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गर्मी में इस बार फ्लैट है कोटा साड़ी की डिमांड, 50 हजार रु. तक जाती है कीमत

कारोबारियों के मुताबिक बिजनेस में पिछले साल के मुकाबले न ही ग्रोथ है और न ही गिरावट।

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नई दिल्‍ली. अपने चेक्‍स के लिए जानी जाने वाली कोटा डोरिया साडियां गर्मी में कुछ ज्‍यादा ही पॉपलुर हो जाती हैं। इसकी वजह है इनका हल्‍का और पहनने में सुविधाजनक रहना। लेकिन इस साल गर्मी में भी इस साड़ी का बिजनेस फ्लैट जा रहा है। कारोबारियों के मुताबिक बिजनेस में पिछले साल के मुकाबले न ही ग्रोथ है और न ही गिरावट। इसकी एक वजह यह भी है कि कोटा साड़ी की सबसे ज्‍यादा डिमांड दक्षिण भारत से आती है और वहां इस बार मानसून वक्‍त से दस्‍तक दे चुका है। हर साल 35 करोड़ का बिजनेस करने वाले कोटा डोरिया क्‍लस्‍टर से गर्मियों में साडियों की बिक्री 25 फीसदी तक बढ़ जाती है। 

 

वारसी एंब्रॉयडरी, कोटा के ओनर रहमत वारसी ने money.bhaskar.com को बताया कि इस साल बिजनेस पिछले साल जैसा ही है। न ही ग्रोथ है और न ही गिरावट। हालांकि एक अन्‍य कारोबारी ने बताया कि ऑफलाइन नहीं लेकिन ऑनलाइन बिजनेस में ग्रोथ दर्ज की गई है। 

 

सालाना टर्नओवर 35 करोड़ रुपए 

डेवलपमेंट कमिश्‍नर एमएसएमई मंत्रालय से मिले डाटा के मुताबिक, कोटा क्‍लस्‍टर से हर साल लगभग 82,000 साडियों का प्रोडक्‍शन होता है। क्‍लस्‍टर में 1500 लूम लगी हुई हैं। इस क्‍लस्‍टर का सालाना टर्नओवर 35 करोड़ है। 

 

गर्मी के सीजन में पूरे साल के मुकाबले 25 फीसदी बढ़ जाता है बिजनेस

कोटा डोरिया की डिमांड पूरे साल रहती है लेकिन गर्मियों में इस साड़ी की बिक्री ज्‍यादा रहती है। इसकी वजह इसका हल्‍का और सुविधाजनक होना है। कारोबारियों के मुताबिक, गर्मियों में इस साड़ी की बिक्री में 25 फीसदी की तेजी आ जाती है। 

 

कैसे हुई इस क्राफ्ट की शुरुआत

कोटा डोरिया साड़ी को कोटा डोरी साड़ी भी कहा जाता है। कोटा डोरिया की शुरुआत सबसे पहले मैसूर में हुई थी। वहां इस क्राफ्ट के बुनकरों को मैसुरिया नाम से जाना जाता था। कहा जाता है कि 17वीं और 18वीं शताब्‍दी के बीच शाहजहां के शासन में मुगल सेना के जनरल राव किशोर सिंह मैसुरिया बुनकरों को कोटा ले आए। दोनों राज्‍यों की एकता के तौर पर कोटा-मैसुरिया साड़ी ईजाद हुई। आज इसका नाम कोटा डोरिया है और यह भारत के सबसे लोकप्रिय फैब्रिक्‍स में से एक है। 

 

कैथून है सबसे बड़ा और पुराना बुनाई हब

हैंडलूम वाली कोटा डोरिया साड़ी को कोटा में ही बनाई जाती है। एक कारोबारी के मुताबिक, कोटा में कोटा डोरिया के 20 मैन्‍युफैक्‍चरर हैं, जिनमें बड़े और छोटे दोनों तरह के मैन्‍युफैक्‍चरर शामिल हैं। डाटा के मुताबिक, कोटा के अलावा राजस्‍थान के बूंदी और बारन जिलों में भी कोटा डोरिया साड़ी बनाई जाती है। लेकिन इसका सबसे पुराना और बड़ा बुनाई हब कैथून है, जो कोटा से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कैथुन में लगभग 1500 बुनकर हैं। वहीं पूरे क्‍लस्‍टर में इसके 47 मास्‍टर बुनकर हैं। 

