स्टार्टअप /कश्मीर और हिमाचल के किसानों की समस्याओं का समाधान करती है यह कंपनी, मिला राष्ट्रीय उद्यमशीलता अवॉर्ड

  • पहाड़ी प्रदेशों में होने वाली कृवि मैदानी इलाकों की कृषि से काफी अलग तरीके से होती है
  • मैदानी इलाकों में सब्जी उगाने वाले किसानों की बड़ी समस्या भी इस स्टार्टअप ने हल की
  • राजस्थान के नितिन और आंध्र प्रदेश के विनय ने तैयार की यह कंपनी 

Moneybhaskar.com

Nov 07,2019 08:25:28 PM IST

नई दिल्ली. राजस्थान के करणपुर, जजला श्री गंगानगर के रहने वाले नितिन गुप्ता और आंध्र प्रदेश के विनय रेड्डी ने सन 2014 में स्किल इनोवेशंस कम्पनी स्थापित की। सिकल इनोवेशन बागबानी से जुड़ी हुई समस्याओं पर काम करता हैं तथा नवीनतम कृषि यंत्र तैयार करते हैं।

इस तकनीक को बड़े स्तर पर कश्मीर में सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया गया है

पहाड़ी प्रदेशों में होने वाली कृषि मैदानी इलाकों की कृषि से काफी अलग तरीके से होती है। अधिकतर कृषि यंत्र मैदानी इलाकों के लिए तैयार किये जाते हैं जिनको पहाडों में उपयोग नहीं किया जा सके। नितिन और विनय ऐसे ही दुर्गम जगह पहुंच कर किसानों की समस्याओं को सुलझाते हैं। पिछले वर्ष इन्होंने जम्मू-कश्मीर के पांपोर इलाके में होने वाले केसर के किसानों के लिए एक अत्याधुनिक ड्रायर तैयार किया जिसकी मदद से किसान अपना केसर बहुत जल्दी सूखा सकते हैं और मशीन से सूखने से केसर का रंग भी गहरा आता है। इससे किसानों को 10-20 प्रतिशत तक का ज्यादा भाव मिलता है। इस तकनीक को बड़े स्तर पर कश्मीर में सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया गया है। उग्रवाद से लड़ रहे कश्मीर में इस स्टार्टअप का ऑफिस पुलवामा में है और इनकी टीम निडर होकर वहां किसानों को नई तकनीक मुहैया करवाती है।

कश्मीर और हिमाचल में पैदा होने वाले फलों को पेड़ से तोड़ने के लिए भी इस स्टार्टअप ने नए यंत्रों का इस्तेमाल किया है

कश्मीर और हिमाचल में पैदा होने वाले दूसरे फल जैसे की सेब, खुरमाणी, नाशपाती को पेड़ से तोड़ने के लिए भी इस स्टार्टअप ने नए यंत्रों का इस्तेमाल किया है जो कि इन प्रदेशों में खासे प्रचलित हुए हैं। लद्दाख में उगने वाला एक फल जो की सीबकथॉर्न के नाम से जाना जाता है बेहद मंहगा और विटामिन सी से भरपूर होता है। इस फल की पूरी दुनिया में मांग है मगर ये फल कांटेदार झाड़ी में लगे होने तथा माइनस डिग्री तापमान के कारण पूरी पैदावार का केवल 5 प्रतिशत ही उतारा जा सकता था। DRDO के लेह में स्थित रिसर्च सेंटर ने हाल ही में सिकल इनोवेशंस से ये मशीन तैयार करवाई है और अगले साल से इस बहुमूल्य फल को बड़ी संख्या में तोड़ा जा सकेगा।

खेत से टूटे हुए माल में हर तरह की सब्जी होती है जिसका मूल्य सब्जी के आकार और रंग पर निर्भर करता है

मैदानी इलाकों में सब्जी उगाने वाले किसानों की एक बड़ी समस्या भी इस स्टार्टअप ने हल की है। सब्जियों को खेतों से तोड़ने के बाद किसान अक्सर अपनी सारी पैदावार सीधा मंडी में बेच देते हैं। खेत से टूटे हुए माल में हर तरह की सब्जी होती है जिसका मूल्य सब्जी के आकार और रंग पर निर्भर करता है। किसान अगर हर सब्जी को साइज और रंग के आधार पर ग्रेड करके बेचे तो उसे कही ज्यादा मूल्य मिले लेकिन लेबर और समय के आभाव में किसान बिना ग्रेडिंग किए अपनी पैदावार बेच देते है जहां उन्हें अपनी पैदावार का औसत मूल्य ही मिलता है। इस स्टार्टअप ने एक कम बजट की एक ऐसी मशीन तैयार की है जिसमे कैमरा की मदद से हर एक सब्जी की फोटो ली जाती है और कंप्यूटर की मदद से चलने वाली ये मशीन एक घंटे में 1 टन सब्जी अलग-अलग ग्रैड में निकाल देती है जिससे की किसान को अच्छी फसल का पूरा दाम मिलता है।

भारत सरकार से मिल चुका है अवार्र्ड

9 नवंबर 2019 को भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने सिकल इनोवेशंस को राष्ट्रीय उद्यमशील पुरस्कार से सम्मानित किया। स्टार्टअप कार्यक्रम का सबसे बड़ा पुरस्कार 13 वर्गों में देश के सबसे अच्छे उद्यमों को दिया जाता है। सिकल इनोवेशंस को यह अवार्ड केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने दिया जिसमें एक ट्राफी और 5 लाख रुपए का कैश अवार्ड सम्मिलित है।


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