Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

    Home »Industry »Textile» Textile Sector Data Decreases Because Of Brexit & Production Cost

    टेक्सटाइल को नहीं मिला एक्सपोर्ट में सुधार का फायदा, ब्रेग्जिट और बढ़ती कॉस्ट का असर

    नई दिल्ली। इंडिया के एक्सपोर्ट आंकड़ें भले ही हरे निशान पर आ गए हों लेकिन टेक्सटाइल सेक्टर में गिरावट अभी भी जारी है। पिछले साल का बेस कम होने के बावजूद कैलेंडर ईयर 2016 में टेक्सटाइल एक्सपोर्ट ने 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की है। ग्लोबल डिमांड में स्लोडाउन, बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट, नोटबैन, ब्रेग्‍जि‍ट और इंटरनेशनल मार्केट के कंपिटिटव नहीं रह पाने के कारण इंडियन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट लगातर गिर रहा है। सरकारी पैकेज से टेक्सटाइल सेक्टर के आकंड़ों को सुधारने में मदद नहीं मिल रही है।
     
    सरकारी पैकेज से भी नहीं मिली मदद
     
    सितंबर 2016 में केंद्र सरकार टेक्सटाइल सेक्टर को बूस्ट करने के लिए 6,000 करोड़ रुपए का पैकज दिया था। इस पैकेज का मकसद सालाना टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना और एक लाख नई नौकरियां पैदा करना था। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (सीआईटीआई) के एक्स सेक्रेटरी जनरल बिजॉय जॉब ने moneybhaskar.com को बताया कि टेक्सटाइल सेक्टर में प्रोडक्शन कॉस्ट के साथ लेबर कॉस्ट 25 से 30 फीसदी बढ़ी है। टेक्सटाइल सेक्टर में लेबर कॉस्ट एक बड़ी लागत होती है। बीते साल में सरकार ने जितने भी बेनेफिट्स दिए कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन बढ़ने के कारण उनका फायदा नहीं मिल रहा है।
     
    टेक्सटाइल सेक्टर में रही गिरावट
     
    टेक्सटाइल मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक कैलेंड़र ईयर 2016 में टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2015 में टेक्सटाइल एक्सपोर्ट 36.7 बिलियन डॉलर था, जबकि 2016 में 34.9 बिलियन डॉलर रहा।
     
    विदेशी मार्केट में नहीं मिल रहा है अच्छा प्राइस
     
    डॉलर के मुकाबले युआन 9 फीसदी कमजोर हुआ है जबकि रुपया 5 फीसदी महंगा हुआ है। फियो के ईडी अजय सहाय ने बताया कि एक्सपोर्टर्स की इनपुट कॉस्ट बढ़ी है लेकिन विदेशी बायर ऑर्डर की अच्छी कीमत नहीं दे रहे हैं। मौजूदा कॉस्ट पर एक्सपोर्ट करना महंगा हो रहा है।
     
    ऑर्डर की संख्या रही कम
     
    ब्रेग्‍जि‍ट और इंटरनेशनल मार्केट में स्लोडाउन का असर नजर आ रहा है। अपैरेल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (एईपीसी) के चेयरमैन एच के एल मग्गू ने moneybhaskar.com को बताया कि यूरोप से आने वाले ऑर्डर में ब्रेग्‍जि‍ट का असर साफ नजर आ रहा है। 60 से 70 फीसदी एक्सपोर्टर को साल 2017-18 के लिए ऑर्डर नहीं मिले हैं। जिन्हें ऑर्डर मिले हैं उनके एक्सपोर्ट ऑर्डर में बीते साल की तुलना में कोई ग्रोथ नहीं है। ऑर्डर कम रहने के कारण एक्सपोर्टर कर्मचारियों की छंटनी कर रहे हैं।
     
    पड़ोसी देशों से मिल रहा है कॉम्पिटीशन
     
    नागपुर गारमेंट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट राहुल मेहता ने  moneybhaskar.com  को बताया कि विदेशी ब्रांड इंडिया से फैब्रिक खरीदकर  बांग्लादेश,  वियतनाम जैसे देशों के मैन्युफैक्चरर्स को फिनिश्ड प्रोजक्ट के लिए भेजते हैं। बांग्लादेश का  फेवरेबल ड्यूटी स्ट्रक्चर है, वहां रॉ मैटेरियल के इंपोर्ट पर जीरो फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी है। बांग्लादेश, वियतनाम के यूरोपियन यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। यानी यदि भारत से रॉ-मेटेरियल बांग्लादेश इंपोर्ट होता है, तो उस पर कोई ड्यूटी नहीं लगती। बांग्लादेश में लेबर कॉस्ट भारत के मुकाबले आधी है।
     
    अगली स्लाइड में जानें - बांग्लादेश क्यूं बन रहा है फेवरिट
     
     

    और देखने के लिए नीचे की स्लाइड क्लिक करें

    Recommendation

      Don't Miss

      NEXT STORY