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इंश्योरेंस लेते समय इन बातों का रखें ध्यान, नहीं होगा कोई नुकसान

ऑनलाइन इंश्योरेंस पर मिल सकती है अच्छी डील्स

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नई दिल्ली। भारत में लोग निवेश करने से कतराते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि ज्यादातर लोगों को निवेश के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। दूसरों से सुनी-सुनाई बातों को मानकर लोग निवेश के बारे में कई गलत धारणाएं बनाकर बैठ जाते हैं। हम आपको बताने जा रहे हैं रुपए-पैसे से जुड़ सात मिथकों के बारे में, जिनका सच जानना हर किसी के लिए जरूरी है। आज हम आपको रुपए -पैसे से जुड़े कुछ मिथकों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे पढ़कर आप इनसे बच सकते हैं। रोजाना आपको बहुत से ऐसे विज्ञापन दिखाई देते होंगे जिनमें कहा जाता है कि मोटर इंश्योरेंस पर आप 50 से 60 फीसदी की बचत कर सकते हैं । ऐसे विज्ञापनों पर लोगों को भरोसा नहीं करना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि कोई भी इंश्योरेंस खरीदने से पहले आप प्लान की पूरी जानकारी हासिल कर लें। आज हम आपको अलग-अलग इंश्योरेंस को लेकर होने वाली गलतफहमी के बारे में बताने जा रहे हैं।

 

ऑनलाइन इंश्योरेंस पर मिल सकती है अच्छी डील्स


 यदि आप ऑनलाइन टर्म प्लान खरीदते हैं तो आपको बता दें कि यह सस्ते होते हैं और इनकी कॉस्ट काफी कम होती है। यदि आप 1 करोड़ रुपए का कवर लेना चाहते हैं तो मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के सुपर टर्म प्लान ले सकते हैं इसके तहत लोगों को 12100 रुपए सालाना का प्रीमियम देना होगा। इसी कंपनी से ऑनलाइन टर्म प्लान प्लस इससे करीब 30 फीसदी सस्ता होकर 8378 रुपए सालाना का पड़ता है। हालांकि मेडिकल, व्हीकल या ट्रैवल कवर खरीदते समय हो सकता है कि आपको इस तरह के डिस्काउंट ना मिले।  ऑनलाइन डिस्ट्रिब्यूटर्स दावा करते हैं कि मोटर इंश्योरेंस को ऑनलाइन खरीदा जाए तो काफी हद तक पैसे बच सकते हैं। लेकिन ऐसे दावों पर ग्राहकों को अलर्ट होना चाहिए। 

 

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इंश्योरेंस पर टैक्स की बचत से बड़ा फायदा


बीमा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स पॉलिसी के मेच्योर होने पर मिलने वाली रकम के टैक्स फ्री होने की बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। सेक्शन 10 (10डी) के तहत अगर आपने ऐसी पॉलिसी ली है, जिसका कवर सालाना प्रीमियम का 10 गुना है तो मेच्योरिटी पर मिलने वाली रकम टैक्स फ्री होगी। अगर आपको किसी भी निवेश पर महंगाई दर से कम रिटर्न मिलता है तो इंडेक्सेशन बेनेफिट की वजह से वह यूं भी टैक्स फ्री होगा। बशर्तें उस पर इंडेक्सेशन की छूट मिल रही हो। इंडेक्सेशन में होल्डिंग पीरियड के दौरान मिलने रिटर्न में से उसी अवधि की महंगाई दर को घटाया जाता है। उसके बाद बची हुई रकम पर टैक्स देना होता है। इंडेक्सेशन बेनेफिट गोल्ड, म्यूचुअल फंड और रियल एस्टेट जैसे कैपिटल एसेट्स पर अवेलेबल है। इंश्योरेंस पर यह छूट नहीं मिलती। ट्रेडिशनल इंश्योरेंस पॉलिसी से आमतौर पर 4.5-5 पर्सेंट और 10-15 साल के ऐसे लॉन्ग टर्म प्लान पर 5-6 पर्सेंट का रिटर्न मिलता है। 

SIP में लगातार निवेश करेंगे तो नुकसान नहीं होगा


 सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान या एसआईपी की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में छोटे निवेशकों  के बीच बढ़ी है। यह आपको बाजार में उतार-चढ़ाव के जोखिम से बचाता है। और इससे समय के साथ निवेश की एक औसत लागत बनती है। अगर आपको लगता है कि एसआईपी से निवेश करने पर नुकसान नहीं हो सकता तो आप गलत सोचते हैं। इनसे भले ही शेयरों में पैसा लगाने का रिस्क कम होता है लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं होता। जब भी बाजार में गिरावट आती है म्यूचुअल फंड में लगाई गई रकम की वैल्यू कम हो जाती है। जिन लोगों ने भी अभी 12-18 महीने से एसआईपी शुरू किया है उन्हें अभी घाटा हो रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि वह एसआईपी को बंद कर दें। निवेशकों को यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि उन्होंने एसआईपी को किस मकसद से शुरू किया है। यदि आप लंबे समय तक एसआईपी में पैसे निवेश करते हैं तो इससे अच्छी संपत्ति बनाई जा सकती है।  

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