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    ओला-उबर स्ट्राइक: कंपनियों को 50 करोड़ के नुकसान का अनुमान, 40% ड्राइवर अबभी हड़ताल पर

    नई दि‍ल्‍ली। दिल्ली-एनसीआर के ऐप बेस्ड ओला और उबर के कैब चालकों की हड़ताल अबभी जारी है।  मंगलवार को दोनों कंपनियों के करीब 40 फीसदी ड्राइवर हड़ताल रहे। पूरी तरह से हड़ताल टूटने के फिलहाल अभी आसार नजर नहीं आ रहे हैं। 12 दिन से चल रही हड़ताल से जहां ड्राइवर्स की कमाई बंद है, वहीं एक अनुमान के मुताबिक दोनों कंपनियों को अबतक 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का घाटा हुआ है। ड्राइवर्स सुविधाएं, इंसेटिव और कमिशन बढ़ाने के साथ प्रति किलोमीटर किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। 
    दिल्ली-एनसीआर में ओला और उबर की कुल 2 लाख कैब ऑपरेशन में हैं। इनमें से 50 हजार कैब कंपनियों की अपनी हैं और 1.5 लाख कैब इंडिपेंडेंट ड्राइवर्स के हैं। ओला और उबर के ड्राइवर्स की एसोसिएशन सर्वोदय ड्राइवर्स एसोसिएशन ऑफ दिल्ली का कहना है कि अब भी 40 फीसदी से ज्यादा ड्राइवर हड़ताल पर हैं। शुरू के 8 दिन इंडिपेंडेंट ड्राइवर्स की 95 फीसदी टैक्सियां नहीं चलीं। 
     
    50 करोड़ से ज्यादा नुकसान की अनुमान
    सर्वोदय ड्राइवर्स एसोसिएशन ऑफ दिल्ली के एक मेंबर ने बताया कि औसतन प्रति ड्राइवर रोज 1500 से 2500 रुपए की कमाई करता है। इसमें से 25 फीसदी कंपनियां कमिशन ले लेती हैं। इस लिहाज से शुरू के 6-7 दिनों में 1.5 लाख कैब के हड़ताल पर रहने से कंपनियों को रोज 5 से 6 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। अब भी 40 फीसदी ड्राइवर हड़ताल पर हैं, इस वजह से अब तक 50 करोड़ रुपए से ज्यादा नुकसान का अनुमान है। हालांकि कंपनियों ने लॉस का डाटा बताने से इंकार किया है।
     
    40 फीसदी रह गई कमाई
    ड्राइवर्स का आरोप है कि कंपनियां अपनी इनकम बढ़ा रही हैं, जिससे हमारी कमाई 40 से 50 फीसदी रह गई हैं। ये कंपनियां अब प्रति पैसेंजर होने वाली इनकम को बढ़ाने और खर्च को घटाने के मॉडल पर काम कर रही हैं। उनका कहना है कि पहले जहां पहले जहां प्रति ट्रिप के हिसाब से इंसेंटिव मिलता था अब यह फेयर बेस्ड हो गया है। ओला नेट अर्निंग के बेसिस पर इंसेंटिव दे रही हैं। अगर कस्टमर्स रेटिंग कम देते हैं तो भी ड्राइवर्स के इन्सेन्टिव काट दिए जा रहे हैं। उबर का भी यही मॉडल है। नियमों में लगातार बदलाव हो रहा है, जिसका सीधा असर ड्राइवर्स की इनकम पर पड़ रहा है। 
     
    कमिशन बढ़कर 25 फीसदी हो गया
    उबर कंपनी में बिजनेस पार्टनर बने अभिषेक ने बताया कि शुरू में कंपनियों ने मुनाफे के लिए कई तरह के ऑफर किए। लेकिन, धीरो-धीरे जहां कंपनियां अपना कमिशन बढ़ा रही हैं, वहीं ड्राइवर्स के इंसेंटिव कम कर रही हैं। कंपनियों का कमिशन बढ़कर 25 फीसदी हो गया है। वहीं, प्रति किलोमीटर सिर्फ 6 रुपए किराया होने की वजह से हर किलोमीटर पर ड्राइवर 2 रुपए भी नहीं कमा पा रहा है। वहीं, दिन भर में 200 से 300 रुपए मेंटिनेंस चार्ज में खर्च हो जाता है।
     
    क्या है ड्राइवर्स की मांग
    -ओला और उबर के ड्राइवर्स प्रति किलोमीटर किराया बढ़ाकर 23 रुपए करने की मांग कर रहे हैं, जो अभी 6 रुपए प्रति किलोमीटर है।
    -दिन में होने वाली कमाई पर इंसेंटिव बढ़ाने की मांग
    -एक्सिडेंट इंश्‍योरेंस की मांग
    -कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले 25 फीसदी कमिशन को कम करने की मांग
    -सिर्फ पीक टाइम में मिलने वाली ही राइड नहीं, अन्य राइड पर भी इंसेंटिव की मांग
     
    हाईकोर्ट ने दी थी हिदायत
    हाईकोर्ट ने हड़ताल करने वाले ड्राइवर्स और उनके एसोसि‍एशन से कहा था कि वे एप बेस्‍ड कैब सर्वि‍स को बाधित न करें। हाईकोर्ट ने यह अंतरिम आदेश उबर की याचिका पर दिया था। 

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