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हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस र्पो‍टेबिलिटी का दबाव, बेहतर हुई बीमा कंपनियों की सर्विस

बीमा कंपनियों पर हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस पोर्टेबिलिटी का असर साफ दिख रहा है।

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नई दिल्‍ली। बीमा कंपनियों पर हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस पोर्टेबिलिटी का असर साफ दिख रहा है। पॉलिसी होल्‍डर के पास पोर्टेबिलिटी का ऑप्‍शन होने से बीमा कंपनियों ने अपनी सेवाओं को बेहतर बनाया है जिससे उनका कस्‍टमर किसी दूसरी बीमा कंपनी के पास अपनी पॉलिसी पोर्ट न करा ले। इसका फायदा कस्‍टमर को भी हुआ है। इससे लोगों को आसानी से क्‍लेम भी मिल रहा है। 

 

कस्‍टमर के बेनेफिट के लिए लाई गई पोर्टेबिलिटी 

 

सरकारी क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनी ओरिएंटल इन्‍श्‍योरेंस कंपनी लिमिटेड के रिटायर्ड डीजीएम एनके सिंह ने बताया कि हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस सेगमेंट में हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस पोर्टेबिलिटी इसलिए लाई गई थी कि कोई पॉलिसी होल्‍डर अगर अपनी बीमा कंपनी की सेवाओं या बीमा पॉलिसी से संतुष्‍ट नहीं है तो वह दूसरी बीमा कंपनी के पास अपनी पॉलिसी को पोर्ट करा ले। इससे उसके पहले के बेनेफिट भी जारी रहते हैं और वह दूसरी बीमा कंपनी के लिए नया पॉलिसी होल्‍डर भी नहीं होता है। जबकि पहले यह ऑप्‍शन न होने पर अगर कोई पॉलिसी होल्‍डर अपनी मौजूदा कंपनी को छोड़ कर दूसरी बीमा कंपनी से बीमा पॉलिसी लेता था तो उसे पुरानी पॉलिसी का बेनेफिट और बोनस नहीं मिलता था। बीमा कंपनी कहती थी आप मेरे लिए फ्रेस इन्‍श्‍योरेंस होल्‍डर है। ऐसे में कस्‍टमर को कई बीमारियों के क्‍लेम के लिए कुछ साल तक इंतजार करना पड़ता था जिसे वेटिंग पीरिएड कहते हैं। लेकिन पोर्टेबिलिटी के ऑप्‍शन का यूज कर अगर कोई पॉलिसी होल्‍डर दूसरी बीमा कंपनी के पास जाता है तो उसे अब क्‍लेम के लिए इंतजार नहीं करना होता है। 

 

बढ़ी है सर्विस की क्‍वालिटी 

 

एनके सिंह का कहना है कि टेक्‍नोलॉजी आने और कंपटीशन की वजह से हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस कंपनियों ने अपनी सेवाओं की क्‍वालिटी को बेहतर बनाया है। प्राइवेट सेक्‍टर की कई बीमा कंपनियों ने इनहाउस थर्ड पार्टी सर्विस शुरू की है जिससे पॉलिसी होल्‍डर को कम समय में क्‍लेम मिल रहा है। इसके अलावा सरकारी बीमा कंपनियों ने भी अपनी टीपीए कंपनी बना ली है। इसके अलावा बीमा कंपनियां हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस कवर में कस्‍टमर की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए बदलाव कर रहे हैं जिससे वे काफी हद तक उसकी जरूरतों को पूरा कर पा रहे हैं। इसकी वजह से हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस पोर्टेबिलिटी का ऑप्‍शन यूज करने वालों की संख्‍या कम हुई है।  

 

आगे पढें- कब पोर्ट करानी चाहिए हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस पॉलिसी 

 

 

कब पोर्ट करानी चाहिए पॉलिसी 
 

आपके लिए यह फैसला करना मुश्किल हो सकता है कि आपको कब अब हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस पॉलिसी मौजूदा बीमा कंपनी से दूसरी बीमा कंपनी के पास पोर्ट या ट्रांसफर करानी चाहिए। लेकिन अगर आप कुछ बातों पर गौर करें तो यह फैसला आपके लिए आसान हो सकता है। 

 

खराब सर्विस 
 

अगर आपकी बीमा कंपनी उस क्‍वालिटी की सर्विस नहीं मुहैया कराती है जो उसने वादा किया है तो पॉलिसी को पोर्ट कराने का फैसला कर सकते हैं। कई मामलों में देखा जाता है कि कंपनियां गुणवत्‍ता पूर्ण सर्विस नहीं दे पाती हैं। ऐसे में आपके लिए उस कंपनी के पास बने रहने का कोई मतलब नहीं है जब आपके पास पोर्ट कराने का ऑप्‍शन है। 

 

एडिशनल कवर 
 

आपकी मौजूदा बीमा कंपनी किसी खास हेल्‍थ प्रॉब्‍लम के लिए कवर मुहैया नहीं कराती है जिसकी आपको जरूरत है तो भी आपके यह सही समय है जब आप दूसरी बीमा कंपनी के पास जाने पर विचार कर सकते हैं जो आपकी खास जरूरतों के लिए कवर मुहैया कराती हो। 

 

क्‍लेम सेटेलमेंट में समय लगना
 

अगर आपकी बीमा कंपनी क्‍लेम सेटल करने में ज्‍यादा समय लगाती है तो भी आपके लिए बेहतर है कि आप किसी और बीमा कंपनी के पास अपनी पॉलिसी पोर्ट कराएं जिसका क्‍लेम सेटेलमेंट कम समय में करने का ट्रैक रिकॉर्ड हो। आजकल कई कंपनियां इन हाउस टीपीए सेवा देती हैं जिससे क्‍लेम सेटेलमेंट प्रॉसेस बहुत तेज होता है। 

 

कम प्रीमियम में बे‍हतर ऑफर 
 

अगर आप अपनी हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस पॉलिसी के तहत उन सेवाओं के लिए ज्‍यादा प्रीमियम चुका रहे हैं जो दूसरी बीमा कंपनी में कम प्रीमियम में मिल रही है तो भी आपके लिए बेहतर है कि आप ऐसी कंपनी के पास अपनी हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस पॉलिसी ट्रांसफर करा लें तो कम प्रीमियम में वहीं सेवाएं दे रही है। 

 

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