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हेल्थ इन्श्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले रखिए इन बातों का ख्याल, होंगे कई फायदे

हेल्थ इन्श्योरेंस कंपनियां अपनी पॉलिसी बेचते वक्त काफी सारे ऑफर्स देती हैं।

Questions to Ask before Buying Health Insurance
नई दिल्‍ली। हेल्थ इन्श्योरेंस कंपनियां अपनी पॉलिसी बेचते वक्त काफी सारे ऑफर्स देती हैं। लेकिन छोटी-छोटी गलतियां करने के कारण वक्त पर हेल्थ पॉलिसी का आप सही तरीके से लाभ नहीं ले पाते हैं। इन गलतियों के कारण कई बार इन्श्योरेंस कंपनियां क्लेम देने से भी मना कर देती हैं। मनी भास्कर आपको आज बता रहा है कि कैसे हेल्थ पॉलिसी में बिना गलती किए आप कंपनियों से क्लेम ले सकते हैं।
 
इम्पैनल अस्पताल में कराएं इलाज
 
अपने परिवार के लिए हेल्थ पॉलिसी लेना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल क्लेम का प्रोसेस होना है। ज्यादातर लोग कैशलेस प्लान लेते हैं, ताकि उन्हें अपनी जेब से कोई पैसा ना देना पड़े। लेकिन कैशलेस प्लान इमरजेंसी के वक्त काम में नहीं आता है। अगर आप इन्श्योरेंस कंपनी से अप्रूव्‍ड अस्पताल में अपने या परिवार के किसी सदस्य को भर्ती कराते है, तब जाकर ही आपको इसका उचित लाभ मिलेगा।
 
इन्श्योरेंस कंपनी से इम्पैनल अस्पताल में अगर आप इलाज नहीं कराते हैं तो आपको इलाज पर खर्च हुआ सारा पैसा पहले अपनी जेब से देना पड़ सकता है। बाद में आपको इसका क्लेम कंपनी से लेना होगा। इसलिए हमेशा इन्श्योरेंस कंपनी द्वारा इम्पैनल किए गए अस्पताल में ही इलाज कराएं।

एक हफ्ते के अंदर करें इन्श्योरेंस मेडिक्लेम फाइल
मेडिक्लेम लेने की स्थिति में इलाज करवाने के बाद इन्श्योरेंस कंपनी के पास एक हफ्ते के अंदर अपनी क्लेम फाइल जमा कर दें। क्‍लेम फाइल में अस्पताल से मिले सभी डॉक्युमेंट्स की ऑरिजनल कॉपी और एक सेट फोटोकॉपी होनी चाहिए। क्योंकि कंपनी की तरफ से नियुक्त सर्वेयर आपके सभी डॉक्युमेंट्स की ऑरिजनल कॉपी देखने के बाद ही फाइल को आगे बढ़ाएगा। अगर सर्वेयर को डॉक्युमेंट्स में किसी प्रकार की कमी दिखी तो वो आपका क्लेम प्रोसेस रिजेक्ट कर सकता है।
 
कैशलेस क्लेम के लिए 48 घंटे पहले करें इन्श्योरेंस कंपनी से संपर्क
प्लान ऑपरेशन या डिलीवरी में कैशलेस मेडिक्लेम पाने के लिए आपको अपनी इन्श्योरेंस कंपनी को 48 घंटे पहले सूचना देनी होगी। इन्श्योरेंस कंपनी आपके डॉक्युमेंट्स का रिव्यू करेगी और फिर प्री-ऑथराइजेशन फॉर्म देगी।  इस फॉर्म में होने वाले इलाज से संबंधित सारी जानकारियां होंगी। यह फॉर्म लेने के लिए अस्पताल आपसे ज्यादा पैसा भी चार्ज नहीं करता है, क्योंकि पहले से सारे खर्चो पर इन्श्योरेंस कंपनी की निगाह रहती है।
 
इन्श्योरेंस कंपनी अस्पताल को चौबीस घंटे के अंदर ऑथराइजेशन लेटर भेजेगी। अगर इलाज के दौरान किसी परेशानी की वजह से खर्च बढ़ता है तो वह भी आपको इन्श्योरेंस कंपनी को पहले से बताना होगा।
 
प्राइवेट रूम रेंट पर रखें नजर
 
अस्पताल में इलाज के दौरान अगर आप जनरल वार्ड की बजाए प्राइवेट रूम लेते हैं तो पॉलिसी पर एक बार रूम के लिए मिलने वाले पैसे पर भी नजर डाल लें। अक्सर देखने को मिलता है कि प्राइवेट रूम लेने के बाद डिस्चार्ज के वक्त जब बिल आता है तो इन्श्योरेंस कंपनी क्लेम प्रोसेस करने से मना कर सकती है। क्योंकि कई बार रूम का किराया तय सीमा से ज्यादा होता है और आपको अपनी जेब से पूरा पैसा भरना पड़ सकता है।
 
इससे बचने के लिए पहले से आप इस बारे में इन्श्योरेंस कंपनी और अस्पताल से जानकारी ले लें। बेहतर यह होगा कि आप कंपनी से विभिन्न मदों में मिलने वाली राशि की अधिकतम सीमा के बारे में पता कर लें, जिससे आगे आपको किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े।
 
रिइम्बर्समेंट क्लेम लेने में आती हैं दिक्कतें
 
मेडिक्लेम पॉलिसी में अगर आप रिइम्बर्समेंट तरीका लेते हैं तो आपको अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद मिलने वाले सभी डॉक्युमेंट्स को संभालकर रखना होगा। इसमें आप पहले बिल भरते हैं और कंपनी से बाद में क्लेम लेते हैं। इसमें आपको अस्पताल से डिस्चार्ज होने के पंद्रह दिन के अंदर अपने डॉक्युमेंट्स देने होंगे। इसके बाद कंपनी द्वारा पैसा मिलने में आपको एक महीने का समय लग जाता है।
अगर आपने इन्श्योरेंस कंपनियों द्वारा दी गई लिस्ट के अस्पताल में इलाज नहीं करवाया है तो आपको ज्यादा डॉक्युमेंट्स देने होंगे। यह प्रक्रिया छोटे अस्पताल अथवा नर्सिंग होम में इलाज कराने पर करनी होती है।
 
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