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बेंगलुरु-दि‍ल्‍ली नहीं छोटे शहरों के स्‍टार्टअप बने इन्‍वेस्‍टर्स की पसंद, 20% पहुंचा शेयर

छोटे शहरों में नए आइडि‍या के साथ नया बि‍जनेस शुरू करने वालों को इन्‍वेस्‍टर्स का सपोर्ट बढ़ गया है।

small town startups gaining attraction from investors during 2017
 
नई दि‍ल्‍ली। छोटे शहरों में नए आइडि‍या के साथ नया बि‍जनेस शुरू करने वालों को इन्‍वेस्‍टर्स का सपोर्ट बढ़ गया है। अब केवल बेंगलुरु और दि‍ल्‍ली ही भारत के स्‍टार्ट हब नहीं बचे हैं। छोटे शहरों में स्‍टार्टअप्‍स की संख्‍या तेजी से बढ़ रही है। कसंलटेंसी कंपनी Zinnov और आईटी इंडस्‍ट्री के संगठन नैस्‍कॉम की हाल ही में जारी रि‍पोर्ट में कहा गया कि‍ जयपुर, अहमदाबार, इंदौर और कोच्‍चि‍ नए स्‍टार्ट हब के तौर पर उभर रहे हैं। इसके पीछे टि‍यर 2 और टि‍यर 3 शहरों में तेजी से बढ़ते इन्‍क्‍यूबेटर्स,  टेक पार्क और स्‍टार्टअप ईकोसि‍स्‍टम हैं। रि‍पोर्ट में कहा गया कि‍ 2016 में भारतीय स्‍टार्टअप्‍स में इन शहरों की हि‍स्‍सेदारी करीब 16 फीसदी थी।   
 
करीब 20 फीसदी इन्‍वेस्‍टमेंट छोटे शहरों में 
 
स्‍टार्टअप्‍स को इन्‍वेस्‍टर्स से कनेक्‍ट करने वाले प्‍लैटफॉर्म LetsVenture  का डाटा बताता है कि‍ इस साल जुलाई से सि‍तंबर के बीच हुए टोटल वेंचर कैपि‍टल (वीसी) इन्‍वेस्‍टमेंट का करीब 20 फीसदी हि‍स्‍सा टि‍यर 2 और टि‍यर 3 शहरों में गया है। इसमें यह भी पता चला है कि‍ इन शहरों में हेल्‍थकेयर, एजुकेशन, एग्रीकल्‍चर, एनर्जी और दूसरे सेक्‍टर में बि‍जनेस शुरू करने वाले स्‍टार्टअप्‍स को इन्‍वेस्‍टर्स का सपोर्ट मि‍ला है। 
 
शहर स्‍टार्टअप्‍स को फंडिंग (फीसदी में)
बेंगलुरु 27%
दि‍ल्‍ली
25%
मुंबई 16%
हैदराबाद
6%
पुणे 5%
चेन्‍नई
4%
कोलकाता 2%
अहमदाबाद 2%
जयपुर 2%
चंडीगढ़ 2%
इंदौर 2%
कोच्‍चि 2%

 

लो कॉस्‍ट का मि‍ल रहा है फायदा
 
इन छोटे शहरों में लो कॉस्‍ट मैनपावर, सस्‍ता रि‍यल एस्‍टेट और दूसरे सस्‍ते समान का बड़ा फायदा मि‍लता है। इसकी वजह से इन कंपनि‍यों को लि‍मि‍टेड बजट में ज्‍यादा काम करने और कंपनी का वि‍स्‍तार करने में मदद मि‍लती है। 
 
छोटे शहरों के कारोबारि‍यों के सामने चुनौती
 
कसंलटेंसी फर्म ग्रेहुडग्रुप के सीईओ संचित गोगि‍या ने बताया कि‍ यह सही है कि‍ छोटे शहरों के स्‍टार्टअप्‍स को फंडिंग मि‍लने में तेजी आई है। ऐसा इसलि‍ए भी है कि‍ वह लोकल जरूरतों को पहले पूरा करने की कोशि‍श कर रहे हैं। हालांकि‍, इन शहरों में स्‍टार्टअप्‍स को स्‍कि‍ल एम्‍पलॉईज की दि‍क्‍कतों का सामना करना पड़ता है। 
 
फंडिंग डील में हुआ इजाफा
 
इंक42 डाटालैब्‍स के मुताबि‍क, 2017 के पहले तीन क्‍वार्टर में स्‍टार्टअप्‍स को मि‍लने वाली टोटल फंडिंग डील्‍स में इजाफा आया है। इस साल में अब तक भारतीय टेक स्‍टार्टअप ईकोसि‍स्‍टम वि‍भि‍न्‍न सेगमेंट में 700 से ज्‍यादा डील पूरा करने में सफल हुआ है। इसके 9.4 अरब डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट हुआ है जो कि‍ पि‍छले साल की समान अवधि‍ के मुकाबले 1.35 गुना ज्‍यादा है।    
 
भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं स्‍टार्टअप्‍स 
 
नैस्‍कॉम की ओर से जारी एक दूसरी रि‍पोर्ट के मुताबि‍क भारत में 5,000 से ज्‍यादा स्‍टार्टअप्‍स हैं जि‍नकी शुरुआत पांच साल पहले हुई है। वहीं, पि‍छले साल 1,000 से ज्‍यादा नए स्‍टार्टअप्‍स जुड़ गए हैं। हालांकि‍, हर साल 35 फीसदी स्‍टार्टअप्‍स बंद हो जाते हैं। इसके अलावा, भारतीय स्‍टार्टअप्‍स में महि‍ला फाउंडर्स की संख्‍या 10 फीसदी से बढ़कर 11 फीसदी हो गई है। वहीं, भारत में स्‍टार्टअप्‍स फाउंडर्स की उम्र औसतन 32 साल रहती है।
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