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    कॉल उठाने पर भी मि‍लते हैं पैसे, IIT स्‍टूडेंट्स अपने ऐप से बदल रहे हैं ऐड वर्ल्‍ड का ट्रेंड

    कॉल उठाने पर भी मि‍लते हैं पैसे, IIT स्‍टूडेंट्स अपने ऐप से बदल रहे हैं ऐड वर्ल्‍ड का ट्रेंड
     
    नई दि‍ल्‍ली। अगर कोई कहे कि‍ आपको अपने फोन कॉल उठाने पर पैसे दि‍ए जाएंगे तो कैसा लगेगा। एडर्वटाइजमेंट की दुनि‍या में नए तरीके से कदम रखते हुए आईआईटी के स्‍टूडेंट्स ने पेट्यूंस नाम से एक अनोखा मोबाइल एप्‍लीकेशन बनाया है। ब्रांड्स को अपने प्रोमोशन और ऐड देने के लि‍ए राकेश सहगल, गौरव ति‍वारी और दि‍व्‍य प्रताप सिंह ने पेट्यूंस मोबाइल ऐप को डेवलप कि‍या। बाद में उनके साथ को-फाउंडर अमि‍त नारेदी भी जुड़ गए।
     
    आईआईटी दि‍ल्‍ली 2010 बैच के स्‍टूडेंट और पेट्यून के को-फाउंडर राकेश सहगल ने moneybhaskar.com के साथ हुई बातचीत में बताया कि‍ पेट्यूंस मोबाइल ऐप का आइडि‍या जुलाई 2015 में आया और अगस्‍त 2015 में हमने पेट्यून का प्रोटोटाइप बनाकर इसे पायलेट प्रोजेक्‍ट के तौर पर रि‍लीज कि‍या और अक्‍टूबर में इसे लॉन्‍च कर दि‍या। पेट्यूंस का मकसद एडवटाइजर्स और ब्रांड्स को मोबाइल कंज्‍यूमर्स तक पहुंचाना है। साथ ही, कंज्‍यूमर्स को भी इसके बदले फायदा देना है।
     
    क्‍या है कंपनी का बि‍जनेस मॉडल?
     
    जो यूजर्स पेट्यूंस ऐप को डाउनलोड करते हैं उनकी मोबाइल रिंगटोन को एडवर्टाइजर्स के ऐड जिंगल्‍स से बदल दी जाती है। जि‍तनी बार यूजर के पास कॉल आएगी तो वही ऐड जिंगल वाली रिंगटोन बजेगी। हर रिंगटोन पर यूजर्स को प्‍वाइंट्स मि‍लते हैं और उन प्‍वाइंट्स का इस्‍तेमाल मोबाइल रीचार्ज, मोबाइल बि‍ल पेमेंट और डीटीएच पेमेंट के लि‍ए कि‍या जा सकता है।
     
    उदाहरण के तौर पर यूजर्स के पास अगर 40 प्‍वाइंट्स हो जाते हैं तो वह 5 रुपए का डि‍स्‍काउंट पेमेंट या रीचार्ज में यूज कर सकता है। इसके अलावा, अगर कोई यूजर मोबाइल वॉलेट को यूज नहीं करता है तो वह पेट्यूंस के डेली कॉन्‍टेस्‍ट में भी हि‍स्‍सा ले सकता है, जहां उसे हर दि‍न मोबाइल फोन, पेन ड्राइव, हेडफोन, वाउचर्स आदि‍ जीतने का मौका मि‍लेगा। अभी तक कंपनी यूजर्स को 90 लाख रुपए तक के रीचार्ज दे चुकी है।
     
    पेट्यूंस के पास कि‍तने ब्रांड्स
     
    पेट्यूंस के पास इस वक्‍त करीब 20 से ज्‍यादा ब्रांड्स हैं जो एडवर्टाइजमेंट दे रहे हैं। इसमें हॉटस्‍टार, रेनो, सावन, नि‍सान, एसबीआई लाइफ, कैटबरी, एलजी आदि‍ शामि‍ल हैं। ब्रांड्स को यह कहा जाता है कि‍ वह अपने ऐड जिंगल्‍स को मोबाइल रिंगटोन की तरह बनाएं। कंपनी का टारगेट है कि‍ वह इस साल के अंत तक 50 से ज्‍यादा ब्रांड्स को अपने साथ जोड़ेंगे। ब्रांड्स भी अपने हि‍साब से मोबाइल यूजर्स (शहर या यूजर की उम्र के हि‍साब से) को चुनते हैं।
     
    कंपनी के पास कि‍तने यूजर्स
     
    पेट्यूंस के पास इस वक्‍त 8.2 लाख का यूजर बेस है जि‍समें से 3.2 लाख एक्‍टि‍व यूजर्स हैं। कंपनी का टारगेट है कि‍ 2017 के अंत तक यह यूजर बेस 25 लाख तक हो सकते हैं। ज्‍यादातर यूजर्स दि‍ल्‍ली, यूपी, मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान, बि‍हार आदि‍ क्षेत्रों से हैं।
     
    कंपनी जुटाया फंड
     
    पेट्यूंस की ओर से दो बार फंड जुटाया गया है। कंपनी ने पि‍छले साल सि‍तंबर में सीआईओ ऐंजल नेटवर्क से 60 लाख रुपए जुटाए थे। इसके बाद कंपनी ने आईईएन से 2 करोड़ रुपए जुटाए। अभी तक कंपनी 3 करोड़ रुपए का फंड जुटा चुकी है।
     
    आसान नहीं थी शुरुआत
     
    राकेश ने बताया कि‍ शुरुआत हमारे लि‍ए आसान नहीं थी। हम पहले भी एक स्‍टार्टअप शुरू कर चुके थे लेकि‍न वह सफल नहीं हो गया। इसके बाद, हम सभी दोस्‍त आपस में बैठे हुए थे और बातचीत के दौरान कि‍सी के फोन की रिंग टोन बजी और वहीं हमें यह आइडि‍या आया। क्‍योंकि‍ हम ऐड इंडस्‍ट्री के बारे में जानते थे इसलि‍ए हमने पेट्यूंस को डेवलप करने पर काम शुरू कि‍या। शुरुआती 6 महीने हमारे लेकि‍न बेहद मुश्‍कि‍ल थे। हम कोई बि‍जनेस नहीं कर पा रहे थे लेकि‍न धीरे-धीरे हमारे बि‍जनेस ने स्‍पीड पकड़नी शुरू की।

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