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इंडि‍यन स्‍टार्टअप्‍स की ड्राइविंग सीट पर बैठा Softbank, कर चुका है 40 हजार करोड़ का इन्‍वेस्‍टमेंट

सॉफ्टबैंक की स्‍ट्रैटजी यह साफ कर रही है कि‍ वह इंडि‍यन स्‍टार्टअप्‍स की कमान अपने हाथ में रखना चाहती है।

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नई दि‍ल्‍ली। जब फ्लि‍पकार्ट के हाथों स्‍नैपडील को खरीदने वाली डील फेल हुई, उस वक्‍त जापान की इन्‍वेस्‍टमेंट कंपनी सॉफ्टबैंक को बड़ा झटका लगा। लेकि‍न सॉफ्टबैंक ने पेटीएम और फ्लि‍पकार्ट में बड़ा इन्‍वेस्‍टमेंट कर दोबारा इंडि‍यन स्‍टार्टअप्‍स में अपनी वापसी की। सॉफ्टबैंक के फाउंडर मासायोशी सन की भारत यात्रा के नौ माह के भीतर ही कंपनी ने इंडि‍यन मार्केट में 4 अरब डॉलर से ज्‍यादा का इन्‍वेस्‍टमेंट किया। इस इन्‍वेस्‍टमेंट के साथ ही सॉफ्टबैंक का भारत में अब कि‍या गया इन्‍वेस्‍टमेंट 6 अरब डॉलर (करीब 40 हजार करोड़ रुपए) से ज्‍यादा हो गया है। इतना ही नहीं, अब सॉफ्टबैंक देश की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी फ्लि‍पकार्ट और सबसे बड़ी ऐप एग्रीग्रेटर ओला में अपनी हि‍स्‍सेदारी बढ़ाने की तैयारी में है। सॉफ्टबैंक की स्‍ट्रैटजी यह साफ कर रही है कि‍ वह इंडि‍यन स्‍टार्टअप्‍स की कमान अपने हाथ में रखना चाहती है। 
 
सॉफ्टबैंक की भारत में शुरुआत
 
जापान की कंपनी सॉफ्टबैंक की भारत में एंट्री 2014 के अंत में हुई। उस वक्‍त सॉफ्टबैंक के वाइस प्रेसि‍डेंट नि‍केश अरोड़ा के नेतृत्‍व में कंपनी ने भारत के बड़े कंज्‍यूमर इंटरनेट स्‍टार्टअप्‍स में पैसा लगाया। साल 2015 के अंत तक सॉफ्टबैंक ने 5 कंपनि‍यों में करीब 2 अरब डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट कर दि‍या। इसमें स्‍नैपडील, ओला, हाउसिंग डॉट कॉम, ग्रोफर्स इंडि‍या और ओयो रूम्‍स शामि‍ल है।  
 
सॉफ्टबैंक ने बढ़ाई इन्‍वेस्‍टमेंट की स्‍पीड
 
स्‍नैपडील के अलावा सॉफ्टबैंक ने ओला, ओयो रूम्‍स, मैसेजिंग ऐप हाइक मैसेंजर और ग्रॉसरी डि‍लि‍वरी कंपनी ग्रोफर्स में पैसा डाला। इसके बाद, कंपनी ने भारत में सोलर एनर्जी में इन्‍वेस्‍टमेंट के लि‍ए भारती के साथ पार्टनरशि‍प की है। 
 
सॉफ्टबैंक का भारत में इन्‍वेस्‍टमेंट पोर्टफोलि‍यो
 
साल कंपनी सॉफ्टबैंक के साथ कि‍तने इन्‍वेस्‍टर इन्‍वेस्‍टमेंट (डॉलर में)
2011 iMOBI कोई नहीं 20 करोड़
2014 स्‍नैपडील कोई नहीं 65 करोड़
2014 ओला कोई नहीं 21 करोड़
2014 हाउसिंग 4 9 करोड़
2015 ओला 6 40 करोड़
2015 ओयो 3 10 करोड़
2015 स्‍नैपडील 2 50 करोड़
2015 ओला 5 50 करोड़
2015 ग्रोफर्स 3 12 करोड़
2016 हाउसिंग कोई नहीं 1.5 करोड़
2016 ओयो कोई नहीं 6.2 करोड़
2016 ओला कोई नहीं 25 करोड़
2017 पेटीएम कोई नहीं 140 करोड़
2017 फ्लि‍पकार्ट कोई नहीं 260 करोड़
2017 ओयो 4 25 करोड़

 

क्‍या सोच समझ कर उठाया जोखि‍म? 
 
यूनि‍कॉर्न इंडि‍या वेंचर्स के मैनेजिंग पार्टनर अनि‍ल जोशी ने बताया कि‍ सॉफ्टबैंक टेलि‍कॉम बैकग्राउंड कंपनी है और वह जानती है कि‍ मोबाइल और इंटरनेट प्‍लैटफॉर्म पर कंपनि‍यों को ग्रोथ हासि‍ल करने में वक्‍त लगता है। भारत में मोबाइल का यूज तेजी से बढ़ रहा है और यही इन्‍वेस्‍टर्स को आकर्षि‍त कर रहा है। 
 
सॉफ्टबैंक ने भारत में जोखि‍म के साथ इन्‍वेस्‍टमेंट कि‍या है लेकि‍न वह पीछे नहीं हटा। 15 साल सॉफ्टबैंक ने चीन में भारी इन्‍वेस्‍टमेंट कि‍या। पांच साल पहले कंपनी ने जापान में इन्‍वेस्‍टमेंट कि‍या और 10 साल पहले अमेरि‍का में। सभी इन्‍वेस्‍टमेंट इंटरनेट संबंधि‍त कंपनि‍यों में कि‍ए गए। 
 
गि‍रती जा रही है वैल्‍यूएशन   
 
स्‍नैपडील की परेशानी अब बढ़ने लगी जब इसकी वैल्‍यूएशन जनवरी 2016 में करीब 1 अरब डॉलर पर पहुंच गई जबकि‍ इसकी वैल्‍यूएशन 6.5 अरब डॉलर पर थी। इसके अलावा, ओला की वैल्‍यूएशन 2015 में 5 अरब डॉलर पर थी जोकि‍ नवंबर 2016 में गि‍रकर 3 अरब डॉलर पर पहुंच गई। वहीं, ओयो के साथ भी कुछ ऐसा ही देखा गया है।   
 
रि‍टर्न नहीं मि‍ला तो बाहर नि‍कला 
 
सॉफ्टबैंक ने भारत के कई स्‍टार्टअप्‍स में पैसा लगा लेकि‍न कुछ फैसले उम्‍मीद के मुताबि‍क नहीं रहे। ऐसे में सॉफ्टबैंक ने सफलतापूर्वक वि‍लय एंव अधि‍ग्रहण कि‍ए। इसमें से एक हाउसिंग.कॉम नहीं जिसके सारे स्‍टॉक प्रोपटाइगर को करीब 7 से 7.5 करोड़ डॉलर में बेच दि‍ए। अब कंपनी ग्रोफर्स को बि‍गबास्‍केट के साथ मर्जर कराने की तैयारी कर रही है।
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