8 हजार रुपए की रीलिंग मशीन से हर महीने महिलाएं कमा सकेंगी 10,500 रुपए तक, मिलेगी कठिन श्रम से राहत

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Surging Silk - Accomplishment and way forward: इस कार्यक्रम के तहत जनजातीय क्षेत्रों की महिलाओं को 'बुनियाद तसर रेशम रीलिंग' मशीनें वितरित की जाएंगी। इससे महिलाएं प्रतिदिन 350 रुपए तक और महीने के 10,500 रुपए तक कमा सकेंगीं। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज होंगी और अध्यक्षता केंद्रीय वस्त्र मंत्री स्मृति जुबिन इरानी करेंगी।

Money Bhaskar

Feb 09,2019 12:06:00 AM IST

नई दिल्ली.

केंद्रीय रेशम बोर्ड के सहयोग से वस्त्र मंत्रालय आज यानी 9 फरवरी को नई दिल्ली में ‘Surging Silk - Accomplishment and way forward’ कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। इस कार्यक्रम के तहत जनजातीय क्षेत्रों की महिलाओं को 'बुनियाद तसर रेशम रीलिंग' मशीनें वितरित की जाएंगी। इससे महिलाएं प्रतिदिन 350 रुपए तक और महीने के 10,500 रुपए तक कमा सकेंगीं। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज होंगी और अध्यक्षता केंद्रीय वस्त्र मंत्री स्मृति जुबिन इरानी करेंगी। कार्यक्रम में पिछले 4 वर्षों के दौरान भारत में रेशम उद्योग के विकास को मुख्य रूप से दिखाया जाएगा। इसमें वस्त्र क्षेत्र के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

महिलाओं को मिलेगी कठिन श्रम से राहत

केंद्रीय रेशम प्रौद्योगिकी शोध संस्थान ने थाई रिलिंग की वर्षों पुरानी व्यवस्था को समाप्त करने के लिए इस मशीन को विकसित किया है। इसके साथ ही संस्थान का उद्देश्य यह भी है कि ग्रामीण व जनजातीय महिलाओं को अपनी कमाई बढ़ाने का साधन मुहैया कराया जाए। इस मशीन को बनाने में छत्तीसगढ के चंपा के एक उद्यमी ने सहयोग दिया है। इस विकसित मशीन का नाम बुनियाद रीलिंग मशीन है। यह मशीन तसर सिल्क की गुणवत्ता और उत्पादकता को बेहतर बनाएगी तथा महिलाओं के कठिन श्रम में राहत प्रदान करेगी।

बढ़ेगी महिलाओं की आय

पारंपरिक तरीके का उपयोग करते हुए धागा तैयार करने वाली एक महिला एक दिन में 125 रुपए कमाती है जबकि बुनियाद रीलिंग मशीन से वह 350 रुपए प्रति दिन कमा सकती है। बुनियाद रीलिंग मशीन की कीमत 8,475 रुपए प्रति इकाई है। मार्च, 2019 तक थाई रिलिंग की प्रथा को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मशीन, सौर ऊर्जा तथा पैर से चलने वाले उपकरणों के साथ उपलब्ध है। मशीन उत्पादन के लिए निर्माताओं और इनके वितरण के लिए धागा तैयार करने वालों की पहचान कर ली गई है।

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