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    10 हजार करोड़ के फंड में से केवल 129 करोड़ को मि‍ली मंजूरी, स्‍टार्टअप्‍स के लि‍ए बढ़ी मुश्‍कि‍लें

    10 हजार करोड़ के फंड में से केवल 129 करोड़ को मि‍ली मंजूरी, स्‍टार्टअप्‍स के लि‍ए बढ़ी मुश्‍कि‍लें
     
    नई दि‍ल्‍ली। स्‍टार्टअप इंडि‍या प्रोग्राम को एक साल से ज्‍यादा हो गए हैं लेकि‍न अब भी सरकार की ओर से कंपनि‍यों को फंड नहीं मि‍ल पाया है। केंद्र सरकार ने स्‍टार्टअप्‍स के लि‍ए 10 हजार रुपए का फंड ऑफ फंड्स (एफएफएस) बनाया है। लेकि‍न इसका फायदा अभी तक स्‍टार्टअप्‍स को मि‍लना बाकी है। एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि‍ सरकार ने जि‍स तरह के नि‍यम बनाए हैं उससे फंड असल जगह पर पहुंच नहीं पा रहा है।
     
    अब तक 129 करोड़ रुपए की मंजूरी   
     
    सरकार की स्‍टार्टअप्‍स इंडि‍या रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, सि‍डबी को फाइनेंशि‍यल ईयर 2015-16 में 500 करोड़ रुपए दि‍ए गए थे। इस रकम में से सि‍डबी की ओर अब तक केवल 129 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इस रकम को वि‍भि‍न्‍न वेंचर फंड्स को दि‍या जाना है। हालांकि‍, स्‍टार्टअप्‍स तक अब तक कोई पैसा नहीं पहुंचा है।  
     
    नि‍यमों में उलझे इन्‍वेस्‍टर्स
     
    इंडि‍यन एंजेल नेटवर्क के चेयरमैन सौरभ श्रीवास्‍तव ने बताया कि‍ सि‍डबी को कुछ पैसे की मंजूरी दी गई है लेकि‍न इस अकाउंट को वि‍द्ड्रा नहीं कि‍या गया है। इसके पीछ सख्‍त नि‍यम हैं। सि‍डबी की ओर से केवल 15 फीसदी पैसा दि‍या जाता है जबकि‍ 85 फीसदी पैसा वेंचर कैपि‍टल (वीसी) को देना पड़ता है। ऐसे में वीसी को इस तरह के पैसे जुटाने में मुश्‍कि‍लों का सामना करना पड़ रहा है।
     
    उन्‍होंने बताया कि‍ दूसरी सबसे बड़ी दि‍क्‍कत यह है कि‍ सरकार ने वीसी को केवल शुरुआती स्‍टेज वाले स्‍टार्टअप्‍स को फंड देने के लि‍ए कहा है। इससे उनका इन्‍वेस्‍टमेंट ऑप्‍शन कम हो गया है। ऐसे में वह सरकार के ऑफर को ही नजरअंदाज कर रहे हैं।
     
    सरकार ने बनाया था फंड ऑफ फंड्स
     
    सरकार की ओर से स्‍टार्टअप्‍स के लि‍ए 10 हजार करोड़ रुपए का ‘फंड ऑफ फंड्स’ बनाया था जि‍से सि‍डबी मैनेज कर रहा है। यह फंड सेबी रजि‍स्‍टर्ड वीसी फंड्स में इन्‍वेस्‍ट करेगा जो भी बाद में स्‍टार्टअप्‍स में इन्‍वेस्‍ट करेगा। हालांकि‍, इस मेगा फंड का फायदा लोगों तक पहुंच ही नहीं पाया है।
     
    क्रेडि‍ट गारंटी फंड का भी बुरा हाल
     
    सि‍डबी और नेशनल क्रेडि‍ट गारंटी ट्रस्‍ट कंपनी के जरि‍ए अगले 4 साल के लि‍ए प्रत्‍येक वर्ष 500 करोड़ रुपए दि‍या जाना है। हालांकि‍, इस स्‍कीम के बारे में भी कोई अपडेट नहीं मि‍ला है।

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