Home » Industry » TextileKnow about chanderi saree business of small town Chanderi

300 करोड़ तक का बिजनेस करता है छोटा सा कस्बा चंदेरी, दुनियाभर में हो रहा फेमस

भारत का छोटा सा कस्बा लेकिन दुनिया भर में फेमस, कुछ ऐसी पहचान चंदेरी की है।

1 of

नई दिल्‍ली. भारत का छोटा सा कस्बा लेकिन दुनिया भर में फेमस, कुछ ऐसी पहचान है चंदेरी की। मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में बसा है चंदेरी। जहां पर मुगलों के काल से चली आ रही एक आर्ट दुनिया भर में फेमस हो रही है। इस आर्ट का नाम भी चंदेरी ही है। इस आर्ट का सबसे पॉपुलर प्रॉडक्‍ट है चंदेरी की साड़ी, जो इस समय 2 लाख रुपए तक में बिकती है। 

 

चंदेरी की पूरी दुनिया में पहचान बनाए रखने में आज भी 100 से ज्यादा मैन्युफैक्चरर और करीब 5 हजार बुनकर लगे हुए है। कई मैन्‍युफैक्‍चरर्स का सालाना कारोबार 1 से 2 करोड़ रुपए के बीच में है। पूरे चंदेरी की बात करें तो यहां से लगभग 300 करोड़ रुपए तक का कारोबार सालाना हो रहा है। चंदेरी का बिजनेसमैन अब मार्डन रिटेल का सहारा ले रहा है, जिसके जरिए वह जापान, अमेरिका, यूरोप के देशों में चंदेरी प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट कर रहे हैं। 

 

पूरी तरह हैंडमेड 

चंदेरी शहर के मोटामल हैंडलूम्‍स के मालिक मुशीर अहमद अंसारी मोटामल ने moneybhaskar.com को बताया कि चंदेरी साड़ी पूरी तरह हैंडमेड होती है। इसे बनाने में पावरलूम यानी मशीनों का इस्‍तेमाल नहीं होता है। सालों पहले ट्रांसपेरेंट कॉटन या मलमल की साड़ी बनाई जाती थी। यह ट्रेंड आज भी बरकरार है लेकिन अब सिल्‍क की चंदेरी साड़ी भी बनाई जाती है। आज भी इसके फैब्रिक का स्‍टैंडर्ड वही है, जो सालों पहले था। अभी यह साड़ी प्‍योर सिल्‍क, प्‍योर कॉटन और कॉटन प्‍लस सिल्‍क फैब्रिक में बनती है। पुराने समय में चंदेरी साड़ी के लिए धागे भी चंदेरी शहर में ही बनाए जाते थे। साड़ी मैन्‍युफैक्‍चरर खास तरह के कपास से इन्‍हें बनाते थे। लेकिन बाद में रेडिमेड धागों की सहूलियत हो जाने के बाद अब केवल प्रॉडक्‍ट ही बनते हैं। 


प्‍योर गोल्ड और सिल्‍वर जरी, कीमत 2 लाख तक 

मुशीर के मुताबिक, 40-50 साल पहले चंदेरी साड़ी में प्‍योर गोल्‍ड और सिल्‍वर जरी का इस्‍तेमाल होता था। लेकिन बाद में लागत महंगी पड़ने के कारण मिक्‍स जरी का इस्‍तेमाल होने लगा। अभी भी प्‍योर गोल्ड और सिल्‍वर जरी वाली साड़ी बनाई जाती हैं लेकिन इन्‍हें केवल ऑर्डर पर ही बनाया जाता है। कीमत की बात करें तो चंदेरी साड़ी की शुरुआती कीमत 1500 रुपए है। डिजाइन हैवी होने के साथ-साथ कीमत भी बढ़ती जाती है और प्‍योर गोल्‍ड और सिल्‍वर जरी वाली साड़ी की कीमत 2 लाख रुपए तक जाती है। आम तौर पर एक चंदेरी साड़ी को बनाने में 2 हफ्ते लगते हैं। 


कैसे हुई शुरुआत 

माना जाता है कि चंदेरी प्रॉडक्‍ट्स का इतिहास मुगलकाल से है। कहा जाता है कि उस समय के सूफी संतों के साथ आने वाले शागिर्द इस आर्ट में पारंगत थे। अपने किसी दौरे के बीच वे लोग चंदेरी में रुके और यहां इस विरासत की शुरुआत की। बाद में राजा-महाराजाओं के लिए साफे, पट्टे आदि बनाए जाने लगे। चंदेरी शहर में कई बुनकर और मैन्‍युफैक्‍चरर ऐसे हैं, जो इस साड़ी को बनाने का काम पीढियों से करते आ रहे हैं। मुशीर ने बताया कि उनका परिवार 8-10 पीढियों से यह विरासत संभाल रहा है। कई मैन्‍युफैक्‍चरर ऐसे भी हैं, जो पिछले 50 सालों से ही इस बिजनेस में हैं। 

 

