बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Startupsस्टार्टअप सर्टिफिकेट के नाम पर हो रहा है फ्रॉड, सरकार ने किया अलर्ट

स्टार्टअप सर्टिफिकेट के नाम पर हो रहा है फ्रॉड, सरकार ने किया अलर्ट

मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप इंडिया कैंपेन के नाम पर फ्रॉड हो रहा है।

1 of
 
नई दिल्ली। मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए स्टार्टअप इंडिया कैंपेन के नाम पर फ्रॉड हो रहा है। कई ऐसी एंजेसी स्टार्टअप सर्टिफिकेट देने का फर्जी धंधा कर रही है। यहीं नहीं इस नाम पर एजेंसी फीस भी ले रहे हैं। इस तरह की शिकायतें आने के बाद अब सरकार ने अलर्ट किया है। डिपॉर्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन ने अलर्ट जारी  करते हुए कहा है कि ये सभी तरीके जो अपनाए जा रहे हैं वह पूरी तरह से गैर कानूनी है। ऐसी एजेंसियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

 
कैसे हो रहा है फ्रॉड
 
डिपॉर्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन से moneybhaskar.com को मिली जानकारी के अनुसार उसके पास ऐसी शिकायतें आई हैं कि कई लोग इस बात का भ्रम फैला रहे हैं कि डीआईपीपी ने स्टार्टअप सर्टिफिकेट देने के लिए एजेंसी और फ्रेंचाइजी दे रखी है। जिसके जरिए फर्जी करने वाली कंपनियां स्टार्टअप के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट दे रही हैं।
 
.इसके अलावा सर्टिफिकेट के लिए स्टार्टअप से फ्रॉड करने वाली कंपनियां फीस भी ले रही है। हालांकि डिपॉर्टमेंट का कहना है कि इस तरह की कोई भी एजेंसी और फ्रेंचाइजी डिपार्टमेंट नहीं दे रखी है। साथ ही स्टार्टअप सर्टिफिकेट के लिए किसी तरह की कोई फीस नहीं ली जा रही है।
 
. जिस किसी भी कंपनी को स्टार्टअप सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करना है वह सीधे डिपॉर्टमेंट के पास अप्लाई कर सकता है। उसके लिए उसे किसी एजेंसी के सहारे की जरुरत नहीं है।
 
स्टार्टअप दर्जा मिलने से क्या मिलता है फायदा
 
 
स्टार्टप इंडिया स्कीम के तहत ऐसी कंपनियां को स्टार्ट अप इंडिया का दर्जा मिलता है, जो इन्नोवेशन, नए प्रोडक्ट डेवलपमेंट और सर्विस के लिए काम करती है। इसके तहत कंपनी का गठन 7 साल से ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए।
 
वहीं बॉयो टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों के लिए यह लिमिट 10 साल है। ऐसी कंपनियों को स्टार्टअप का दर्जा मिल सकता है, बशर्ते की उनका टर्नओवर 25 करोड़ रुपए सालाना से ज्यादा न हो। स्टार्टअप का दर्जा मिलने से कंपनियों को लेबर कानून में छूट से लेकर टैक्स बेनिफिट की सुविधाएं मिल जाती है।
 
हालांकि टैक्स छूट के लिए जरुरी है कि कंपनी का गठन एक अप्रैल 2016 के बाद हुआ हो। उसे यह छूट कुल तीन साल एक अप्रैल 2019 तक ही मिल सकती है।
 
पहले भी हो चुका है फ्रॉड
 
स्टार्टअप के रुप मान्यता लेने और उसके तहत मिलने वाले टैक्स बेनिफिट को सरकार का एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप रिव्यू करता है। कंपनियां डिपॉर्टमेंट के पास अपना एप्लीकेशन भेजती है। जिसके बाद ग्रुप उन्हें सर्टिफिकेशन देता है। दिसंबर 2017 में यह बात सामने आई थी, कई कंपनियों ने बेनेफिट लेने के लिए अपनी सब्सिडियरी बनाकर एक नई कंपनी को स्टार्टअप के रुप में रजिस्टर्ड कराया । जिसमें भारतीय कंपनियों के साथ-साथ विदेशी कंपनियां भी शामिल थी। नियमों के अनुसार इस तरह से बनाई गई सब्सिडियरी कंपनी को स्टार्टअप का दर्जा नहीं मिल सकता । बोर्ड ने बाद ऐसी कंपनियों के एप्लीकेशन को कैंसल करने का फैसला किया था, साथ ही कंपनियों से क्लैरिफिकेशन भी मांगा था। डीआईपीपी से मिली जानकारी के अनुसार 20 मार्च तक 8300 से ज्यादा कंपनियों को स्टार्टअप के रुप में मान्यता मिली है। हालांकि टैक्स बेनेफिट का लाभ काफी कंपनियों को ही मिला है।
prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट