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शुगर इंडस्‍ट्री को राहत देने की तैयारी, फूड मि‍नि‍स्‍टरी ने दि‍ए 3 प्रस्‍ताव

गन्‍ना कि‍सानों का बकाया चुकाने और शुगर इंडस्‍ट्री को राहत देने के लि‍ए केंद्र एक और कदम उठाने जा रहा है।

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नई दि‍ल्‍ली। गन्‍ना कि‍सानों का बकाया चुकाने और शुगर इंडस्‍ट्री को राहत देने के लि‍ए केंद्र एक और कदम उठाने जा रहा है। खाद्य एवं उपभोक्‍ता मंत्रालय ने 30 लाख टन चीनी का बफर स्‍टॉक बनाने और चीनी का न्‍यूनतम एक्‍स-मि‍ल रेट तय करने के   लि‍ए कैबि‍नेट नोट का एक मसौदा जारी कि‍या है। 


चीनी का मि‍ल मूल्य इन दि‍नों 25.60 से 26.22 रुपए प्रति कि‍लो चल रहा है। मि‍लों का कहना है कि एक कि‍लो चीनी पर 7 से 8 रुपए का घाटा हो रहा है। इस मसौदे में चीनी का न्‍यूनतम एक्‍स मि‍ल मूल्‍य 30 रुपए के आसपास रखने का प्रस्‍ताव कि‍या गया है। 


तीन प्रस्‍ताव दि‍ए 
एक वरि‍ष्‍ठ अधि‍कारी ने बताया कि पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने प्रधानमंत्री कार्यालय और कमेटी ऑफ सेक्रेटरीज को इस सि‍लसि‍ले में कुछ सुझाव दि‍ए थे। उन्‍हें ध्‍यान में रखते हुए फूड मि‍नि‍स्‍टरी ने यह ड्राफ्ट कैबि‍नेट नोट तैयार कि‍या है, जि‍समें तीन रास्‍तों का जि‍क्र है। इसमें 30 लाख टन का बफर स्‍टॉक, न्‍यूनतम एक्स मि‍ल रेट और मासि‍क कोटा व्‍यवस्‍था शामि‍ल है। 


मंत्रालय ने हर मि‍ल के लि‍ए कोटा तय कर मि‍लों की स्‍टॉक सीमा रखने की पेशकश की है। साथ ही मि‍लों के लि‍ए खुले बाजार में चीनी बेचने का मासि‍क चीनी कोटा जारी करने की व्‍यवस्‍था फि‍र शुरू करने का सुझाव भी दि‍या है।


22000 करोड़ है बकाया 
गन्‍ने की बंपर पैदावार के चलते भारत में इस पेराई सीजन (अक्‍टूबर-सितंबर) में चीनी का कुल उत्‍पादन 31.6 मि‍लि‍यन टन पहुंच चुका है। इसकी वजह से बाजार में चीनी के दाम काफी नीचे आ गए और चीनी मि‍लों के पास नकदी का संकट आ गया। आधि‍कारि‍क आंकड़ों के मुताबि‍क, अभी देश की चीनी मि‍लों पर गन्‍ना कि‍सानों का करीब 22000 करोड़ रुपए बकाया है। 


अब तक और क्‍या कदम उठाए गए 
सरकार ने मि‍लों को 5.50 रुपए प्रति क्‍विंटल की उत्‍पादन सब्‍सि‍डी दी है। 
चीनी पर आयात शुल्‍क 100 फीसदी कर दि‍या गया है। 
20 लाख चीनी एक्‍सपोर्ट करने को मंजूरी, निर्यात शुल्‍क भी हटाया। 
इथनॉल पर जीएसटी 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी कि‍या। 

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