बदलाव /तीन गुना तक बढ़ सकते हैं ओला-ऊबर के दाम, बन रहे हैं नए नियम

  • लंबे समय से सर्ज प्राइसिंग को लागू करने की मांग कर रहे हैं कैब एग्रीगेटर्स
  • पीक आवर्स में तीन गुना तक ज्यादा भाड़ा लेने की अनुमति दे सकती है सरकार
     

Moneybhaskar.com

Sep 13,2019 06:34:31 PM IST

नई दिल्ली. जल्द ही आपको ओला और ऊबर में ट्रैवल करने के लिए बेस फेयर से तीन गुना तक अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। दरअसल कैब एग्रीगेटर्स इंडस्ट्री के लिए नए नियम बनाए जा रहे हैं। इनके तहत केंद्र सरकार पीक आवर्स यानी अधिक मांग वाली अवधि में ऊबर और ओला जैसे कैब एग्रीगेटर्स को ग्राहकों से बेस फेयर से तीन गुना तक अधिक भाड़ा लेने की इजाजत दे सकती है। ओला व ऊबर की सर्ज प्राइसिंग पर कैप लगाने के उद्देश्य से सरकार यह कदम उठा रही है।

लंबे समय से सर्ज प्राइसिंग को लागू करने की मांग कर रहे हैं एग्रीगेटर्स

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, कैब कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर डिमांड-सप्लाई को मैनेज करने के लिए लंबे समय से सर्ज प्राइसिंग लागू करने के पक्ष में अपनी राय देती आई हैं। नए नियमों में यह बताया जा सकता है कि वे ग्राहकों से सर्ज प्राइसिंग के तहत कितना भाड़ा ले सकती हैं। इसमें कंपनियों के लिए दूसरे दिशानिर्देश भी हो सकते हैं, जिन्हें दिसंबर 2016 में प्रस्तावित किया गया था।

कैब एग्रीगेटर्स को माना जाएगा मार्केटप्लेस

मोटर व्हीकल (अमेंडमेंट) बिल, 2019 के पास होने के बाद कैब एग्रीगेटर्स के लिए इन नियमों का प्रस्ताव लाया जा रहा है। इस विधेयक में पहली बार कैब एग्रीगेटर्स को डिजिटल इंटरमीडियरी यानी मार्केटप्लेस माना गया। इससे पहले इन कंपनियों को अलग एंटिटी नहीं माना जाता था। इस वजह से ऊबर और ओला ‘ग्रे जोन’ में काम कर रही थीं। नए नियम वैसे तो पूरे देश में लागू होंगे, लेकिन राज्यों के पास इनमें बदलाव करने का भी अधिकार होगा। देश में कैब एग्रीगेटर्स को रेगुलेट करने वाला पहला राज्य कर्नाटक है। मिसाल के लिए, उसने ऐप से कैब सर्विस देने वाली कंपनियों के लिए पहले ही न्यूनतम और अधिकतम किराया तय किया हुआ है। उसने गाड़ी की कीमत के आधार पर इसके स्लैब तय किए हैं।

सर्ज प्राइसिंग ग्राहकों की सबसे बड़ी परेशानी

कैब एग्रीगेटर्स की सर्विस में ग्राहक सर्ज प्राइसिंग को सबसे बड़ी परेशानी मानते हैं। सर्वे करने वाली संस्था लोकलसर्कल्स के 51 हजार लोगों से किए गए एक सर्वे में 39 फीसदी ने इसे सबसे बड़ा मसला बताया। जब उनसे पूछा गया कि सर्ज प्राइसिंग को लेकर क्या करना चाहिए तो 49 फीसदी ने इसे सामान्य किराए से 25 फीसदी अधिक तक सीमित रखने की मांग की। वहीं, 45 फीसदी ने इस पर रोक लगाने को कहा। लोकलसर्कल्स के संस्थापक और चेयरमैन सचिन टापरिया ने कहा, ‘हमारे सर्वे से पता चला कि ग्राहक सर्ज प्राइसिंग बिल्कुल नहीं चाहते या इसे नियमित भाड़े से 25 फीसदी तक सीमित करना चाहते हैं।’

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