Home » Industry » Textileटेक्‍सटाइल के लिए 2018 रह सकता है चुनौतीपूर्ण -2018 may turn out to be a challenging year for textile and garment industry

टेक्‍सटाइल इंडस्‍ट्री के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है 2018, एक्‍सपोर्ट लक्ष्‍य पूरा नहीं होने के आसार

गारमेंट एक्‍सपोर्टर्स की मांग है कि उन्‍हें ड्यूटी ड्रॉ बैक फिर से जीएसटी से पहले वाली रेट 7.5 फीसदी से दिया जाए।

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नई दिल्‍ली. 2018 भारत की टेक्‍सटाइल और गारमेंट इंडस्‍ट्री के लिए एक चुनौतीपूर्ण साल साबित हो सकता है। इसकी वजह है कि एक्‍सपोर्ट पर अभी भी जीएसटी लागू होने का असर है और इसकी वजह से 2017-18 के लिए एक्‍सपोर्ट का 2874 अरब डॉलर का लक्ष्‍य पूरा नहीं होने की संभावना है। 

 

जीएसटी से पहला वाले ड्यूटी ड्रॉ बैक की उठ रही मांग 

गारमेंट एक्‍सपोर्टर्स की मांग है कि उन्‍हें मिलने वाला ड्यूटी ड्रॉ बैक फिर से जीएसटी से पहले वाली रेट यानी 7.5 फीसदी के हिसाब से दिया जाए। उनका कहना है कि ड्यूटी ड्रॉ बैक घटने से भी एक्‍सपोर्ट गिरा है। बता दें कि भारत का अपैरल एक्‍सपोर्ट अक्‍टूबर में वैल्‍यू के संदर्भ में 39 फीसदी गिरा है।  

 

टेक्‍सटाइल के लिए कैसा रहा 2017 

कुल मिलाकर 2017 टेक्‍सटाइल सेक्‍टर के लिए नफा-नुकसान के मोर्चे पर मिला-जुला साबित हुआ। हालांकि पावरलूम यूनिट्स और बुनकरों के लिए कदम उठाए गए लेकिन नई नेशनल टेक्‍सटाइल्‍स पॉलिसी के अभी भी लागू होने का इंतजार है। साल का अंत आते-आते टेक्‍सटाइल सेक्‍टर में स्किल डेवलपमेंट और जॉब क्रिएशन को बढ़ावा देने के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग को लेकर 1300 करोड़ रुपए की स्‍कीम को लॉन्‍च किया गया। इसके तहत टेक्‍सटाइल सेक्‍टर के विभिन्‍न सेगमेंट्स में 10 लाख लोगों को कौशल प्रदान किए जाने और सर्टिफाइड होने की उम्‍मीद है। इसमें से 1 लाख लोग ट्रेडिशन सेक्‍टरों के होंगे। 

 

देश में हुआ पहला मेगा इंटरनेशनल ट्रेड ईवेंट

इस साल देश में टेक्‍सटाइल सेक्‍टर के लिए पहला मेगा इंटरनेशनल ट्रेड ईवेंट भी आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 30 जून को गुजरात में किया। इस ईवेंट में 100 से ज्‍यादा देशों ने भाग लिया और 11000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की अनुमानित वैल्‍यू के 65 एमओयू साइन हुए। 

 

जनवरी में आया ऑनलाइन पोर्टल इंडिया हैंडमेड बाजार

जनवरी 2017 में कारीगरों और बुनकरों को डायरेक्‍ट मार्केट फैसिलिटी उपलब्‍ध कराने वाला ऑनलाइन पोर्टल इंडिया हैंडमेड बाजार लॉन्‍च हुआ। नवंबर में टेक्‍सटाइल मंत्रालय ने रेडीमेड गारमेंट्स और मेड अप्‍स के एक्‍सपोर्ट को लेकर रेमिशन ऑफ स्‍टेट लेवीज (RoSL) के लिए स्‍कीम के तहत जीएसटी के बाद की दरों को नोटिफाई किया। इसके तहत गारमेंट्स के लिए दरें 1.25 फीसदी से 1.70 फीसदी और मेड अप्‍स के लिए 1.40 फीसदी से 2.20 फीसदी के बीच हैं। इन्‍हें अक्‍टूबर से प्रभावी किया गया है। 

 

MEIS के तहत दरों में हुआ सुधार 

इसके अलावा सरकार ने रेडीमेड गारमेंट्स और मेड अप्‍स पर मर्चेंडाइज एक्‍सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्‍कीम (MEIS) के तहत दरों में सुधार करते हुए 2 फीसदी से 4 फीसदी कर दिया। नई दरें 1 नवंबर 2017 से 30 जून 2018 तक कि लिए हैं।  

 

टेक्‍सटाइल सेक्‍टर को नेशनल पॉलिसी की सख्‍त जरूरत   

इस वक्‍त टेक्‍सटाइल सेक्‍टर के सभी सेगमेंट्स पर लागू होने वाली एक व्‍यापक नेशनल पॉलिसी को लागू किए जाने की जरूरत है ताकि टेक्‍सटाइल के एक्‍सपोर्ट को बढ़ावा मिल सके। टेक्‍सटाइल एक्‍सपोर्ट की स्थिति पिछले 4 वित्‍त वर्षों से जस की तस बनी हुई है। इसकी वजह अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और चीन जैसे बड़े मार्केट्स से डिमांड में कमी और वियतनाम व बांग्‍लादेश जैसे अन्‍य देशों से कड़ा कॉम्पिटीशन है। 

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