 

ब्‍लॉक हैं इस फैब्रिक की खासियत

कोटा डोरिया की खासियत ब्‍लॉक्‍स (चौकोर खाने) वाली डिजाइन है। इन्‍हें खट कहा जाता है। वारसी के मुताबिक, 100 रुपए की साड़ी से लेकर 50,000 रुपए की साड़ी में भी एक जैसे ही ब्‍लॉक्‍स रहते हैं। इसके अलावा यह साड़ी बहुत ही हल्‍की होती है। इस वजह से गर्मियों के सीजन में इसे काफी अच्‍छा और सुविधाजनक माना जाता है। 

 

कॉटन, सिल्‍क और जरी होती है इस्‍तेमाल

कोटा डोरिया साड़ी प्‍योर कॉटन, प्‍योर सिल्‍क और कॉटन प्‍लस सिल्‍क यानी मिक्‍स में बनाई जाती है। मिक्‍स में सिल्‍क की मात्रा 20 फीसदी रहती है। कॉटन फैब्रिक को मजबूती देता है, वहीं सिल्‍क से इसमें शाइन आती है। इसके अलावा इसमें गोल्‍ड और सिल्‍वर जरी का भी इस्‍तेमाल होता है। 

 

तीन वैरायटी

कोटा डोरिया साड़ी, सूट और दुपट्टे तीन वैरायटी प्‍लेन, प्रिन्‍टेड और जरी में आते हैं। प्‍लेन वैरायटी में केवल चेक होते हैं, वहीं प्रिन्‍टेड में अलग-अलग डिजाइन वाली प्रिन्‍ट होती हैं। सबसे ज्‍यादा महंगी और स्‍टाइलिश जरी वाली वैरायटी होती है। 

 

पावरलूम से भी बनती है साड़ी

इस साड़ी को पावरलूम यानी मशीन से भी बनाया जाता है। लेकिन वह साड़ी कोटा के बाहर बनाई जाती है। लेकिन हैंडलूम वाली साड़ी में पावरलूम साड़ी से ज्‍यादा डिजाइन रहती हैं और हर साड़ी की डिजाइन अलग रहती है। 

 

हैंडलूम साड़ी की कीमत 3000 से 50,000 रुपए तक

वारसी के मुताबिक, हैंडलूम वाली साड़ी की कीमत 3000 रुपए से 50,000 रुपए तक जाती है। वहीं पावरलूम से बनी साड़ी कीमत 500 रुपए से शुरू होकर अधिकतम 2000 रुपए तक रहती है। 

 

आगे पढ़ें- 10 फीसदी एक्‍सपोर्ट

टोटल प्रोडक्‍शन का 10 फीसदी एक्‍सपोर्ट 

कोटा डोरिया साड़ी एक्‍सपोर्ट भी होती है। हालांकि सीधे कोटा से ये एक्‍सपोर्ट नहीं की जाती है। दूसरे बड़े शहरों के व्‍यापारी कोटा से साड़ी खरीदकर फिर उसका एक्‍सपोर्ट करते हैं। डेवलपमेंट कमिश्‍नर एमएसएमई मंत्रालय से मिले डाटा के मुताबिक कोटा डोरिया साड़ी के टोटल प्रोडक्‍शन में से 10 फीसदी का एक्‍सपोर्ट हो जाता है। देश में हैदराबाद, विजयवाड़ा, दिल्‍ली, मुंबई, पुणे आदि जगहों पर इसकी सप्‍लाई होती है। लेकिन सबसे ज्‍यादा डिमांड दक्षिण भारत से आती है। इसके अलावा ज्‍यादा गर्मी वाले इलाकों में इसकी काफी डिमांड रहती है।  
 

साड़ी बनने में 10 दिन से लेकर 2 महीने तक का लग जाता है वक्‍त 

कोटा डोरिया डिजाइन में साड़ी के अलावा लेडीज सूट और दुपट्टे भी बनाए जाते हैं। हालांकि इसमें जेन्‍ट्स के लिए कोई गारमेंट नहीं बनते। एक कारोबारी के मुताबिक, एक साड़ी बनाने में लगभग 10 से 15 दिन लगते हैं। वहीं अगर कारीगरी ज्‍यादा हैवी हो तो 1 से लेकर 2 महीने भी लगते हैं। 
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