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लाल किले पर मोदी ने फहराया यहां का बना झंडा, महिलाओं की है अहम भूमिका

नई दिल्‍ली. पूरे देश में 71वें स्‍वतंत्रता दिवस का जश्‍न मनाया जा रहा है। 15 अगस्‍त को एक बार फिर दिल्‍ली के लाल किले पर प्रधानमंत्री राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराएंगे। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि देश के लाल किले, राष्‍ट्रपति भवन, संसद भवन, हर सरकारी बिल्डिंग पर, हमारी सेना द्वारा फ्लैग होस्टिंग के वक्‍त यहां तक कि विदेशों में मौजूद इंडियन एंबेसीज में फहराए जाने वाले झंडे कहां बनते हैं? वे कौन से हाथ हैं, जो देश की आन, बान, शान कहे जाने वाले तिरंगे को बनाते हैं?   अगली स्‍लाइड में- देश में इस जगह बनता है हमारा तिरंगा 

money bhaskar

Aug 15,2017 12:16:00 PM IST
नई दिल्‍ली. . पूरे देश में 71वें स्‍वतंत्रता दिवस का जश्‍न मनाया जा रहा है। 15 अगस्‍त को एक बार फिर दिल्‍ली के लाल किले पर प्रधानमंत्री राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि देश के लाल किले, राष्‍ट्रपति भवन, संसद भवन, हर सरकारी बिल्डिंग पर, हमारी सेना द्वारा फ्लैग होस्टिंग के वक्‍त यहां तक कि विदेशों में मौजूद इंडियन एंबेसीज में फहराए जाने वाले झंडे कहां बनते हैं? वे कौन से हाथ हैं, जो देश की आन, बान, शान कहे जाने वाले तिरंगे को बनाते हैं?
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कर्नाटक खादी ग्रामोद्वोग संयुक्त संघ (फेडरेशन) - KKGSS (फेडरेशन) के सेक्रेटरी शिवानंद ने मनी भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि KKGSS खादी व विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन द्वारा सर्टिफाइड देश की अकेली ऑथराइज्ड नेशनल फ्लैग मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट है। - यह कर्नाटक के हुबली शहर के बेंगेरी इलाके में स्थित है और इसे हुबली यूनिट भी कहा जाता है। -vKKGSS की स्थापना नवंबर 1957 में हुई थी और इसने 1982 से खादी बनाना शुरू किया। - 2005-06 में इसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) से सर्टिफिकेशन मिला और इसने राष्ट्रीय ध्वज बनाना शुरू किया। - देश में जहां कहीं भी आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय ध्वज इस्तेमाल होता है, यहीं के बने झंडे की होती है सप्लाई - विदेशों में मौजूद इंडियन एंबेसीज के लिए भी यहीं बनाए जाते हैं झंडे - इसके अलावा ऑर्डर व कुरियर के जरिए कोई भी कर सकता है खरीद आगे पढ़ें- धागा व कपड़ा बनाने के लिए अलग यूनिटेंयहां बनता है तिरंगे के लिए धागा और कपड़ा - KKGSS की बागलकोट यूनिट में हाई क्वालिटी के कच्चे कॉटन से बनाया जाता है धागा - गाडनकेरी, बेलॉरू, तुलसीगिरी में कपड़ा होता है तैयार, फिर हुबली यूनिट में होती है डाई व बाकी की प्रॉसेस - जीन्स से भी ज्यादा मजबूत होता है कपड़ा - केवल कॉटन और खादी के बनते हैं झंडे - हाथ से मशीनों व चरखे के जरिए बनाया जाता है धागा आगे पढ़ें- टेबल से लेकर राष्ट्रपति भवन तक के झंडेटेबल से लेकर राष्ट्रपति भवन तक के लिए नौ साइज के झंडे 1- सबसे छोटा 6:4 इंच- मीटिंग व कॉन्फ्रेंस आदि में टेबल पर रखा जाने वाला झंडा 2- 9:6 इंच- वीवीआईपी कारों के लिए 3- 18:12 इंच- राष्ट्रपति के वीवीआईपी एयरक्राफ्ट और ट्रेन के लिए 4- 3:2 फुट- कमरों में क्रॉस बार पर दिखने वाले झंडे 5- 5.5:3 फुट- बहुत छोटी पब्लिक बिल्डिंग्स पर लगने वाले झंडे 6- 6:4 फुट- मृत सैनिकों के शवों और छोटी सरकारी बिल्डिंग्स के लिए 7- 9:6 फुट- संसद भवन और मीडियम साइज सरकारी बिल्डिंग्स के लिए 8- 12:8 फुट- गन कैरिएज, लाल किले, राष्ट्रपति भवन के लिए 9- सबसे बड़ा 21:14 फुट- बहुत बड़ी बिल्डिंग्स के लिए अगली स्लाइड में- आसान नहीं है देश का राष्ट्रीय ध्वज बनानाBIS करता है क्वालिटी चेक, डिफेक्ट होने पर कर देता है रिजेक्ट - हर सेक्शन पर कुल 18 बार होता है क्वालिटी चेक, 10 फीसदी हो जाते हैं रिजेक्ट - KVIC और BIS द्वारा निर्धारित रंग के शेड से अलग नहीं होना चाहिए रंग - केसरिया, सफेद और हरे कपड़े की लंबाई-चौड़ाई में नहीं होना चाहिए जरा सा भी अंतर - अगले-पिछले भाग पर अशोक चक्र की छपाई होनी चाहिए समान - फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 के प्रावधानों के मुताबिक, झंडे की मैन्यूफैक्चरिंग में रंग, साइज या धागे को लेकर किसी भी तरह का डिफेक्ट एक गंभीर अपराध है और ऐसा होने पर जुर्माना या जेल या दोनों हो सकते हैं। - इतने चरणों में बनता है राष्ट्रीय ध्वज- धागा बनाना, कपड़े की बुनाई, ब्लीचिंग व डाइंग, चक्र की छपाई, तीनों पटिृयों की सिलाई, आयरन करना और टॉगलिंग (गुल्ली बांधना) - जापान की 30 मशीनों का हो रहा है इस्तेमाल अगली स्लाइड में- कितने लोगों की है मेहनतकितने लोग करते हैं काम - धागा बनाने से लेकर झंडे की पैंकिंग तक में 250 लोग करते हैं काम - मात्र 10-20 पुरुष, बाकी है महिलाएं - 8-10 घंटे तक होता है काम - हुबली यूनिट के वर्कर्स की डेली इनकम है मात्र 350 रुपए रोजाना तक - वहीं बागलकोट खादी वीविंग सेंटर की महिलाओं की डेली इनकम है मात्र 100 रुपए तक आगे- सालाना कितने रुपए के बन जाते हैं झंडेझंडों से हर साल कितनी होती है कमाई - शिवानंद के मुताबिक, 2016-17 में 2.5 करोड़ रुपए के झंडे बेचे गए - झंडों की संख्या होती है लगभग 20,000 झंडे सालाना, स्वतंत्रता दिवस के आस-पास बढ़ जाती है डिमांड - सुप्रीम कोर्ट द्वारा हर किसी को झंडे लगाने की अनुमति मिलने के बाद बढ़ गई है डिमांड आगे- झंडों के अलावा और क्या बनाता है KKGSSअन्य उत्पाद भी बनाता है KKGSS - KKGSS का प्रमुख उत्पाद राष्ट्रीय ध्वज है। - इसके अलावा KKGSS खादी के कपड़े, खादी कारपेट, खादी बैग्स, खादी कैप्स, खादी बेडशीट्स, साबुन, हाथ से बना कागज और प्रोसेस्ड शहद भी बनाता है।
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