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टर्म इंश्योरेंस के क्लेम को नकार नहीं पाएंगी कंपनियां जानें कैसे

पॉलिसी लेने के तीन साल बाद भी कर पाएंगे क्लेम

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नई दिल्ली.

कई बार लोग पॉलिसी लेते वक्त संशय में रहते हैं कि उन्हें उनकी इंश्योर्ड राशि मिलेगी या नहीं। खासतौर से टर्म इंश्योरेंस लेते वक्त लोगों को डर रहता है कि उनकी मृत्यु के बाद उनके परिवार को क्लेम का पैसा मिलेगा या नहीं। और लोगों का यह डर कहीं न कहीं सही भी होता है, क्योंकि कई कारणों से लोगों का क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। देश के इंश्योरेंस रेगुलेटरी डेवलपमेंट अथॉरिटी के मुताबिक 2016-17 में जीवन बीमा कंपनियों ने 8.60 लाख क्लेम काे सेटल किया लेकिन 12,769 क्लेम्स को रिजेक्ट भी किया। हालांकि बीमा कानून कहता है कंपनियां आपके क्लेम को पॉलिसी जारी होने के तीन साल बाद मना नहीं कर सकती हैं। इसके साथ ही अगर आप कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखेंगे तो कंपनियां आपके क्लेम को रिजेक्ट नहीं कर पाएंगी।

 

क्लेम के लिए मना नहीं कर सकती कंपनियां

देश के इंश्योरेंस एक्ट के मुताबिक इंश्योरेंस पॉलिसी जारी होने के तीन साल एक्सपायर होने के बाद इंश्योरेंस कंपनियां आपके क्लेम को मना नहीं कर सकती हैं। इसके पहले तक इंश्योरेंस कंपनियां पॉलिसी जारी करने के दाे साल बाद ग्राहक द्वारा किए गए क्लेम के लिए मना नहीं कर सकती थीं। कंपनियां सिर्फ फ्रॉड की सूरत में क्लेम के लिए मना कर सकती थीं। लेकिन इंश्योरेंस एक्ट, 1938 के सेक्शन 45 में संशोधन के बाद किसी भी बीमा प्रदाता कंपनी के पास किसी बीमा पर सवाल उठाने के लिए सिर्फ तीन साल हाते हैं। इसके बाद कंपनी किसी भी सूरत में बीमा के क्लेम को नकार नहीं सकती है। अगर आपने पॉलिसी का रिवाईवल कराया है, तो इस सूरत में क्लॉस के तीन साल पॉलिसी की रिवाइवल डेट से ही गिने जाएंगे, न कि पॉलिसी लिए जाने की तारीख से।

 

आगे पढ़ें- इत बातों का रखें ध्यान

 

 

इन बातों का रखें ध्यान

इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कि बीमा कंपनी आपके बीमा या क्लेम पर शुरुआती तीन साल में सवाल नहीं उठाएगाआप पहले से ही कंपनी को सारी जरूरी जानकारी मुहैया कराएं। अपनी सही उम्रव्यवसायहेल्थ कंडीशनआयपारिवारिक इतिहास और अन्य अहम जानकारी अपने फॉर्म में भरें। इसके अलावा अपनी मौजूदा पॉलिसीज और उनके कवर के बारे में भी जानकारी दें। अपने नॉमिनी का नाम भी जरूर बताएं। अपना फॉर्म खुद ही भरें। अगर आपका फॉर्म किसी और न भरा है तो आप सबसे पहले उसे अच्छी तरह से पढ़ेंइसके बाद उसपर साइन करें। पॉलिसी के डॉक्युमेंट मिलने के बाद सारी जानकारी को क्रॉस-चेक जरूर करें। अगर कोई गलती दिखें तो उसे तुरंत ठीक कराएं।

 

आगे पढ़ेंक्या है टर्म इंश्योरेंस

 

 

क्या है टर्म इंश्योरेंस

यह एक तरीके का लाइफ इंश्योरेंस होता है जिसमें एक निश्चित अवधि के लिए कवरेज दिया जाता है। अगर इस अवधि में बीमा लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो नॉमिनी को इंश्योरेंस राशि दी जाती है। टर्म इंश्योरेंश व्यक्ति के परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजायन किया गया है। इसमें तय समय तक एक तय राशि नॉमिनी को मिलती रहती है। इसका प्रीमियम अन्य बीमा पॉलिसीज के मुकाबले काफी सबसे कम होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें इंवेस्टमेंट नहीं होता है और सारा प्रीमियम रिस्क कवरेज के लिए जाता है।

 

 

 

 

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