Home » Industry » StartupsShareChat Success story of IIT Graduate - 14 बार फेल होने के बाद IIT ग्रेजुएट को मिला शेयरचैट

14 बार फेल होने के बाद खड़ी की कंपनी, अमेरिका भी हो गया मुरीद, ऐसी है ShareChat की कहानी

ShareChat के 40 लाख एक्टिव यूजर्स हैं जो रोजाना 2 लाख पोस्ट डेली शेयर करते हैं।

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नई दिल्ली. बार-बार असफलता के बाद की जाने वाली कोशिशें सफलता की नई कहानी गढ़ती हैं। ऐसा ही भारत के तीन दोस्तों के साथ हुआ, जिनके 14 प्रोजेक्ट फेल हुए और फिर उनके हाथ ऐसी सफलता लगी कि इंडियंस ही नहीं करोड़ों अमेरिकी भी उसके मुरीद हो गए। हम IIT में पढ़ाई कर चुके तीन दोस्त भानू, फरीद और अंकुश की बात कर रहे हैं, जिन्होंने कई कोशिशों के बाद ShareChat की शुरुआत की। इसके भारत ही नहीं अमेरिका में भी करोड़ों सब्सक्राइबर हैं। इसकी सफलता इस बात से भी जाहिर होती है कि इसे फेसबुक और वाट्सऐप का इंडियन वर्जन बताया जा रहा है।
 
क्या है शेयरचैट
शेयर चैट फ्री एंड्रायड ऐप है जो 10 इंडियन भाषा में है। यह अंग्रेजी में नहीं है, बल्कि इसके प्लेटफॉर्म पर भोजपुरी, छत्तीसगढ़ी जैसी भाषाओं में भी पोस्ट शेयर कर सकते हैं। शेयर चैट की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। उनके करीब 40 लाख एक्टिव यूजर्स हैं जो रोजाना 2 लाख पोस्ट डेली शेयर करते हैं। इसमें गुड मॉर्निंग मैसेज, जोक्स और कोट्स शामिल हैं। उनके पोस्ट में वीडियो, न्यूज आदि भी शामिल रहता है। उनके पास 36 करोड़ रुपए की फंडिंग मिल चुकी है। अब वह दूसरे राउंड की फंडिंग जुटाने की योजना बना रहे हैं।
 
तीन दोस्तों ने शुरू किया शेयर चैट
शेयर चैट को 3 दोस्तों ने मिलकर शुरू किया था। 25 साल के फरीद ने अपने आईआईटी के दोस्त भानु सिंह और अंकुश सचदेवा के साथ इसे शुरू किया था। वह इंडिया का अपना सोशल नेटवर्क खड़ा करना चाहते थे। शेयरचैट में भानू प्रताप सिंह सीटीओ, फरीद अहसाान सीईओ और अंकुश सचदेवा चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर की पोस्ट पर हैं। अब शेयर चैट की 50 लोगों की टीम है जिसमें से 18 डेवलपर्स हैं। शेयरचैट का ऑफिस बेंगलुरू में है। उन्होंने शेयरचैट साल 2015 में शुरू किया था।
 
फेसबुक है बड़ा कॉम्पिटिटर
इंडिया में फेसबुक के करीब 24 करोड़ एक्टिव यूजर्स हैं और 24 करोड़ यूजर्स अमेरिका में है। तो क्या फेसबुक उनके सपनों को खत्म कर सकता है। इस पर उन तीनों का मानना था कि फेसबुक के पास लोकल लैग्वेंज में बहुत अधिक ऑप्शन नहीं है इस वजह से वह सरवाइव कर सकते हैं।
 
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17 में से 14 प्रोजेक्ट हुए फेल
उन तीनों को फोर्ब्स ने अंडर 30 लिस्ट में भी जगह मिली है। वेे तीनों बीते छह साल से काम कर रहे हैं। वह पहले बिजनेस पार्टनर बने और उसके बाद उनकी दोस्ती गहरी होती गई। उन तीनों ने एक साथ 17 प्रोजेक्ट पर काम किया, जिनमें से 14 फेल हो गए। 15वें प्रोजेक्ट पर उनका एक प्लान चल निकला। उससे पहले उन्होंने एक 'चैट फाइट' शुरू किया, जिसमें वह इस पर बहस करवाना चाहते थे कि बॉलीवुड में कौन नंबर 1 खान है लेकिन उनका ये प्रोजेक्ट भी नहीं चला।
 
चैट फाइट ने दिया आइडिया
इसी चैट फाइट के दौरान उन्हें 32,000 ऐसे लोग मिले जो सिर्फ अपनी लोकल लैंग्वेज में चैट करना चाहते थे। उन्होंने देखा कि मिदनापुर में रिटायर्ड प्रोफेसर एक ऐसा प्लेटफॉर्म खोज रहे थे जहां वह अपनी भाषा में कम्यूनिकेट कर सकेंं। उनके जैसे लाखों की संख्या में लोग थे जो अपनी भाषा में बात करना चाहते थे। इंडिया में लोकल लैंग्वेज के प्लेटफॉर्म की डिमांड भी बढ़ रही है।
 
Jio से मिला फायदा
जियो की शुरुआत के साथ ही फ्री डेटा और सस्ते एंड्रॉयड फोन के आने से इंटरनेट की दुनिया में पहली बार आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। रूरल और सेमी अर्बन लोगों के लिए लोकल लैंग्वेज में कंटेंट उपलब्ध नहीं था और इस ग्रुप में लोकल लैंग्वेज की डिमांड लगातार बढ़ रही थी। तब 2014 में उन्होंने इंगलिश भाषा को ही हटा दिया। वह यूजर जेनरेटेड कंटेट सिस्टम बनाने लगे।
 
बनाया यूजर बेस्ड प्लेटफॉर्म
ऐसे लोग इंस्टाग्राम या ट्विटर, फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर नहीं जाना चाहते क्योंकि इससे उन्हें जज होने का डर था कि वह किस तरह क कंटेंट कन्जयूम कर रहे हैं। शेयरचैट ने उन्हें ऐसा प्लेटफॉर्म दिया जहां वह बिना किसी डर के पोस्ट कर सकते हैं। उन्हें सोशल मीडिया पर प्राइवेसी नहीं होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
आगे पढ़ें - छोटे शहरों में है ज्यादा शेयरचैट के यूजर्स
 
ज्यादा तेजी से  बढ़ेंगे  हिंदी यूजर्स...
केपीएमजी की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 तक इंडिया के 75 फीसदी लोग इंटरनेट यूज करने वाले होंगे। तब 2021 में अंग्रेजी से ज्यादा हिंदी में पढ़ने वाले यूजर्स ज्यादा होंगे। इसमें बंगाली और मराठी पढ़ने वालों की संख्या भी ज्यादा बढ़ेगी। इसी सर्वे को बेस मानकर तीनों दोस्तों ने अपनी स्ट्रैटजी बनाई।
छोटे शहरों में है ज्यादा शेयरचैट के यूजर्स
अभी उनके 70 फीसदी से ज्यादा यूजर्स12 से 25 साल और 70 साल से अधिक उम्र के हैं। इनमें से 86 फीसदी आबाजी टियर II और टियर III शहरों से है। उनका 5 फीसदी ऑडियंस बांग्लादेश, कनाडा और दुबई में भी है। रोजाना उनके करीब 35 लाख कंटेंट व्हाट्ऐप पर भी शेयर होते हैं।

 

 
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