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    टेक्सटाइल पैकेज के दावों से सहमत नहीं कारोबारी, FDI पर करना होगा फोकस

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के राहत पैकेज के साथ सरकार के 3.5 करोड़ नौकरी के दावों पर कारोबारी सवाल उठा रहे हैं। कारोबारी और एसोसिएशन के मुताबिक सरकार के दावें वास्तविक नहीं लगते। सरकार को नौकरी के इन आंकड़ों को पाने के लिए एफडीआई पर निर्भर करना होगा। साथ ही सरकार को नौकरियों के नए मौकों को बनाने के लिए टैक्सटाइल चेन तक को इंसेंटिव देने होंगे।
     
    सरकार के दावों को बताया चुनौतीपूर्ण  
     
    फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के डायरेक्टर जनरल और सीईओ अजय सहाय ने कहा टेक्सटाइल सेक्टर में सरकार के नौकरी के टारगेट चुनौतीपूर्ण हैं। अभी टेक्सटाइल सेक्टर में 5 करोड़ लोग काम करते हैं। सरकार ने तीन साल में 1 करोड़ नौकरी के मौके पैदा करने का टारगेट रखा है। यानी सरकार टेक्सटाइल सेक्टर में सालाना 20 फीसदी ग्रोथ देखना चाहती है।
     
    सरकार को एफडीआई पर करना होगा फोकस
     
    सहाय ने कहा कि सरकार नौकरी के ये टारगेट पूरा करने के लिए टेक्सटाइल सेक्टर में एफडीआई बढ़ाने में मदद करनी होगी। टेक्सटाइल सेक्टर को तकनीकी को बेहतर करना होगा ताकि लागत कम हो सके। अभी चीन टेक्सटाइल के ऑर्डर वियतनाम, कंबोडिया जैसे देशों को दे रहा है। वह भारत को केवल बीविंग के ऑर्डर देता है। सरकार के छूट और लागत कम करने में मदद करनी होगी ताकि ये ऑर्डर भारत को मिलें।
     
    टेक्सटाइल चेन को करना होगा बेहतर
     
    कन्फेडेरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री के सेक्रेटरी जनरल बिनॉय जॉब ने कहा कि सरकार को तमाम राहत पैकेज की घोषणा टेक्सटाइल सेक्टर की चेन को भी देना होगा। यदि सरकार सही में नौकरी के मौके बढ़ाना चाहती है तो सरकार को फाइबर, यार्न, कॉटन से जुड़े कारोबारियों को भी छूट देनी होगी। साथ में इनको भी तकनीकी मदद करनी पड़ेगी।
     
    रॉ मैटेरियल इंडिया का लेकिन मेड इन बांग्लादेश
     
    बीते काफी समय से टेक्सटाइल सेक्टर बुरे दौर से गुजर रहा है। नागपुर गारमेंट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट राहुल मेहता ने बताया कि विदेशी कंपनियां इंडिया से फैबरिक खरीदकर बांग्लादेश, वियतनाम जैसे देशों के मैन्युफैक्चरों के पास भेजते हैं। वहां से फिनिस्ड प्रोडक्ट इंडिया सप्लाई कर देते हैं। इसका नुकसान घरेलु मैन्युफैक्चरों को होता है।
     
    दावों से सहमत नहीं एसोसिएशन
    मेहता ने कहा कि सरकार को भी फॉरेन ट्रेड पॉलिसी और ड्युटी को कम करनी चाहिए थी ताकि ये कारोबार घरेलू टेक्सटाइल को मिले। मेहता ने कहा कि सरकार ने इस दिशा में कोई भी घोषणा नहीं की है। इसलिए सरकार के नौकरी के दावों से एसोसिएशन सहमत नहीं है।
     
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