चंदेरी शहर ही है मेन ओरिजिन 

वैसे तो चंदेरी साड़ी देश के कई हिस्‍सों में बनाई जाने लगी है लेकिन इसका मेन ओरिजिन चंदेरी शहर ही है। आज भी ओरिजिनल चंदेरी साड़ी, चंदेरी शहर की ही मानी जाती है। इसके लिए इस साड़ी को जीआई टैग भी मिला हुआ है। चंदेरी की साड़ियां महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, गुजरात, प. बंगाल और दिल्ली के बाजारों में बहुतायत में जाती हैं। इसके अलावा इनका एक्‍सपोर्ट भी होता है। बीच में यह कारीगरी केवल साड़ी तक ही सिमट कर रह गई थी लेकिन अभी यहां चंदेरी की साड़ी के साथ-साथ पर्दे, कुशन कवर, टेबल मैट आदि भी बन रहे हैं और उन्‍हें विदेश भी भेजा जा रहा है। हालांकि यह एक्‍सपोर्ट बड़े पैमाने पर नहीं है। मुश्किल से प्रॉडक्‍शन का लगभग 10-15 फीसदी ही एक्‍सपोर्ट होता है। यह एक्‍सपोर्ट भी फै‍ब इंडिया या फिर एनजीओ के माध्‍यम से ही है। 

 

आगे पढ़ें- कुछ सालों पहले क्‍या थे हालात 

 

यह भी पढ़ें- 4 लाख रु. तक में मिलती है पाटन पटोला साड़ी, 3 परिवारों ने संभाल रखी है 900 साल पुरानी धरोहर

कुछ सालों पहले आज जैसे नहीं थे हालात 

विरासत कला विकास संस्‍थान समिति के अशफाक के मुताबिक, 25 साल पहले की बात करें तो चंदेरी शहर के बुनकरों की स्थिति काफी अच्‍छी थी। पूरा परिवार ही इस काम से जुड़ा होता था, यहां तक कि लोग नौकरी के बजाय अपनी इसी विरासत को आगे बढ़ाने में दिलचस्‍पी रखते थे। लेकिन 1990 से 2000 के दशक में चंदेरी के बुनकरों और मैन्‍युफैक्‍चरर्स की हालत बहुत ज्‍यादा खराब थी। विदेश तो दूर देश के कई इलाकों में भी लोग इसे नहीं जानते थे। ऊपर से चंदेरी साड़ी की गिरती कीमतों के कारण मैन्‍युफैक्‍चरर्स का नुकसान होने लगा और इसका हर्जाना बुनकरों को भुगतना पड़ा। बुनकरों के काम में गलतियां निकालकर उनके वेतन में कटौती की जाने लगी। कई लोगों ने तो चंदेरी साड़ी के काम को छोड़ दिया था। लेकिन बाद में राज्‍य सरकार, हैंडलूम एसोसिएशंस, एनजीओ आदि के द्वारा शुरू किए गए प्रमोशन्‍स और एग्‍जीबीशंस की बदौलत इसमें फिर से जान आई। 

 

आगे पढ़ें- चंदेरी के लोगों ने कैसे की खुद की मदद

चंदेरी के लोगों ने खुद की अपनी मदद 

चंदेरी शहर के मैन्‍युफैक्‍चरर्स और बुनकरों ने भी अपनी इस विरासत को संवारने की दिशा में कदम उठाने शुरू किए। उन्होंने छोटे-छोटे स्‍वंय सहायता समूह बनाए। इसी के तहत बुनकर विकास संस्‍था का भी गठन हुआ। इसे फैब इंडिया से जोड़ा गया और इसकी चंदेरी और यहां के बुनकरों तक पहुंच विकसित की गई। इससे देश और विदेश से ऑर्डर बुनकरों को मिलने लगे और बिजनेस में तेजी आई। आज आलम यह है कि अशफाक जैसे लोग, जो कभी केवल बुनकर थे, अब अपने प्रॉडक्‍ट की बिक्री भी कर रहे हैं। 
 
आगे पढ़ें- बॉलीवुड से भी है कनेक्‍शन 

चंदेरी का बॉलीवुड कनेक्‍शन 

मध्‍य प्रदेश के इस छोटे से कस्‍बे का कनेक्‍शन बॉलीवुड से भी है। थ्री ईडियट्स मूवी के प्रमोशन के दौरान आमिर खान और करीना कपूर चंदेरी आए थे। उसके बाद से चंदेरी को बॉलीवुड में भी जाना जाने लगा और देश के बाकी हिस्‍सों में भी। बॉलीवुड सितारों के आने ने चंदेरी शहर के बुनकरों और मैन्‍युफैक्‍चरर्स को पहचान दिलाई और बिजनेस ऑर्डर की संख्‍या में बढ़ोत्‍तरी हुई। उसके बाद मध्‍य प्रदेश के लोगों ने चंदेरी साड़ी को विरासत का दर्जा दिया, साथ ही इस बिजनेस और चंदेरी शहर के प्रमोशन के लिए आगे आए। आज इसके प्रमोशन के लिए देश की अलग-अलग जगहों पर एग्‍जीबीशंस भी लगाए जाते हैं और ट्रेड फेयर जैसे प्‍लेटफॉर्म पर भी यह मौजूद है। इन माध्‍यमों से कई बड़े कस्‍टमर्स तक यहां के मैन्‍युफैक्‍चरर्स और बुनकरों की पहुंच बन रही है। इन दिनों यहां फिल्‍म की शूटिंग भी चल रही है। यह फिल्‍म अनुष्का शर्मा और वरुण धवन की ‘सुई-धागा: मेड इन इंडिया’ है। यह फिल्‍म चंदेरी के बुनकरों और उनकी जिन्‍दगी पर केन्द्रित है। 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट