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1 बूंद दूध से पकड़ें 6 तरह की मि‍लावट, NDRI ने बनाई खास कि‍ट

अब दूध में मि‍लावट को पकड़ना और आसान हो गया है।

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नई दि‍ल्‍ली। अब दूध में मि‍लावट को पकड़ना और आसान हो गया है। राष्‍ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्‍थान (NDRI),करनाल के डेयरी रसायन वि‍भाग के वैज्ञानि‍कों ने पेपर स्ट्रि‍प आधारि‍त एक खास परीक्षण कि‍ट इजाद की है। इससे दूध में होने वाली मि‍लावटों का पता चुटकि‍यों में और केवल एक बूंद दूध से चल सकता है। 


इससे दूध में 0.01 फीसदी माल्‍टोडक्‍सट्रीन की मौजूदगी का  भी पता लगाया जा सकता है। दूध में आमतौर पर 6 तरह की मि‍लावट की जाती है जैसे न्‍यूट्रलाइजर, यूरि‍या, हाइड्रोजन पेराक्‍साइड, ग्‍लूकोज, माल्‍टोडक्‍सट्रीन और सुक्रोज। यह कि‍ट इनका पता लगाने में पूरी तरह से सक्षम है। 


आसान है टेस्‍ट करना 
परीक्षण करने के लि‍ए स्‍ट्रि‍प को दूध में डुबो दि‍या जाता है या दूध की एक बूंद को स्‍ट्रि‍प पर डाला जाता है। अगर दूध में मि‍लावट है तो तुरंत ही उसका रंग बदल जाता है। केवल 10 मि‍नट में ही घरेलू स्‍तर पर कोई भी शख्‍स चेक कर सकता है कि दूध में क्‍या मिलाया गया है। 
स्‍ट्रि‍प पर दूध डालने से वह कई तरह के रंग ले सकती है। ये इस बात पर डि‍पेंड करता है कि उसमें मि‍लाया क्‍या गया है। कि‍ट के साथ कलर टेबल भी दी जाती है ताकि आप रंग के हि‍साब से पहचान कर सकें कि क्‍या मि‍लाया गया है। 


यूरि‍या और डिटर्जेंट की होती है मि‍लावट 
NDRI के डेयरी कैमि‍स्‍ट्री डि‍पार्टमेंट के प्रिंसि‍पल साइंटि‍स्‍ट डॉक्‍टर राजन शर्मा ने बताया कि दूध में मि‍लावट बहुत ही खतरनाक मामला है। मि‍लावटखोर इसमें यूरि‍या और डि‍टर्जेंट की मि‍लावट करने से परहेज नहीं कर रहे। इसके अलावा दूध में बड़े पैमाने पर माल्‍टोडक्‍सट्रीन मि‍लाया जा रहा है। इसे पकड़ना आसान नहीं होता। जब भी दूध की मि‍लावट की बात आती थी तो लोगों को यही उम्‍मीद रहती थी कि‍ NDRI को इसमें कुछ करना चाहि‍ए। हमें मिनस्‍टरी ऑफ फूड प्रोसेसिंग की तरह से ये प्रोजेक्‍ट मि‍ला था, जि‍सपर हमने काम कि‍या और ये तकनीक इजाद की, इसके पेटेंट के लि‍ए आवेदन भी कि‍या हुआ है। 


इंडि‍यन काउंसलि‍ ऑफ एग्रीकल्‍चर रिसर्च 
डॉक्‍टर राजन ने बताया कि‍ पहले हमने जो स्‍ट्रि‍प तैयार की थी वो एक पेपर जैसा था, जि‍स पर आपको दूध की बूंद डालनी होती थी। मगर उसे हैंडल करना थोड़ा टेक्‍नि‍कल था। लोगों की मांग थी कि‍ एक ऐसी स्‍ट्रि‍प तैयार की जाए जि‍से दूध में डुबोने से रि‍जल्‍ट आ जाए। इसके बाद हमने ये स्‍ट्रि‍प तैयार की। 


एनडीआरआई ने अमूल, मदर डेयरी सहि‍त कई कोऑपरेटिव्‍स को यह कि‍ट मुहैया कराई है। इसके अलावा यह तकनीक कुछ प्राइवेट कंपनि‍यों को भी दी गई है। इनमें डेलमोस रि‍सर्च प्राइवेट लि‍मि‍टेड नामक एक स्‍टार्टअप भी शामि‍ल है। यह स्‍टार्टअप यहीं के दो छात्रों - मनोज कुमार और बब्‍बर सिंह ने शुरू कि‍या है। यह लोग अब कि‍ट को कमर्शि‍यल तरीके से प्रोड्यूज और डेवलप कर रहे हैं। 


पूर्व छात्रों ने आगे बढ़ाया 
इंडि‍यन काउंसि‍ल ऑफ एग्रीकल्‍चर रि‍सर्च की ओर से इस कि‍ट की जो जानकारी साझा की गई है उसमें डेलमोस रि‍सर्च प्राइवेट लि‍मि‍टेड का भी जि‍क्र है, जहां से इस कि‍ट को हासि‍ल कि‍या जा सकता है। डेलमोस को शुरू करने वाले एनडीआरआई के पूर्व छात्र मनोज कुमार ने बताया कि‍ संस्‍थान से मि‍ली तकनीक के आधार पर उन्‍होंने कुल तीन तरह की स्‍ट्रि‍प डेवलप की हैं। 

जल्‍द ही आएगी सिंगल कि‍ट 

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इन तीनों की मदद से दूध में होने वाली 10 तरह की मि‍लावट को पकड़ा जा सकता है। दो कि‍ट की कीमत 1600 रुपए प्रत्‍येक है आरे तीसरी की कीमत 800 रुपए है। एक कि‍ट में 100 स्‍ट्रि‍प आती हैं। मनोज ने बताया कि‍ वह अब ऐसी स्‍ट्रि‍प पर काम कर रहे हैं जो एक साथ 10 तरह की मि‍लावट का पता लगा लेगी। तब आपको 3 अलग अलग स्‍ट्रि‍प का यूज नहीं करना होगा। इस तरह ही स्‍ट्रि‍प आने में अभी 6 महीने लग सकते हैं। फि‍लहाल उनसे दूध कारोबारी तीनों तरह की स्‍ट्रि‍प खरीद रहे हैं। 

 

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