिक होती है।  इसके चलते बॉडी को डि‍टॉक्स होती है और कई तरह की सेहत संबंधी परेशानि‍यां दूर रहती हैं। एंटी ऑक्‍सीडेंट हमारे शरीर की विश्षाक्‍त संबंधी बीमारियों से लड़ता है। इसे कैंसर के इलाज के लिए सब से ज्यादा उपयोगी माना जाता है। आम सफेद चावल के मुकाबले इसमें ज्‍यादा विटामिन B और  E के साथ कैलशिमय, मैगनीशियम, आयरन और जिंक की भी मात्रा ज्‍यादा होती है। 


असम में सबसे पहले शुरू हुई खेती 
भारत में सबसे पहले काले चावल की खेती असम के किसान उपेंद्र राबा ने 2011 में शुरू की। उपेंद्र असम के ग्‍वालपारा जिले के आमगुरीपारा के रहने वाले हैं। उपेंद्र को राज्‍य के  कृषि विज्ञान केंद ने काले चावल की खेती के बारे में जानकारी मिली थी। बाद में उपेंद्र का यह प्रयोग काफी सफल रहा। इसके बाद आस पास के करीब 200 किसानों से इसकी खेती शुरू कर दी। इसके बाद इसकी खेती की शुरुआत मणिपुर में हुई और धीरे धीरे इसकी खेती नार्थ ईस्‍ट में पॉपुलर हो गई। 

 

आगे पढ़ें- कहां-कहां हो रही खेती

पंजाब में किसान कर रहे इसकी खेती

नार्थ ईस्‍ट के बाद इसकी खेती पंजाब में शुरू हो चुकी है। राज्‍य के फिरोजपुर जिले में मानासिंह वाला गांव में इस साल पहली बार कुछ किसानों ने काले चावल की खेती शुरू की है। मीडिया रिपेार्ट का दावा है कि उनके पास अभी से 500 रुपए प्रति किलो तक के ऑर्डर मिलने लगे हैं। पंजाब में इस चावल की प्रति एकड़ 15 से 20 कुंतल उपज निकलने की सम्भावना है। यहां के किसानों से मरिणपुर से इस धान के सीड मंगवाए हैं।  


500 फीसदी ज्‍यादा प्रॉफिट है इसकी खेती में

यह चावल असम के कई किसानों को मोटी कमाई करा रहा है। दरअसल आमतौर पर जहां चावल 15 से 80 रु किलो के बीच बिकता है वहीं इस चावल की कीमत 250 रुपए से शुरू होती है। वहीं अगर इसे आप ऑर्गेनिक तरीके से उगाते हैं तो आपको 500 रुपए प्रति किलो तक इसकी कीमत मिल सकती है। इस हिसाब से देखें तो आम चावल के मुकाबले आप काले चावल की खेती में आप 500 से 600 फीसदी ज्‍यादा प्रॉफिट कमा सकते हैं। 

 

आगे पढ़ें- कैसे मिलेगा बीज

कहां से हासिल करें बीज

अगर आप काले चावल की खेती करना चाहते हैं उसके लिए आपको नॉर्थ ईस्‍ट या मणिुपर से इसके सीड मंगा सकते हैं। आप ऑनलाइन भी सीड मंगा सकते हैं। आप अपने प्रोडक्‍ट को ई-कॉमर्स कंपनियों को भी बेच सकते हैं।  

 

कई राज्‍य सरकारें इसे कर रही प्रात्‍साहित 

एक ब्‍लॉग के मुताबिक, मणिपुर के धान योग्‍य 10 फीसदी जमीन में काले चावल की खेती हो रही है। यह चावल आम हाईब्रिड चावल के मुकाबले पानी की खपत भी कम करता है। इसके चलते इसे उत्‍तर भारत में भी आसानी से लगाया जा सकता है। असम की सरकार ने काले चावल की खेती को प्रोत्‍साहित करने के लिए 2015 में विशेष प्रोग्राम भी शुरू किया है।

 

 

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