सफलता /बैंक की नौकरी छोड़ नितिन ने 10 हजार रुपए में शुरू किया गारमेंट का कारोबार, आज हैं 35 करोड़ के मालिक

  • नितिन की स्टार्टअप कंपनी ने 300 लोगों को दिया है रोजगार
  • यह कंपनी दुनिया के 136 देशों में बिजनेस कर रही है
  • इस साल के अंत तक भारतीय बाजार में उतरने की योजना 

Varsha Pathak

Varsha Pathak

Sep 25,2019 04:06:39 PM IST

नई दिल्ली. दिल्ली के रहने वाले नितिन कपूर ने जब बैंक की नौकरी छोड़ स्टार्टअप कंपनी इंडियन ब्‍यूटीफुल आर्ट (Indian Beautiful Art, IBA) शुरू की तब उन्हें नहीं पता था कि एक दिन उनकी कंपनी करोड़ों में कमाई करेगी। 2010 में कंपनी की शुरुआत लेस और गोटा पट्टी की बिक्री से हुई थी। आज नितिन ने अपने ब्रांड को अमेरिका, यूके, जर्मनी जैसे देशों तक पहुंचाया है। कंपनी हर माह 31,000 ऑर्डर पूरे करती है जो कि मुख्यत यूएस, यूके, जर्मनी, साउथ ईस्ट एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका से आते हैं।

300 लोगों को दिया है रोजगार

नितिन एक प्राइवेट बैंक में जॉॅब करते थे जहां उनकी सैलेरी 50 हजार के आसपास थी। वे बताते हैं, 'नौकरी में मेरा कभी मन नहीं लगा क्योंकि 10 से 7 की नौकरी मुझे कभी पसंद नहीं आई। मैं हमेशा से अपना कारोबार करना चाहता था जहां मैं औरों को भी रोजगार दे सकूं। आज मुझे खुशी है कि मेरे कंपनी में 300 से अधिक लोग काम कर रहे हैं।'

48 घंटे में होती है डिलिवरी

नितिन ने बताया, 'मैंने 10 हजार रुपए में अपना कारोबार शुरू किया था। हालांकि बाद में सरकार से मदद मिली थी।' नितिन कपूर के स्टार्टअप IBA में गारमेंट ऑर्डर के 48 घंटे बाद डिलीवर की जाती है। यह स्टार्टअप कंपनी किड्स, वुमेन और मेन्स वीयर बनाती है, जिसकी शुरुआती कीमत 30 यूएस डॉलर यानी 2500 रुपए के आसपास है। खास बात ये है कि कंपनी ऑर्डर मिलने के बाद ही कपड़े बनाना शुरू करती है। वे बताते हैं, 'शुरुआत में हम ट्रेडिंग मॉडल पर काम कर रहे थे। हमारी कंपनी रेडी प्रोडक्ट सोर्स करती थी। फिर ई-कॉमर्स के हिसाब से फोटोशूट होता था, सेल हुआ तो ठीक वरना फैशन खत्म होने के बाद इन्वेंट्री जमा होती जाती थी। इन्वेंट्री बेस्ड बिजनेस मॉडल में काफी निवेश भी होता है और इन्वेंट्री भी इकट्ठा होती है। इसीलिए बाद में मैंने बिजनेस मॉडल में बदलाव लाने का फैसला लिया। 5-6 करोड़ के निवेश में हमने एक ऐसा मॉडल बनाया जहां इन्वेंट्री की जरूरत नहीं है।'

पानी की करते हैं बचत

नितिन बताते हैं कि अब ऑर्डर के हिसाब से कपड़े बनवाते वक्त जस्ट इन टाइम टेक्नोलॉजी से प्रिंटिंग की जाती है जिससे पानी की बचत होती है। कंपनी डिजिटल प्रिंटिंग करती है जिसमें पानी कम इस्तेमाल होता है। कंपनी का दावा है कि इनकी 'जस्ट इन टाइम' टेक्नोलॉजी के जरिए पानी की बचत करने में सफल है। बता दें कि पानी का सबसे ज्यादा खपत फैशन उद्योग में होता है।

कंपनी का सलाना टर्नओवर 35 करोड़ के आसपास है

फिलहाल कंपनी इन्वेंट्री और वेयरहाउसिंग में निवेश नहीं कर रही है, भविष्य में ऑनलाइन-टू-ऑफलाइन (O2O) मॉडल पर ले जाने की योजना है। कंपनी अब तक दुनिया के 136 देशों में बिजनेस कर रही है और इसका सालाना टर्नओवर 35 करोड़ रुपए है। इस साल के अंत तक कंपनी भारतीय बाजार में अपने कदम जमाने पर फोकस बना रही है।

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