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चार पहिया वाहनों के लिए 4 साल का बीमा कवर, नहीं कराना होगा हर साल रिन्‍यूअल

भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने बीमा कंपनियों से लंबी अवधि के थर्ड पार्टी मोटर बीमा प्रोडक्‍ट तै

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नई दिल्‍ली। भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने बीमा कंपनियों से लंबी अवधि के थर्ड पार्टी मोटर बीमा प्रोडक्‍ट तैयार करने को कहा है जिससे अधिक से अधिक वाहनों को कवर किया जा सके। बीमा नियामक ने साधारण बीमा कंपनियों को भेजे नोटिफिकेशन में कहा है कि टू व्‍हीलर के लिए थर्ड पार्टी मोटर बीमा पॉलिसी 5 साल के लिए और चार पहिया वाहनों के लिए पॉलिसी 4 साल के लिए होनी चाहिए। मोटर व्‍हीकल एक्‍ट के तहत दो पहिया वाहन या चार पहिया सभी व्‍हीकल का  थर्ड पार्टी मोटर बीमा कवर लेना जरूरी है। 

 

हर साल नहीं कराना होगा रिन्‍यूअल 

 

अगर बीमा कंपनियां दो पहिया और चार पहिया वाहनों के लिए 5 साल और 4 साल की पॉलिसी लाती हैं तो ओनर को थर्ड पार्टी मोटर बीमा पॉलिसी का हर साल रिन्‍यूअल नहीं कराना पड़ेगा। एक बार पॉलिसी लेने पर पॉलिसी 5 या 4 साल के लिए वैध रहेगी। मौजूदा समय में थर्ड पार्टी मोटर बीमा पॉलिसी एक साल के लिए होती है। इसके बाद व्‍हीकल के ओनर को पॉलिसी का रिन्‍यूअल कराना होता है। लेकिन बड़े पेमाने पर व्‍हीकल ओनर पॉलिसी की रिन्‍यूअल नहीं कराते हैं हैं और बिना थर्ड पार्टी बीमा कवर के व्‍हीकल चलाते हैं। 

 

लंबी अवधि के लिए मोटर बीमा पॉलिसी को बेचना नहीं होगा आसान 

 

साधारण बीमा कंपनियों के संगठन जनरल इन्‍श्‍योरेंस काउंसिल के सेक्रेटरी जनरल एम चंद्रशेखरन ने moneybhaskar.com को बताया कि बीमा नियामक ने लंबी अवधि के लिए मोटर बीमा पॉलिसी प्रोडक्‍ट तैयार करने का सुझाव दिया है। लेकिन इसमें कई चुनौतियां हैं। नई गाड़ियों के लिए तो बीमा कंपनियां डीलर को बोल सकती हैं कि वे 4 साल के लिए बीमा पॉलिसी दें। लेकिन पुरानी गाड़ी का व्‍हीकल ओनर क्‍या 4 साल के लिए थर्ड पार्टी मोटर बीमा पॉलिसी खरीदेगा। 

 

लंबी अवधि के प्रोडक्‍ट पर कैसे तय होगा थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम 

 

चंद्रशेखरन का कहना है कि बीमा कंपनियां ओन डैमेज सेगमेट के लिए तो लंबी अवधि की पॉलिसी ला सकती हैं लेकिन थर्ड पार्टी बीमा पॉलिसी का प्रीमियम वे कैसे तय करेंगी। अभी बीमा नियामक थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम की समीक्षा हर साल करता है तो बीमा कंपनी चार साल के लिए पॉलिसी का प्रीमियम कैसे तय करेगी। अगर बीमा नियामक प्रीमियम तय करने के मकैनिज्‍म में कोई बदलाव करता है तभी लंबी अवधि के लिए पॉलिसी लाना संभव है। 

लंबी अवधि की पॉलिसी पर कीमत भी बनेगी मुद्दा 

 

इसके अलावा लंबी अवधि के लिए मोटर बीमा पॉलिसी में प्रीमियम पेमेंट करना भी एक चुनौती होगा। मौजूदा समय में एक कार का मोटर बीमा प्रीमियम अगर सालाना 15,000 रुपए मान लें तो तो चार साल का यह 60,000 रुपए हो जाएगा। अगर डिस्‍काउंट के साथ इसका प्रीमियम 50,000 रुपए भी मान लें तो क्‍या ओनर एक बार में 50,000 रुपए का भुगतान करने को तैयार होगा। 

 

मोटर व्‍हीकल एक्‍ट का अनुपालन जरूरी 

 

चंद्रशेखरन का कहना है कि बीमा नियामक ने बिना इन्‍श्‍योरेंस के सड़क पर चल रही गाडि़यों की संख्‍या कम करने के लिए यह सुझाव दिया है। लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मोटर व्‍हीकल एक्‍ट का पालन हो। मोटर व्‍हीकल एक्‍ट के तहत किसी भी व्‍हीकल का थर्ड पार्टी इन्‍श्‍यारेंस जरूरी है। ऐसे में यह मामला काफी हद तक कानून के अनुपालन से जुड़ा है। 

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