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ले रहे हैं क्रिटिकल इलनेस कवर, 5 बातों का रखें ध्‍यान

गंभीर बीमारी के इलाज के अलावा दूसरी जरूरतें भी होती हैं कवर...

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नई दिल्‍ली. आजकल की टेंशन भरी और भागदौड़ वाली जिंदगी में बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते लोग हेल्‍थ इंश्‍योरेंस कराते हैं लेकिन कई बीमारियां ऐसी भी होती हैं, जिनके मोटे खर्चे का बोझ आम हेल्‍थ इंश्‍योरेंस नहीं उठा पाता। ऐसे में काम आता है क्रिटिकल इलनेस कवर। इस कवर के तहत कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने पर कम पैसे में 15 से 20 लाख रुपए तक का कवर मि‍ल जाता है। अगर आप भी क्रिटिकल इलनेस कवर लेने की सोच रहे हैं तो कुछ बातों को जान लेना बेहद जरूरी है- 

 

आखिर क्‍या है यह कवर

- इस कवर के तहत आपको या आपके परिवार को गंभीर बीमारी होने पर बीमा कंपनी एक तय राशि का भुगतान करती है। इससे बीमारी का इलाज कराने के अलावा दूसरी जरूरतें भी पूरी की जा सकती हैं। बीमित व्यक्ति को इस इंश्‍योरेंस का फायदा सिर्फ अस्पताल में भर्ती होने पर ही नहीं, बल्कि भर्ती होने से पहले और बाद के खर्च में भी मिलता है।
- बीमा नियामक इरडा के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, क्रि‍टि‍कल इलनेस इंश्‍योंरेंस में कम से कम 12 गंभीर बीमारियों का कवर करना जरूरी है। आम तौर पर क्रिटिकल इलनेस प्‍लान में दिल की बीमारी, मल्‍टीपल सिरोसिस, स्‍ट्रोक, कैंसर, मेजर ऑर्गन ट्रांसप्‍लांट, किडनी फेल्‍योर, बाईपास सर्जरी और पैरालिसिस जैसी बीमारियां कवर होती हैं। कुछ बीमा कंपनियों के क्रिटिकल इलनेस प्‍लान में इससे ज्‍यादा बीमारियां भी कवर हो सकती हैं। 

 

दो तरह से ले सकते हैं यह इंश्‍योरेंस

क्रिटिकल इलनेस कवर को आप दो तरह से ले सकते हैं। पहला एकल इंश्‍योरेंस के तौर पर यानी इसके अलावा आपके पास कोई और इंश्‍योरेंस न हो। दूसरा किसी अन्‍य पॉलिसी होने के बावजूद एडिशनल बेनिफिट या राइडर पॉलिसी के तौर पर। जब आप एकल आधार पर क्रिटिकल इलनेस कवर लेते हैं तो इस इंश्‍योरेंस की कोई अधिकतम सीमा नहीं होती, वहीं राइडर के तौर पर इसकी लिमिट बेस पॉलिसी के कवर के तहत ही रहती है। 

 

पहले से है बीमारी, उनको भी मि‍लता है कवर 

कुछ बीमा कंपनियां ऐसी भी हैं, जो पहले से मौजूद बीमारियां भी कवर करती हैं। ऐसे में पॉलिसी लेते समय ध्यान रखें कि यह सुविधा आपकी पॉलिसी में है या नहीं। 

 

क्‍लेम के लिए नहीं होती हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत

इंश्‍योरेंस लेने वाले को क्रिटिकल इलनेस कवर का फायदा तभी मिलता है, जब उसे पॉलिसी के तहत आने वाली कोई गंभीर बीमारी हुई हो। क्रिटिकल इलनेस कवर के तहत क्‍लेम लेने के लिए किसी भी तरह के बिल या रसीद या हॉस्पिटल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती।

 

आगे पढ़ें- फ्लोटर पॉलिसी पूरे परिवार के लिए रहेगी अच्‍छी 

 

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फ्लोटर पॉलिसी लेना ज्‍यादा फायदेमंद  

अगर अपने साथ अपने परिवार को भी इस कवर का फायदा दिलाना चाहते हैं तो फ्लोटर पॉलिसी लेना बेहतर रहेगा। यह पॉलिसी पूरे परिवार के लिए होती है। इसके तहत बीमित व्यक्ति, पत्‍‌नी और दो बच्चों की क्रिटिकल बीमारियों को कवर किया जाता है। 

 

आगे पढ़ें- कुछ पॉलिसी में होता है वेटिंग पीरियड 

देख लें वेटिंग पीरियड वाली तो नहीं है पॉलिसी

कुछ क्रिटिकल इलनेस कवर में एक निश्चित वेटिंग पीरियड होता है। इसका अर्थ है कि अगर कोई गंभीर बीमारी इस वेटिंग पीरियड में सामने आती है तो वह बीमारी आपके कवर के तहत नहीं आएगी। ऐसी पॉलिसीज में वेटिंग पीरियड खत्‍म होने के बाद सामने आने वाली गंभीर बीमारियों का इलाज ही कवर होता है। 

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