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2018 में ये स्टार्टअप है यूनिकॉर्न क्लब के दावेदार, बन सकते हैं अगले फ्लिपकार्ट और पेटीएम

2018 में ये स्टार्टअप है यूनिकॉर्न क्लब के दावेदार, बन सकते हैं अगले फ्लिपकार्ट और पेटीएम

नई दि‍ल्‍ली। साल 2018 में देश के कई इंंडयिन स्टार्टअप यूनिकार्न क्लब में शामिल होने के दहलीज पर पहुंच गए है। करीब 4 स्टार्टअप ऐसे हैं, जो साल 2017 के सूखे को खत्म कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो ये कंपनियां फ्लिपकार्ट, पेटीएम, स्नैपडील और ओला की कैटेगरी में शामिल हो सकती है। इन कंपनियों की वैल्युएशन इस समय 1 अरब डॉलर से ज्यादा है। देश में इस समय कुल 10 इंडियन स्टार्टअप है जो यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हैं। एक्सपर्ट के अनुसार नई कंपनियों पर जहां इन्वेस्टर का भरोसा बढ़ा है वहीं उनके फाइनेंसेज भी साल 2017 में अच्छे रहे हैं, जिसकी वजह से उनके इस साल यूनिकॉर्न क्लब में शामिल होने के चांस बन गए हैं।

 

क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट्स 

 

ब्रांड गुरू हरीश बि‍जूर ने बताया कि‍ साल 2017 में इंडि‍यन स्‍टार्टअप्‍स को कम फंडिंग का सामना करना पड़ा था लेकि‍न इसमें भी जि‍न स्‍टार्टअप्‍स में बि‍जनेस अपॉर्च्‍यूनि‍टी मौजूद है उनमें इन्‍वेस्‍टर्स की रुचि‍ बनी हुई है। इस साल कुछ स्‍टार्टअप्‍स हैं जो यूनि‍कॉर्न क्‍लब में शामि‍ल हो सकती हैं। इसकी वजह इन्‍वेस्‍टर्स की बढ़ती रुचि‍ और मार्केट में इनकी बढ़ती डि‍मांड है। इसमें ओयो, बाइजू जैसे नाम हैं। ऐसा इसलि‍ए भी हैं क्‍योंकि‍ इनकी बैलेंसशीट में लगातार सुधार दर्ज कि‍या जा रहा है। साथ ही, कंपनि‍यां प्रॉफि‍ट की दि‍शा में काम कर रही हैं। 

 

OYO Rooms

 

वैल्‍यूएशन : करीब 85 करोड़ डॉलर
अब तक टोटल फंडिंग : 44.8 करोड़ डॉलर

 

स्‍टार्टअप्‍स रि‍सर्च कंपनी tracxn के आंकड़ों के मुताबि‍क, चार साल पुरानी बजट होटल मार्केटप्‍लेस ओयो रूम्‍स को मि‍लने वाली टोटल फंडिंग 44.8 करोड़ डॉलर है जि‍समें बीते साल सि‍तंबर में सॉफ्टबैंक वि‍जन फंड की ओर से कि‍ए गए 25 करोड़ डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट शामि‍ल है। साल 2016 में ओयो रूम्‍स को 50 करोड़ डॉलर की वैल्‍यूएशन पर फंडिंग मि‍ली थी लेकि‍न 2017 के अंत तक इसकी वैल्‍यूएशन बढ़ गई है।ओयो रूम्‍स को सॉफ्टबैंक का सपोर्ट मि‍ला है और सॉफ्टबैंक के सपोर्ट से पहले ही भारत में पांच स्‍टार्टअप्‍स - फ्लि‍पकार्ट, पेटीएम, ओला, मूसिंगमा और स्‍नैपडील यूनि‍कॉर्न बन चुके हैं।  

 

बाइजू

 

वैल्‍यूएशन : करीब 77.6 करोड़ डॉलर
अब तक टोटल फंडिंग : 24.4 करोड़ डॉलर

 

चीन की इंटरनेट कंपनी टेनसेंट होल्‍डिंग की ओर से एड-टेक स्‍टार्टअप बाइजू में करीब 3.5 करोड़ डॉलर की फंडिंग की गई है और यह फंडिंग 77.6 करोड़ डॉलर की वैल्‍यू पर मि‍ली है। कंपनी ने दावा कि‍या है कि‍ वह 2017-18 में प्रॉफि‍टेबल होने की दि‍शा में बढ़ रही है। रजि‍स्‍ट्रार ऑफ कंपनीज के मुताबि‍क, मार्च 2017 के दौरान बाइजू का ग्रॉस रेवेन्‍यू 247 करोड़ रुपए रहा जोकि‍ एक साल के मुकाबले दोगुना है। वहीं, कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्‍यू 108.9 करोड़ रुपए से बढ़कर 230 करोड़ रुपए हो गई। tracxn के मुताबि‍क, बाइजू ने अब तक 24.4 करोड़ डॉलर का फंड जुटाया है।   

 

बि‍गबास्‍केट

 

वैल्‍यूएशन : करीब 85 करोड़ डॉलर
अब तक टोटल फंडिंग : 25.6 करोड़ डॉलर

 

हाइपरलोकल ग्रॉसरी डि‍लि‍वरी कंपनी बि‍गबास्‍केट बीते कुछ सालों से तेजी से बढ़ी है। रजि‍स्‍ट्रार ऑफ कंपनीज के मुताबि‍क, इनोवेटि‍व रि‍टेल कॉन्‍सेप्‍ट प्राइवेट लि‍. के तहत ऑपरेट करने वाली बि‍गबास्‍केट का रेवेन्‍यू 2016-17 में दोगुना बढ़ी। कंपनी की नेट सेल्‍स भी 1,090.49 करोड़ रुपए रही जोकि‍ एक साल पहले 527.46 करोड़ रुपए थी। मौजूदा समय में बि‍गबास्‍केट देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन सुपरमार्केट है। कंपनी का दावा है कि‍ वह 60 लाख कस्‍टमर्स को सर्वि‍स दे रही है और करीब 20 हजार प्रोडक्‍ट्स की डि‍लि‍वरी कर रही है। बि‍गबास्‍केट ने अब तक टोटल 25.6 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई है।  

 

प्रैक्‍टो

 

वैल्यूएशन : 60 करोड़ डॉलर 
अब तक टोटल फंडिंग : 18 करोड़ डॉलर

 

ऑनलाइन हेल्‍थकेयर प्‍लेटफॉर्म प्रैक्‍टो टेक्‍नोलॉजीज प्रा. लि‍. ने साल 2017 की शुरुआत में टेनसेंट से सीरि‍ज डी राउंड में 5.5 करोड़ डॉलर का फंड 60 करोड़ डॉलर से ज्‍यादा की वैल्‍यू पर जुटाया था। प्रैक्‍टो में इन्‍वेस्‍टर्स पोर्टफोलि‍यो में तीन इन्‍वेस्‍टर्स - रू-नेट,  RSI फंड और थ्राइव कैपि‍टल भी शामि‍ल हो गए हैं।

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